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Women Reservation Bill : West Bengal Chunav | बीजेपी का महिला आरक्षण बिल वाला दांव, क्या बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी को देगा ‘जोर का झटका धीरे से’?

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Women Reservation Bill: पश्चिम बंगाल की राजनीति में महिला वोटर्स हमेशा से निर्णायक भूमिका में रही हैं. संसद में महिला आरक्षण बिल के अटकने के बाद बीजेपी नेता दिलीप घोष ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा है. क्या दीदी को इस विरोध का चुनावी नुकसान होगा या ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं के दम पर उनका जादू बरकरार रहेगा? जानें सत्ता और विपक्ष के बीच छिड़ी इस जंग की बंगाल चुनाव पर असर और उसकी पूरी इनसाइड स्टोरी.

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क्या महिला आरक्षण बिल का मुद्दा बंगाल चुनाव में अहम रोल अदा करेगा.

कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजनीति में महिलाओं को हमेशा से सत्ता की ‘साइलेंट मेकर’ माना जाता रहा है. शुक्रवार को में संसद में महिला आरक्षण बिल के पारित न होने के बाद राज्य में राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. मेदिनीपुर से भाजपा के कद्दावर नेता दिलीप घोष के बयान ने इस मुद्दे को सीधे तौर पर आगामी बंगाल चुनावों से जोड़ दिया है. दिलीप घोष ने साफ तौर पर कहा कि यह बिल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था, लेकिन कुछ महिला नेताओं और विपक्षी दलों के सहयोग न मिलने के कारण इसे बाधाओं का सामना करना पड़ा. उनका इशारा सीधे तौर पर ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस की ओर था, जिन्होंने बिल की रूपरेखा पर सवाल उठाए थे.

ममता बनर्जी ने हमेशा खुद को बंगाल की ‘बेटी’ और ‘दीदी’ के रूप में पेश किया है. उनकी ‘लक्ष्मी भंडार’ और ‘कन्याश्री’ जैसी योजनाओं ने उन्हें महिलाओं के बीच एक अभेद्य किला बनाने में मदद की है. हालांकि, बीजेपी अब इस विमर्श को बदलने की कोशिश कर रही है. दिलीप घोष का तर्क है कि अगर टीएमसी वास्तव में महिला सशक्तिकरण चाहती है, तो उसे प्रधानमंत्री के इस ऐतिहासिक कदम का बिना किसी शर्त के समर्थन करना चाहिए था. बीजेपी का मानना है कि बिल के विरोध को बंगाल की महिलाओं के अधिकार छीनने के रूप में प्रचारित किया जा सकता है, जिससे ममता बनर्जी के महिला वोट बैंक में सेंध लगाई जा सके.





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