Last Updated:
Bihar Bureaucracy Change: बिहार में सत्ता परिवर्तन के साइड इफेक्ट अब सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसकी गूंज ब्यूरोक्रेसी के गलियारों तक साफ सुनाई देने लगी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब प्रशासनिक सिस्टम में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है. जानकारी के अनुसार, जो अफसर वर्षों से सत्ता के ‘पावर सर्कल’ का हिस्सा थे, उनके अब नई दिशा की ओर बढ़ने के संकेत नजर आ रहे हैं.
नीतीश कुमार के त्यागपत्र के बाद बिहार ब्यूरोक्रेसी में बड़ा फेरबदल तय
पटना. बिहार की सियासत में हलचल के बीच अब सत्ता के गलियारों यानी ‘ब्यूरोक्रेसी’ में भी बड़े परिवर्तन की आहट है. मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद अब यह साफ हो गया है कि नई सरकार के गठन के साथ ही राज्य की प्रशासनिक मशीनरी का चेहरा पूरी तरह बदल जाएगा. सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री सचिवालय की वह ‘कोर टीम’, जो वर्षों से नीतीश कुमार की आंख और कान बनी हुई थी, अब केंद्र का रुख करने वाली है.
नीति आयोग जा सकते हैं ‘पावर सेंटर’ दीपक कुमार
इस बदलाव की सबसे बड़ी खबर दीपक कुमार को लेकर है. मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और बिहार के पूर्व मुख्य सचिव रहे दीपक कुमार को राज्य की नौकरशाही का सबसे ताकतवर चेहरा माना जाता है. चर्चा है कि अब वे दिल्ली स्थित नीति आयोग में सदस्य के रूप में नई पारी शुरू कर सकते हैं. बता दें कि 2021 से लगातार संविदा (Contract) पर तैनात दीपक कुमार 2018 से 2021 तक बिहार के मुख्य सचिव की अहम जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.
अनुपम कुमार और गोपाल सिंह की भी ‘सेंट्रल’ उड़ान
सिर्फ दीपक कुमार ही नहीं, मुख्यमंत्री के भरोसेमंद सचिव अनुपम कुमार भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (Central Deputation) पर जाने की तैयारी में हैं. वहीं, सीएम के ओएसडी (OSD) गोपाल सिंह को भी केंद्र जाने के लिए हरी झंडी मिल चुकी है. इन दिग्गज अधिकारियों का एक साथ सचिवालय से जाना इस बात का संकेत है कि नई सरकार में कामकाज का तरीका और चेहरे, दोनों बिल्कुल नए होंगे.
युवा आईएएस कंधों पर होगी नई जिम्मेदारी
सूत्रों का कहना है कि नए मुख्यमंत्री की टीम में इस बार अनुभवी चेहरों के बजाय नए और ऊर्जावान आईएएस अधिकारियों को प्राथमिकता दी जाएगी. शासन में नई ताजगी लाने के लिए ब्यूरोक्रेसी के निचले और मध्यम स्तर पर बड़े फेरबदल की स्क्रिप्ट तैयार हो चुकी है. देखने वाली बात होगी कि वे राज्य की विकास यात्रा को कितनी रफ्तार दे पाते हैं.
क्या होगा असर?
पुराने और अनुभवी अफसरों के केंद्र की ओर रुख करने से राज्य में नई पीढ़ी के अधिकारियों को मौका मिलेगा. अब नजर इस बात पर है कि नई सरकार किन चेहरों पर भरोसा जताती है और यह नई टीम बिहार के विकास को कितनी रफ्तार दे पाती है. साफ है कि यह सिर्फ सरकार का नहीं, बल्कि सिस्टम के पूरे ‘रीसेट’ का दौर है.
About the Author

पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें


