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आर्थिक तंगी अब नहीं बनेगी रुकावट, अंबाला में 45 बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठा रही सिख एजुकेशन सेवा सोसाइटी

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अंबाला: हरियाणा के अंबाला जिले की धरती से एक ऐसी प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जो न केवल शिक्षा के महत्व को उजागर करती है, बल्कि मानवता और सेवा की सच्ची मिसाल भी पेश करती है. दरअसल, सिख एजुकेशन सेवा सोसाइटी ने समाज के उन नन्हें सपनों को सहारा देने का बीड़ा उठाया है, जो आर्थिक तंगी के कारण अक्सर अधूरे रह जाते हैं.

45 बच्चों को लिया गोद, शिक्षा का उठाया जिम्मा

बता दें कि जून 2024 में इस सोसाइटी की शुरुआत की गई थी और अब इसने एक बार फिर 45 आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को गोद लेकर उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है. ये वे बच्चे हैं, जिनके माता-पिता अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में ही संघर्ष करते हैं और ऐसे में शिक्षा का खर्च उनके लिए एक बड़ा बोझ बन जाता है.

हर महीने दी जाएगी फीस, बिना रुकावट जारी रहेगी पढ़ाई

सिख एजुकेशन सेवा सोसाइटी ने न केवल इन बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाई है, बल्कि उनके सपनों को भी पंख देने का प्रयास किया है. प्रत्येक बच्चे की 1500 रुपये प्रति माह तक की फीस सीधे स्कूल प्रबंधन को दी जाएगी, ताकि उनकी शिक्षा बिना किसी रुकावट के जारी रह सके. यह कदम खासतौर पर उन परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो अपने बच्चों को पढ़ाना तो चाहते हैं, लेकिन परिस्थितियों के आगे मजबूर हैं.

हिंदी, अंग्रेजी के साथ पंजाबी भाषा का भी ज्ञान

इसके साथ ही, खास बात यह है कि बच्चों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ पंजाबी भाषा का भी ज्ञान दिया जाएगा. इसका उद्देश्य है कि ये बच्चे भविष्य में हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ जैसे क्षेत्रों में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें.

शिक्षा हर बच्चे का अधिकार

वहीं, लोकल 18 से बातचीत में सोसाइटी के प्रधान हरजीत सिंह रत्ता ने बताया कि आज के समय में कोई भी बच्चा अशिक्षित न रहे और उसे शिक्षा का अधिकार मिले, इसी सोच के साथ 2024 में उनके साथियों ने मिलकर इस सोसाइटी की शुरुआत की थी. उन्होंने बताया कि इस बार अंबाला जिले में 45 ऐसे बच्चों को गोद लिया गया है, जिनके परिजन किसी भी तरह उनकी फीस भरने में असमर्थ हैं.

चयन के लिए बनाए गए खास नियम

उन्होंने कहा कि बच्चा चाहे किसी भी स्कूल में पढ़ रहा हो, वह सोसाइटी को प्रार्थना पत्र दे सकता है. इसके बाद उसकी 1500 रुपये प्रति माह तक की फीस स्कूल प्रबंधन को चेक के माध्यम से भेज दी जाएगी. साथ ही, बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी के साथ पंजाबी भाषा का भी ज्ञान दिया जाएगा, ताकि वे पढ़ाई पूरी कर हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें.

वहीं, फारुख खालसा स्कूल के प्रिंसिपल केपी सिंह ने बताया कि सिख एजुकेशन सेवा सोसाइटी की शुरुआत उनके स्वर्गीय पिता श्री आज्ञापाल और वर्तमान प्रधान हरजीत सिंह रत्ता द्वारा की गई थी. इस बार सोसाइटी ने आर्थिक रूप से कमजोर 45 बच्चों को गोद लिया है.

आवेदन करने वाले बच्चों के लिए 60 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य

उन्होंने बताया कि सोसाइटी में आवेदन करने वाले बच्चों के लिए 60 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है. यदि कोई बच्चा पढ़ाई के दौरान इससे कम अंक लाता है, तो पहले उसे चेतावनी दी जाएगी और बाद में उसकी फीस सहायता बंद की जा सकती है. उनका मानना है कि इस नियम से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि और बढ़ेगी.

100 से ज्यादा बच्चों को जोड़ने का लक्ष्य

उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में 100 से अधिक बच्चों को इस योजना के तहत शिक्षा दिलाने का लक्ष्य है, जिसमें कई स्कूल भी सहयोग करेंगे. सोसाइटी के सदस्यों का सपना है कि वे अधिक से अधिक फंड इकट्ठा कर भविष्य में आर्थिक रूप से कमजोर कॉलेज के छात्रों की भी मदद कर सकें.



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