Last Updated:
ईरान संकट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी सैन्य गतिरोध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज पीएम मोदी को फोन किया. 40 मिनट की इस लंबी बातचीत में पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालातों पर गंभीर चर्चा हुई. इस्लामाबाद वार्ता विफल होने के बाद 22 अप्रैल तक का अस्थायी युद्धविराम लागू है. ट्रंप ने इस साल तीसरी बार मोदी से संपर्क कर क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने और कूटनीतिक समाधान निकालने पर जोर दिया है.
ट्रंप ने पीएम मोदी को फोन मिलाया.
पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और ईरान संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आज फोन पर लगभग 40 मिनट तक अहम बातचीत हुई. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस उच्चस्तरीय वार्ता की पुष्टि करते हुए बताया कि इस साल दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी टेलीफोनिक बातचीत है. यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद से क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बनी हुई है. हालांकि वर्तमान में 22 अप्रैल तक के लिए एक अनिश्चित युद्धविराम लागू है लेकिन पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में हुई वार्ता बेनतीजा रहने के कारण सैन्य गतिरोध बना हुआ है. पीएम मोदी और ट्रंप ने इस सैन्य गतिरोध को समाप्त करने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के विकल्पों पर चर्चा की.
कूटनीति के केंद्र में भारत
1. होर्मुज की नाकेबंदी और अमेरिका का दांव: इस्लामाबाद में हुई वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद अमेरिका ने होर्मुज पर नाकेबंदी जैसी स्थिति पैदा कर दी है. ट्रंप जानते हैं कि इस तनाव का सबसे बुरा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर होगा जिससे चीन जैसे देशों की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. ऐसे में ट्रंप का पीएम मोदी को फोन करना यह दर्शाता है कि अमेरिका को इस संकट से निकलने के लिए भारत के ‘मध्यस्थ’ वाले प्रभाव की जरूरत है.
2. भारत के लिए विन-विन स्थिति: आज भारत दुनिया का इकलौता ऐसा देश है जिसके संबंध इजरायल और अमेरिका के साथ जितने मजबूत हैं, उतने ही गहरे संबंध ईरान और खाड़ी देशों (UAE, सऊदी अरब) के साथ भी हैं. भारत की यह संतुलित कूटनीति उसे एक अलग लीग में लाकर खड़ा करती है. जबकि दुनिया दो धड़ों में बंट रही है, पीएम मोदी का प्रभाव दोनों पक्षों पर समान रूप से है.
3. पाकिस्तान की विफलता: इस्लामाबाद में वार्ता का फेल होना पाकिस्तान की कूटनीतिक अपरिपक्वता और उसकी सेना के दोहरे चरित्र को उजागर करता है. पाकिस्तान केवल ‘होस्ट’ बनकर अपनी जमीन का इस्तेमाल करवाना चाहता था लेकिन उसके पास समाधान देने की न तो दृष्टि है और न ही अंतरराष्ट्रीय साख. इसके विपरीत ट्रंप का सीधे नई दिल्ली फोन मिलाना यह संदेश है कि दक्षिण एशिया का असली नेतृत्व और वैश्विक संकटों का समाधान भारत के पास ही है.
About the Author

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें


