60 सेकेंड में 700 गोलियों की बौछार, भारतीय सेना का नया हथियार ‘प्रहार’, 800 मीटर दूर से दुश्मन खल्लास

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Prahar LMG To Indian Army: इंडियन आर्मी की फायरपावर को तगड़ा बूस्ट मिला है. अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने 2000 ‘प्रहार’ लाइट मशीन गन (LMGs) का पहला बैच शनिवार डिलीवर किया. ग्वालियर में मौजूद डिफेंस की बड़ी कंपनी के स्मॉल आर्म्स कॉम्प्लेक्स में मेक इन इंडिया के तहत बनी यह गन इजरायल वेपन इंडस्ट्रीज द्वारा डेवलप की गई.

इजरायली ‘नेगेव 7.62×51 लाइट मशीन गन, जिसे हम प्रहार कहते हैं, ज्यादा मारक क्षमता और भरोसे वाली एडवांस मशीन गन है. बताते चलें कि यह डिलीवरी अगस्त 2024 में हुए 41,000 हथियारों के उस बड़े कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा है, जिसके तहत सेना की पुरानी 5.56x45mm INSAS लाइट मशीन गनों को बदला जाना है.

क्या है Negev LMG और यह कितनी घातक है?

नेगेव 7.62×51 दुनिया की बेहतरीन और भरोसेमंद लाइट मशीन गनों में गिनी जाती है. यह अपने पिछले वर्जन (INSAS) के मुकाबले सेना के लिए एक बहुत बड़ा ‘कैपेबिलिटी अपग्रेड’ है. इसकी प्रमुख खूबियां कुछ इस प्रकार हैं:-

  1. अचूक मारक क्षमता: इस गन का 7.62x51mm कैलिबर पुरानी 5.56mm INSAS की तुलना में कहीं अधिक घातक मारक क्षमता देता है.
  2. गोलियों की बारिश: यह गन ऑटोमैटिक मोड में एक मिनट के अंदर 700 से ज्यादा गोलियां दाग सकती है.
  3. लंबी दूरी का निशाना: यह गन केवल अंधाधुंध फायरिंग ही नहीं करती, बल्कि 800 मीटर से अधिक की दूरी तक ‘प्रिसिजन सिंगल-राउंड फायर’ (सटीक निशाना) लगाने में भी सक्षम है.
  4. बार-बार रीलोड करने का झंझट खत्म: पुरानी गनों में मैगजीन का इस्तेमाल होता था, लेकिन नेगेव में बेल्ट एम्युनिशन का इस्तेमाल होता है. इससे जवान बिना रुके लगातार फायरिंग कर सकते हैं.
  5. वजन में हल्की: 7.5 किलोग्राम वजन के साथ, यह अपनी क्लास (7.62mm LMG) की सबसे हल्की गनों में से एक है.
  6. कहीं से भी फायरिंग: इसे न सिर्फ जवान अपने हाथों से चला सकते हैं, बल्कि इसे विभिन्न माउंट्स, सैन्य वाहनों, हेलीकॉप्टरों और नौसेना के जहाजों पर भी आसानी से फिट करके फायर किया जा सकता है.
  7. दो फायरिंग मोड: क्लोज-क्वार्टर बैटल यानी आमने-सामने की लड़ाई के लिए इसमें सेमी-ऑटोमैटिक मोड है, जबकि दुश्मन को पूरी तरह से तबाह करने के लिए ‘फुल्ली ऑटोमैटिक मोड’ दिया गया है.

रात के अंधेरे में भी दुश्मन का काल

नेगेव LMG को नाटो (NATO) के कड़े ‘ड्यूरेबिलिटी स्टैंडर्ड्स’ के हिसाब से बनाया गया है. इसमें पिकाटिनी रेल्स और ‘ट्रिटियम नाइट साइट्स’ लगे हैं, जो इसे कम रोशनी या रात के अंधेरे में भी बेहद कारगर बनाते हैं. इसके अलावा, यह कंप्यूटराइज्ड वेपन सिस्टम से लैस है. इससे जवानों को तनाव और थकान के समय भी दुश्मन पर सटीक निशाना लगाने में मदद मिलेगा.

और कितने हथियार मिलेंगे?

अडाणी ग्रुप (PLR Systems) इस साल के अंत तक सेना को 4,000 और नेगेव एलएमजी की डिलीवरी करने वाला है. इसके अलावा कंपनी को 170000 क्लोज क्वार्टर बैटल कार्बाइन की सप्लाई का भी कॉन्ट्रैक्ट मिला है.

सेना में कौन करता है इसका इस्तेमाल?
भारतीय सेना में इस लाइट मशीन गन का इस्तेमाल मुख्य रूप से इन्फैंट्री (पैदल सेना) और फ्रंटलाइन पर तैनात जवानों द्वारा किया जाता है. इससे पहले 2020 में भी सेना ने इमरजेंसी के आधार पर फास्ट-ट्रैक प्रोक्योरमेंट के जरिए 16,479 नेगेव LMG खरीदी थीं, जिनका सफलतापूर्वक इस्तेमाल हो रहा है.

एक बार कितनी गोलियां फायर कर सकता है?
यह गन ऑटोमैटिक मोड में एक मिनट के अंदर 700 से ज्यादा गोलियां फायर कर सकती है. इसमें मैगजीन की जगह ‘बेल्ट एम्युनिशन’ का इस्तेमाल होता है, जिससे जवान बिना रुके लगातार फायरिंग कर सकते हैं.

इसकी मारक क्षमता कितनी है?
इस लाइट मशीन गन की सटीक मारक क्षमता 800 मीटर से अधिक है.

इसे इजरायल और इंडिया में किस कंपनी ने बनाया है?
इजरायल में इसे ‘इजरायल वेपन इंडस्ट्रीज’ (IWI) द्वारा डिजाइन किया गया है, जबकि भारत में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत इसे ‘अडाणी ग्रुप’ (PLR Systems) द्वारा अपनी ग्वालियर स्थित फैसिलिटी में बनाया जा रहा है.

भारतीय सेना को और कितनी एलएमजी की खेप मिलने वाली है?
इस साल के अंत तक भारतीय सेना को 4,000 और नेगेव LMG की खेप मिलने वाली है. (यह डिलीवरी कुल 41,000 हथियारों के एक बड़े कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा है, जिसमें से 2,000 की पहली खेप मिल चुकी है).



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