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5 batsman Most innings before first duck in Test: क्रिकेट के मैदान पर जीरो पर आउट होना किसी भी बल्लेबाज के लिए एक डरावने सपने जैसा होता है. लेकिन टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में कुछ ऐसे महारथी भी हुए हैं, जिन्होंने अपनी एकाग्रता और तकनीक के दम पर इस ‘कलंक’ को सालों तक खुद से दूर रखा. आज हम उन पांच महान बल्लेबाजों के बारे में इस आर्टिकल में जानेंगे, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत के बाद शून्य के आंकड़े को छूने से पहले सबसे लंबी दूरी तय की.
दक्षिण अफ्रीका के ‘मिस्टर 360’ कहे जाने वाले एबी डिविलियर्स (AB De Villiers) केवल अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अविश्वसनीय एकाग्रता के लिए भी जाने जाते हैं. उन्होंने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत से लेकर लगातार 78 पारियों तक कभी भी शून्य का मुंह नहीं देखा. 17 दिसंबर 2004 को इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू के बाद उन्होंने करीब चार साल तक हर तरह की परिस्थिति और हर तरह के गेंदबाज का सामना किया, लेकिन कभी भी ‘डक’ पर आउट नहीं हुए. यह रिकॉर्ड उनकी तकनीकी श्रेष्ठता और क्रीज पर टिके रहने की अद्भुत क्षमता का प्रमाण है.

श्रीलंका के महान बल्लेबाज अरविंद डी सिल्वा (Arvinda De Silva) इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर हैं. डी सिल्वा की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने 75 पारियों तक शून्य से दूरी बनाए रखी. 23 अगस्त 1984 को अपने करियर की शुरुआत करने वाले डी सिल्वा ने विश्व क्रिकेट के सबसे घातक गेंदबाजों के युग में बल्लेबाजी की. उनका यह अटूट सिलसिला 1984 से लेकर 1994 तक यानी पूरे 10 साल तक चला. यह दर्शाता है कि वे न केवल एक प्रतिभावान बल्लेबाज थे, बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद मजबूत थे.

वेस्टइंडीज के महानतम कप्तानों में से एक क्लाइव लॉयड का नाम इस सूची में शामिल होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है. लॉयड ने अपने करियर की पहली 58 पारियों में एक बार भी शून्य का स्कोर नहीं बनाया. 1966 में भारत के खिलाफ डेब्यू करने वाले लॉयड ने अपनी भारी-भरकम बल्लेबाजी से दुनिया को डराया, लेकिन खुद कभी ‘डक’ के डर को अपने पास नहीं आने दिया. 1974 में जाकर इंग्लैंड के खिलाफ उनका यह शानदार सफर थमा, जो आठ साल का एक लंबा अंतराल था.
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मॉडर्न क्रिकेट के महान खिलाड़ियों में शुमार रॉस टेलर (Ross Taylor) ने भी क्लाइव लॉयड की बराबरी करते हुए अपने पहले डक से पहले 58 पारियां खेलीं. 2007 में ऑस्ट्रेलिया जैसी खतरनाक टीम के खिलाफ डेब्यू करने के बाद टेलर ने अपनी तकनीक पर भरोसा रखा. उन्होंने 2011 तक यानी चार साल तक लगातार रन बनाए और अपनी पारी की शुरुआत में कभी भी एकाग्रता नहीं खोई. ब्रिसबेन की उछाल भरी पिचों से लेकर उपमहाद्वीप की टर्न लेती पिचों तक, उन्होंने हर जगह खुद को साबित किया.

इस लिस्ट का सबसे प्रेरणादायक नाम जेम्स एंडरसन (James Anderson) का है. एंडरसन मुख्य रूप से एक तेज गेंदबाज हैं, लेकिन उन्होंने अपनी बल्लेबाजी पर इतना काम किया कि वे लगातार 54 पारियों तक शून्य पर आउट नहीं हुए.एक निचले क्रम के बल्लेबाज के लिए यह उपलब्धि किसी शतक से कम नहीं है. 2003 में डेब्यू के बाद 2009 तक उन्होंने कई बार अपनी टीम को हार से बचाया और पुछल्ले बल्लेबाज के रूप में बहुमूल्य रन जोड़े. उनका यह रिकॉर्ड साबित करता है कि टेस्ट क्रिकेट में हर विकेट की कीमत होती है.

इन पांचों खिलाड़ियों के रिकॉर्ड्स केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये ऐतिहासिक मैदानों की कहानियां भी कहते हैं. जहां डिविलियर्स का रिकॉर्ड उनके घरेलू मैदान सेंचुरियन में टूटा, वहीं एंडरसन का सफर लंदन के प्रतिष्ठित ‘ओवल’ मैदान पर खत्म हुआ. क्लाइव लॉयड ने पोर्ट ऑफ स्पेन में अपना पहला डक झेला, तो डी सिल्वा ने बुलावायो (जिम्बाब्वे) में. ये स्थान इन खिलाड़ियों के करियर के सबसे यादगार मोड़ों के गवाह बने.

इन आंकड़ों को गहराई से देखने पर पता चलता है कि ये रिकॉर्ड्स कमजोर टीमों के खिलाफ नहीं बने.टेलर और एंडरसन ने ऑस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीम के खिलाफ खेलते हुए इस सिलसिले को बरकरार रखा.वहीं लॉयड ने इंग्लैंड की धारदार गेंदबाजी का सामना किया. विपक्षी टीम का दबाव होने के बावजूद शून्य पर आउट न होना इन खिलाड़ियों की क्लास को दर्शाता है.

अगर हम समय के पैमाने पर देखें, तो अरविंद डी सिल्वा (10 साल) और जेम्स एंडरसन (6 साल) ने सबसे लंबा समय बिताया. डिविलियर्स ने 4 साल और लॉयड ने 8 साल तक अपना विकेट ‘शून्य’ के स्कोर पर नहीं गिरने दिया. इतने लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के उच्चतम स्तर पर बने रहना और कभी भी पहली कुछ गेंदों पर गलती न करना एक असाधारण उपलब्धि है.

जब कोई बल्लेबाज शून्य पर आउट नहीं होता, तो वह टीम को एक मनोवैज्ञानिक बढ़त देता है. डिविलियर्स और डी सिल्वा जैसे ऊपरी क्रम के बल्लेबाजों ने सुनिश्चित किया कि टीम की शुरुआत खराब न हो. वहीं एंडरसन जैसे गेंदबाजों ने निचले क्रम में टिककर मुख्य बल्लेबाजों का साथ दिया, जिससे टीम का कुल स्कोर हमेशा सम्मानजनक बना रहा.

अंततः, ये सभी रिकॉर्ड्स हमें क्रिकेट की अनिश्चितता के बारे में बताते हैं. चाहे खिलाड़ी कितना भी महान क्यों न हो, एक दिन उसे भी शून्य का सामना करना पड़ता है. लेकिन 78, 75 या 58 पारियों तक उस क्षण को टाल देना ही इन खिलाड़ियों को ‘लीजेंड’ बनाता है. यह कहानी हमें सिखाती है कि क्रिकेट में ‘शून्य’ केवल एक नंबर नहीं, बल्कि धैर्य की परीक्षा है जिसे इन दिग्गजों ने बखूबी पास किया.


