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आपको भी नहीं होगा मालूम आखिर क्यों गर्मियों में अयोध्या के मंदिरों में होती है फूलों से आरती, जानिए वजह

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अयोध्या के मंदिरों में फूलों से आरती करने की परंपरा भक्ति और प्रकृति के अनूठे संगम को दर्शाती है. गर्मियों में भगवान को शीतलता देने के लिए इस विशेष आरती का आयोजन किया जाता है, जो भक्तों को भी शांति और आध्यात्मिक आनंद प्रदान करती है.

अयोध्या: अयोध्या की भक्ति परंपराओं में फूलों से आरती एक बेहद विशेष और भावनात्मक परंपरा मानी जाती है. अयोध्या के मंदिरों में यह परंपरा सिर्फ पूजा की एक विधि नहीं, बल्कि भगवान के प्रति प्रेम, समर्पण और प्रकृति के साथ आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक है. यह आरती अपने आप में एक अलग ही दिव्यता और शांति का अनुभव कराती है. फूलों से आरती करने के पीछे सबसे बड़ी वजह भगवान को शीतलता प्रदान करना माना जाता है. खासकर गर्मी के मौसम में जब तापमान काफी बढ़ जाता है, तब भगवान श्रीराम और माता जानकी को ठंडक देने के लिए पुजारी सुगंधित और ताजे फूलों का उपयोग करते हैं.

क्या है मान्यता

मान्यता है कि जैसे भक्त अपने प्रियजनों को आराम और सुकून देने की कोशिश करता है वैसे ही भगवान को भी शीतलता और सुख देने के लिए यह परंपरा निभाई जाती है. इस आरती की एक खास बात यह है कि इसमें दीपक या अग्नि की जगह फूलों का प्रयोग किया जाता है. पुजारी अपने हाथों में फूलों की माला या गुच्छे बांधकर भगवान की आरती करते हैं. यह दृश्य बेहद आकर्षक और मन को शांति देने वाला होता है. फूलों की सुगंध पूरे मंदिर परिसर को पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है, जिससे भक्तों को भी आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति होती है.

धार्मिक दृष्टि से भी फूलों का विशेष महत्व

धार्मिक दृष्टि से भी फूलों का विशेष महत्व माना गया है. हिंदू शास्त्रों में फूलों को पवित्रता, कोमलता और सौंदर्य का प्रतीक बताया गया है. फूल बिना किसी स्वार्थ के अपनी खुशबू फैलाते हैं, ठीक उसी तरह भक्त भी भगवान के प्रति निस्वार्थ भाव से प्रेम प्रकट करते हैं. इसलिए, फूलों से आरती करना इस भावना को और अधिक गहराई से व्यक्त करता है.

गर्मियों में फूलों से आरती का विशेष महत्व

महंत शशिकांत दास के अनुसार यह परंपरा अति प्राचीन है और सदियों से अयोध्या के मठ-मंदिरों में चली आ रही है. ऋतु परिवर्तन के साथ भगवान की सेवा की विधियों में भी बदलाव किया जाता है, जिसमें गर्मियों में फूलों से आरती का विशेष महत्व होता है. यह न केवल भगवान को शीतलता प्रदान करती है, बल्कि भक्तों के मन को भी शांति और संतोष से भर देती है. इस प्रकार फूलों से आरती अयोध्या की आध्यात्मिक संस्कृति का एक जीवंत उदाहरण है जो यह दर्शाती है कि यहां भक्ति केवल नियमों तक सीमित नहीं बल्कि भावनाओं और प्रकृति के साथ गहरे संबंध का प्रतीक है.

About the Author

Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें



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