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फिरोजाबाद कंगन मार्केट I FIROZABAD NEWS

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फिरोजाबाद के नाल बंद चौराहे के पास लगने वाली 25 साल पुरानी कंगन मंडी अपनी सस्ती कीमतों और अनोखी रौनक के लिए मशहूर है. यहां सुबह 6 बजे से ठेलों पर बोरोशिल कांच की अलग-अलग डिजाइन की चूड़ियां और कंगन सजने लगते हैं, जो मात्र 5 रुपये से शुरू हो जाते हैं. देशभर से व्यापारी यहां होलसेल दाम पर माल खरीदने आते हैं और आगे बेचकर अच्छी कमाई करते हैं.

फिरोजाबाद.  यूपी का फिरोजाबाद शहर कांच की चूड़ियों के लिए जाना जाता है, यहां हर घर, गली में चूड़ियों का व्यापार होता है. लेकिन यहां एक ऐसी मंडी भी है जहां सिर्फ चूड़ियां ही चूड़ियां मिलती हैं. फिरोजाबाद के नाल बंद चौराहे के पास ठेले पर कंगनों और चूड़ियों की काफी बड़ी मार्केट लगती है. देश भर से चूड़ी व्यापारी यहां आकर माल खरीदते हैं. इस मार्केट में बोरोशिल कांच से तैयार सस्ती और अच्छी चूड़ियां और कंगन मिलते हैं. अगर आप भी अच्छे कंगन खरीदना चाहते हैं तो यहां एक बार जरूर आएं.

25 साल पुरानी है फिरोजाबाद की ये कंगन मार्केट 
फिरोजाबाद के रसूलपुर में चूड़ी कंगन का बिजनेस करने वाले व्यापारी विनोद कुशवाह ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए बताया कि फिरोजाबाद के नाल बंद चौराहे के पास लगने वाली ये कंगन मार्केट लगभग 25 साल पुरानी है. वैसे तो फिरोजाबाद में कांच की एक बड़ी मार्केट है लेकिन शहर के रसूलपुर इलाके में सुबह लगने वाली ये मार्केट बहुत सस्ती है. इस मार्केट में चूड़ियों और कंगनों की बड़ी मंडी लगती है. यहां दुकानों के अलावा ठेलों पर बोरोशिल के कंगन कम रेट में मिलते हैं. यहां मात्र 5 रूपए में नई नई डिजाइन के कंगन मिल जाते हैं. वहीं उन्होंने कहा कि इस कंगन की मंडी में होलसेल की रेट में चूड़ियां और कंगन मिल जाते हैं.

सुबह 6 बजे सजने लगते हैं कंगन 
मार्केट में चूड़ियों और कंगनों को बेचने वाले दुकानदार ने कहा कि फिरोजाबाद की ये मण्डी सबसे अलग है. यहां सुबह 6 बजे से ठेले पर चूड़ियां और कंगन सजने लगते हैं. यहां हल्की भारी हर तरह की डिजाइन वाली चूड़ियां मिलती हैं. जिनको देश भर से लोग खरीदकर ले जाते हैं. वहीं दुकानदार यहां से कम रेट में ले जाकर महंगे दामों में बेचते हैं और डबल इनकम करते हैं.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



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