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9000 KMPH की तुफानी रफ्तार, 1000 किलोमीटर तक तबाही, ब्रह्मोस से ज्‍यादा घातक – Shaurya NG hypersonic missile 9000 kmph speed 1000 km range

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9000 KMPH की तूफानी रफ्तार, 1000 किलोमीटर तक तबाही, ब्रह्मोस से ज्‍यादा घातक

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Shaurya-NG Hypersonic Missile: मिसाइल तकनीक के मामले में भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों की लिस्‍ट में शामिल है, जिसके पास एक से बढ़कर एक घातक और लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम मिसाइलें हैं. अग्नि-5, प्रलय और ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल इसके कुछ उदाहरण हैं. अब भारत की म्‍यान में मिसाइल रूपी एक ऐसा तीर शामिल होने वाला है, जिसकी मार से बच पाना नामुमकिन सा है. अत्‍याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम भी इसके सामने फेल हो जाएंगे. इस मिसाइल की रफ्तार और हवा में गुलाटी मारने की क्षमता इसे दूसरों से काफी अलग और खतरनाक बनाती हैं.

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DRDO शौर्य-NG हाइपरसोनिक मिसाइल डेवलप कर रहा है. यह प्रस्‍तावित रॉकेट फोर्स को और ताकतवर बनाने की क्षमता रखती है. (फाइल फोटो/AP)

Shaurya-NG Hypersonic Missile: दुश्‍मनों से खुद को सुरक्षित रखने का सबसे बेहतरीन तरीका है अपनी आक्रामकता की धार को तेज और प्रखर बनाए रखना. कहावत भी है कि ऑफेंस इस द बेस्‍ट डिफेंस. इसका मतलब यह है कि आक्रामकता सुरक्षा का बेहतरीन तरीका है. दुनिया का हर देश इसी सिद्धांत पर अपनी सुरक्षा नीति बनाते हैं. परमाणु का बम का इस्‍तेमाल अभी तक सिर्फ अमेरिका ने द्वितीय विश्‍वयुद्ध के दौरान किया है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि न्‍यूक्लियर बम सिर्फ अमेरिका के पास ही है. रूस, चीन, भारत जैसे देशों के पास भी यह विनाशक हथियार है. इसका इस्‍तेमाल हमले के लिए कम और डेटरेंस के तौर पर ज्‍यादा होता है. उसी तरह दुनिया में कई देशों के पास एक से बढ़कर एक मिसाइल्‍स हैं, लेकिन अभी तक उनका इस्‍तेमाल काफी कम या न के बराबर किया गया है. जैसे भारत के पास अग्नि सीरीज की कई घातक मिसाइलें हैं. रूस, अमेरिका, चीन के पास भी लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें हैं. यह मुख्‍य तौर पर डेटरेंस के लिए हैं, ताकि दुश्‍मन हमला करने से पहले हजार बार सोचे. इसी नीति पर भारत भी चल रहा है. हालिया सुरक्षा हालात को देखते हुए भारत ने इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स बनाने का फैसला किया है. इसमें कई घातक मिसाइलें होंगी. शौर्य-NG यानी शौर्य मिसाइल का नेक्‍स्‍ट जेनरेशन वेरिएंट भी रॉकेट फोर्स का अहम हिस्‍सा होगी. यह एक हाइपरसोनिक मिसाइल है, जिसका ट्रायल लगातार चल रहा है. खासकर चीन और पाकिस्‍तान की हरकतों को देखते हुए भारत ने इस खतरनाक हाइपरसोनिक मिसाइल को डेवलप किया है. शौर्य-एनजी हाइपरसोनिक मिसाइल 9000 किलोमीटर प्रति घंटे की ज्‍यादा की रफ्तार से 1000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है. शौर्य-NG को चीन के DF-17 हाइपरसोनिक मिसाइल के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है.

भारत की सामरिक मारक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Defence Research and Development Organisation (DRDO) अब शौर्य मिसाइल के नेक्स्ट जेनरेशन (NG) वेरिएंट के परीक्षण की तैयारी कर रहा है. यह एडवांस हाइपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल अपनी तेज गति, सटीकता और आधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भेदने की क्षमता के लिए जानी जाती है. शौर्य मिसाइल (जिसे DRDO ने ही विकसित किया है) पहले से ही 700 से 1000 किलोमीटर की मारक क्षमता के साथ भारतीय सेना के लिए एक अहम सामरिक हथियार रही है. यह मिसाइल कैनिस्टर-लॉन्च सिस्‍टम पर आधारित है, जिससे इसे मोबाइल लॉन्चर से बेहद कम समय में तैनात किया जा सकता है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी हाइपरसोनिक गति और क्वासी-बैलिस्टिक (pseudo-ballistic) फ्लाइट प्रोफाइल है, जो इसे पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों से अलग बनाती है. अब विकसित किए जा रहे शौर्य NG संस्करण में खास तौर पर अंतिम चरण (टर्मिनल फेज) में इसकी रफ्तार और बचाव क्षमता (survivability) को बढ़ाने पर जोर दिया गया है. इस चरण में इसे तेज ‘जिंकिंग’ (zig-zag) मूवमेंट करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे दुश्मन की इंटरसेप्टर मिसाइलों के लिए इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है. लगभग 2.4 से 2.5 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से उड़ती मिसाइल जब अनियमित दिशा में मुड़ती है, तो उसे ट्रैक करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

शौर्य-NG बनाम ब्रह्मोस मिसाइल
शौर्य-NG हाइपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल
Defence Research and Development Organisation (DRDO) द्वारा विकसित शौर्य-NG (Shaurya-NG) एक उन्नत, कैनिस्टर-लॉन्च हाइपरसोनिक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे अगली पीढ़ी के सटीक स्ट्राइक हथियार के रूप में तैयार किया गया है. भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल है, जिसकी गति करीब मैक 2.8 से 3.0 तक है, जिससे इसे इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल हो जाता है.
यह मिसाइल मैक 7 से अधिक (हाइपरसोनिक गति) से उड़ान भरने में सक्षम है और लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता रखती है, जिससे यह दुश्मन के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण लक्ष्य बन जाती है. यह मिसाइल फायर एंड फॉरगेट तकनीक से लैस है, यानी लॉन्च के बाद इसे किसी अतिरिक्त मार्गदर्शन की जरूरत नहीं होती और यह अत्यंत सटीकता के साथ लक्ष्य को भेदती है.
क्वासी-बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी और टर्मिनल मैन्युवरिंग इसकी प्रमुख खासियत है – यह वायुमंडल के भीतर उड़ते हुए हाई-G जिंकिंग मूवमेंट करती है, जिससे इसे इंटरसेप्ट करना कठिन हो जाता है. ब्रह्मोस को जमीन, समुद्र और हवा तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है, जिससे भारतीय सशस्त्र बलों को मल्टी-डायमेंशनल स्ट्राइक क्षमता मिलती है.
इसमें मल्टी-मोड सीकर (एक्टिव रडार + इंफ्रारेड) लगा है, जो हाइपरसोनिक स्पीड पर बनने वाली प्लाज्मा परत के बावजूद सटीक अटैक सुनिश्चित करता है. मिसाइल में लो-रडार सिग्नेचर और समुद्र की सतह के बेहद करीब उड़ान भरने (सी-स्किमिंग) की क्षमता है, जिससे दुश्मन के रडार के लिए इसे पकड़ पाना कठिन हो जाता है.
शौर्य-एनजी परंपरागत और परमाणु दोनों प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम है तथा कोल्ड-लॉन्च कैनिस्टर सिस्टम के जरिए मोबाइल प्लेटफॉर्म से तेजी से तैनात की जा सकती है, जिससे भारत की रणनीतिक मारक क्षमता और मजबूत होती है. लगभग 290 से 500 किलोमीटर तक की रेंज (विभिन्न वर्ज़न में अलग-अलग) वाली यह मिसाइल पारंपरिक और परमाणु दोनों तरह के वारहेड ले जाने में सक्षम है, जो इसे भारत की रणनीतिक ताकत का अहम हिस्सा बनाती है.

मल्टी-मोड सीकर टेक्‍नोलॉजी

इस परियोजना का एक अहम पहलू स्वदेशी मल्टी-मोड सीकर का विकास है. यह सीकर इमेजिंग इंफ्रारेड (IIR) और एक्टिव रडार गाइडेंस तकनीकों का संयोजन होगा, जो हाइपरसोनिक गति के दौरान भी लक्ष्य को ट्रैक करने में सक्षम रहेगा. दरअसल, जब मिसाइल मैक 7 (9000 KMPH से ज्‍यादा रफ्तार) से अधिक गति से वातावरण में प्रवेश करती है, तो उसके चारों ओर प्लाज्मा की एक परत बन जाती है, जो रेडियो सिग्नल को बाधित कर सकती है. इस चुनौती से निपटना किसी भी देश के लिए अत्याधुनिक तकनीकी उपलब्धि माना जाता है. शौर्य-NG की उड़ान प्रोफाइल भी इसे खास बनाती है. लॉन्च के बाद यह लगभग 50 किलोमीटर की ऊंचाई तक जाती है और फिर पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तरह सीधी गिरावट की बजाय क्वासी-बैलिस्टिक मार्ग अपनाती है. इस दौरान यह वायुमंडल की ऊपरी परतों में रहते हुए अपने फिन्स (fins) की मदद से दिशा बदल सकती है. यही कारण है कि इसकी अंतिम टारगेट प्वाइंट का अनुमान लगाना दुश्मन के रडार सिस्टम के लिए बेहद कठिन हो जाता है.

शौर्य नेक्‍स्‍ट जेनरेशल हाइपरसोनिक मिसाइल को S-400 या THAAD जैसे आधुनिक ण्‍एयर डिफेंस सिस्‍टम से भी इंटरसेप्‍ट करना नामुमकिन के करीब है. (फाइल फोटो/Reuters)

कोल्ड लॉन्च सिस्टम

‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, शौर्य-NG में कैनिस्टर आधारित कोल्ड लॉन्च सिस्टम को भी और उन्नत किया गया है. इस प्रणाली में गैस जनरेटर मिसाइल को पहले कैनिस्टर से बाहर निकालता है और फिर हवा में मुख्य रॉकेट मोटर सक्रिय होती है. इससे लॉन्च प्लेटफॉर्म पर दबाव कम पड़ता है और सुरक्षा भी बढ़ती है. साल 2026 में परीक्षण के लिए तैयार किए जा रहे नए संस्करण में एक मजबूत कंपोजिट कैनिस्टर शामिल किया गया है, जो मिसाइल को 10 से 15 वर्षों तक बिना किसी बड़े रखरखाव के तैयार अवस्था में रख सकता है. यह क्षमता युद्ध के समय त्वरित तैनाती को संभव बनाती है. साथ ही, ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर (TEL) वाहन से इसे पांच मिनट से भी कम समय में लॉन्च के लिए तैयार किया जा सकता है, जिससे इसकी गतिशीलता और जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है.

इस वजह से खास है शौर्य-NG

विशेषज्ञों का मानना है कि शौर्य NG का विकास ऐसे समय में हो रहा है, जब दुनिया भर में मिसाइल रक्षा प्रणालियां तेजी से उन्नत हो रही हैं. ऐसे में, यह मिसाइल बैलिस्टिक मिसाइल की गति और क्रूज मिसाइल की गतिशीलता का संयोजन प्रस्तुत करती है, जो भविष्य की युद्ध रणनीतियों में भारत को बढ़त दिला सकती है. शौर्य-NG कार्यक्रम भारत की प्रतिरोधक क्षमता (deterrence capability) को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है. यदि इसके सभी परीक्षण सफल रहते हैं, तो यह न केवल भारतीय सशस्त्र बलों की मारक शक्ति को बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की हाइपरसोनिक तकनीक में बढ़ती पकड़ को भी प्रदर्शित करेगा.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें



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