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बांके बिहारी मंदिर में आखिर क्यों टूटी फूल बंगला सजवाने की परंपरा? पुजारी ने बताया पूरा सच

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Mathura News: वृंदावन के ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में सदियों से चली आ रही फूल बंगले सजवाने की परंपरा अब टूट रही है. इस परंपरा को टूटने से गोस्वामी समाज और ठाकुर जी के भक्तों में निराशा देखने को मिल रही है. मंदिर के पुजारी ने खुद बताया कि आखिर यह परंपरा क्यों टूट रही है.

मथुरा: वृंदावन के ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में सदियों से चली आ रही फूल बंगले सजवान की परंपरा लगातार टूट रही है. इस परंपरा को टूटने से गोस्वामी समाज और ठाकुर जी के भक्तों में निराशा देखने को मिल रही है. वहीं हाई पावर्ड कमेटी की ओर से विगत दिनों हुई बैठक में कई अहम फैसले भी लिए गए. बैठक में ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में सजने वाले फूल बंगलो की शुल्क राशि को डेढ़ लाख रुपए से घटाकर 101000 रुपए कर दिया गया है, तो वहीं सुरक्षा और साफ-सफाई को लेकर भी बैठक में निर्णय लिए गए.

वृंदावन ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान बांके बिहारी में चढ़ावा भी चढ़ाते हैं. सर्दी, गर्मी या वसंत ऋतु में श्रद्धालु मंदिर में होने वाले कार्यक्रमों में हिस्सा भी लेते हैं. जिसकी जैसी श्रद्धा होती है, वह भगवान के लिए दान करता है और गर्मी में बाहर से आने वाले श्रद्धालु ठाकुर जी को ठंडक पहुंचाने के लिए देसी और विदेशी फूलों से फूल बंगला सजवाते हैं.

सदियों से चली आ रही परंपरा
ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में फूल बंगला सजाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. हर कोई श्रद्धालु हिस्सा लेकर दान कर पुण्य कमाता है. ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में सजने वाले फूल बंगले की परंपरा अब टूटती हुई नजर आ रही है. ऐसा पहली बार हुआ कि ग्रीष्म ऋतु शुरू होने के बाद बिहारी जी के मंदिर में फूल बंगला नहीं सजा. मंदिर में फूल बंगला ना सजने से श्रद्धालुओं के साथ-साथ ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के पुजारी की आत्मा भी आहत हुई.

भक्तों की श्रद्धा को आहत
ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में फूल बंगला ना सजने की मुख्य वजह क्या रही. यह परंपरा क्यों टूटी, ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के पुजारी श्रीनाथ उर्फ शालू गोस्वामी ने इसके बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस बार कमेटी के पदाधिकारी की उदासीनता के कारण फूल बंगले नहीं सजाए गए. जो भी भक्त फूल बंगले सजवाता था, वह भगवान की दहलीज का पूजन करता था और इस बार हाई पावर्ड कमेटी ने उस पूजन को बंद कर दिया, जिसके लिए श्रद्धालुओं की श्रद्धा आहत हुई और उन्होंने फूल बंगले सजवाने से इनकार कर दिया.

हाई पावर्ड कमेटी और पुजारी में मतभेद
उन्होंने बताया कि हाई पावर्ड कमेटी से पहले करीब 15000 रुपए की एक रसीद करती थी, जो मंदिर की व्यवस्थाओं के लिए वह पैसा लिया जाता था. लेकिन जब से इस कमेटी ने मंदिर पर होल्ड किया है, तब से व्यवस्थाएं लाचार हो गई हैं. एक फूल बंगले की शुल्क राशि डेढ़ लाख रुपये रखी थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों में जो बैठकें हुई, उनमें डेढ़ लाख रुपए की राशि को घटाकर 1 लाख 1000 रुपए तय कर दिया है. श्रद्धालुओं की जेब पर भार पड़ने से उन्होंने फूल बंगला सजवाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है. वहीं सूत्रों की अगर माने, तो हाई पावर्ड कमेटी और मंदिर के पुजारी में आपसी मतभेद होने के कारण भी फूल बंगले नहीं सजवाने की बात सामने निकलकर आ रही है.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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