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प्रतापगढ़ के कुंडा विधानसभा सीट से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह ने एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. भानवी सिंह ने 5 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का हड़पने का आरोप लगाया है.
भानवी सिंह ने एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह पर दर्ज कराई एफआईआर.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और साझेदारी फर्म के दस्तावेजों में हेरफेर के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है. उन पर 5 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति हड़पने का आरोप है. लखनऊ की एक अदालत ने सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद गुरुवार को हजरतगंज पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया. पुलिस ने आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 465 (जालसाजी) भी एफआईआर में जोड़ी है.
राजा भैया की पत्नी ने दर्ज कराई FIR
शिकायत उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की पत्नी भानवी कुमारी सिंह ने दर्ज कराई है. अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि जाली दस्तावेजों और फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल करके उस पार्टनरशिप फर्म के ऑनरशिप स्ट्रक्चर को अवैध रूप से बदल दिया गया, जिसमें वह पार्टनर थीं. भानवी सिंह ने दावा किया कि फर्म की संपत्तियों का बाजार मूल्य 5 करोड़ रुपये से अधिक है और आरोप लगाया कि नवंबर 2020 से सितंबर 2022 के बीच अक्षय प्रताप सिंह और उनके सहयोगियों ने फर्म पर कब्जा करने की साजिश रची.
राजा भैया के करीबी रिश्तेदार हैं अक्षय प्रताप सिंह
बता दें कि अक्षय प्रताप सिंह भी राजा भैया के करीबी रिश्तेदार हैं. एफआईआर के मुताबिक भानवी सिंह ने 10 फरवरी 2014 को अक्षय प्रताप सिंह के साथ पार्टनरशिप फर्म बनाई थी. पार्टनरशिप फर्म में भानवी सिंह ने करोड़ों रुपए निवेश किए थे. कुछ साल पहले भानवी को पता चला कि अक्षय प्रताप और उनके साथियों ने दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर उनकी संपत्ति हड़प ली. एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच में जुटी थाना हजरतगंज पुलिस.
FIR पर क्या बोले अक्षय प्रताप सिंह
एफआईआर में रोहित कुमार सिंह, अनिल कुमार सिंह और राम देव यादव के साथ-साथ अज्ञात व्यक्तियों के नाम भी शामिल किए गए हैं. वहीं एफआईआर दर्ज होने के बाद एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप एकतरफा और कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं. उन्होंने दावा किया कि संबंधित फर्म में दो निदेशक थे और दोनों पक्षों की सहमति और हस्ताक्षर के बिना कोई बदलाव नहीं किया जा सकता था. उन्होंने आगे दावा किया कि निदेशकों ने संयुक्त रूप से सदस्यों की नियुक्ति को मंजूरी दी थी और सभी प्रक्रियाएं कानूनी रूप से पूरी की गई थीं.
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Prashant Rai am currently working as Chief Sub Editor at News18 Hindi Digital, where he lead the creation of hyper-local news stories focusing on politics, crime, and viral developments that directly impact loc…और पढ़ें


