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गोंडा के झंझरी ब्लॉक के जानकी नगर गांव की संजू मिश्रा ने महज ₹10,000 से अचार बनाने का छोटा सा काम शुरू किया था, जो आज सालाना 10–15 लाख रुपये के कारोबार में बदल चुका है. शिक्षक बनने का सपना अधूरा रहने के बाद उन्होंने अपने हुनर को पहचानते हुए इस काम को आगे बढ़ाया. शुद्धता और देसी स्वाद के दम पर उनके अचार की मांग कई जिलों तक पहुंच चुकी है, और आज वह न सिर्फ आत्मनिर्भर हैं बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं.
गोंडा. जिले के झंझरी विकासखंड के जानकी नगर गांव की एक महिला ने अपनी मेहनत और हिम्मत से मिसाल कायम कर दी है. उन्होंने बहुत छोटे स्तर पर, सिर्फ 10000 रुपये से अचार बनाने का काम शुरू किया था. आज वही काम उनके लिए बड़ी कमाई का जरिया बन चुका है और वह सालाना 10 से 15 लाख रुपये तक कमा रही हैं. लोकल 18 से बातचीत के दौरान संजू मिश्रा बताती है कि उन्होंने पांच विषय से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है और साथ में ही उन्होंने बीएड कर रखी हैं, उनका सपना था शिक्षक बनना, लेकिन कुछ कारणों से उनका सपना अधूरा रह गया और वह शिक्षक नहीं बन पाई. वह इस समय शिव कंपटीशन हब में (प्राइवेट शिक्षक) कंपटीशन की तैयारी करवाती हैं. कंपटीशन की तैयारी के साथ-साथ अचार का बिजनेस कर रही हैं. संजू मिश्रा बताती है कि शिक्षक न बन पाने के बाद वह काफी परेशान थी, उसी समय हमारे भाई ने हमको मोटिवेट किया और उन्होंने बताया कि आपके अंदर हुनर है और आप अचार बहुत अच्छा बनाती हो. तो क्यों ना आप अचार के बिजनेस की शुरुआत करें, फिर हमने उस समय मात्र 10,000 से अचार के बिजनेस की शुरुआत की थी. शुरुआत में संजू मिश्रा ने घर पर ही आम, नींबू और मिर्च का अचार बनाना शुरू किया. वह अपने बनाए अचार को आस-पास के गांव और मोहल्लों में बेचती थी. उनके अचार का स्वाद इतना अच्छा था कि लोगों को काफी पसंद आने लगा. धीरे-धीरे उनके अचार की मांग बढ़ने लगी और ज्यादा लोग उनसे अचार खरीदने लगे.
बढ़ने लगी मांग
संजू मिश्रा बताती है जब हमारे अचार की डिमांड बढ़ने लगी, तो हमने अपने काम को आगे बढ़ाने का फैसला किया. उन्होंने अचार की मात्रा बढ़ाई और अलग-अलग तरह के अचार बनाना शुरू कर दिया. अब वह सिर्फ आम और नींबू ही नहीं, बल्कि लहसुन, कटहल और मिक्स अचार भी बनाने लगी है. इस समय उनके पास लगभग 18 प्रकार के अचार उपलब्ध हैं, इससे उनके ग्राहकों की संख्या और बढ़ गई. संजू मिश्रा बताती है कि हम साफ सफाई और गुणवत्ता का खास ध्यान रखते हे. हम किसी भी प्रकार के केमिकल का प्रयोग नहीं करते. अचार में खट्टापन लाने के लिए हम देसी गन्ने के सिरके का प्रयोग करते है. यही वजह है कि उनके अचार पर लोगों का भरोसा बना हुआ है. आज उनके पास गांव ही नहीं, बल्कि शहर और गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, लखनऊ से भी ऑर्डर आने लगे हैं. कई लोग उनके अचार को बड़े पैमाने पर खरीदकर आगे भी बेचते हैं.
घर वालों का क्या रहा सपोर्ट
संजू मिश्रा बताती है कि हमने अचार के बिजनेस की शुरुआत की तो हमारे फैमिली का सपोर्ट काफी अच्छा रहा और सबसे ज्यादा हमारे पति का सपोर्ट रहा. लोगों ने तो काफी डिमोटिवेट किया लेकिन हम डिमोटिवेट नहीं हुए और हमने अपने बिजनेस को आगे बढ़ाया और आज वही लोग हमारी तारीफ कर रहे हैं.
संजू मिश्रा का कहना है कि शुरुआत में कई दिक्कतें आई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. धीरे-धीरे मेहनत और लगन से उन्होंने अपने काम को आगे बढ़ाया. आज वह आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और अपने परिवार की अच्छी तरह से मदद कर रही हैं. वह बताती है की अचार के बिजनेस की शुरुआत मात्र 10000 से की थी. इस समय अचार के बिजनेस से सालाना लगभग 10 से 15 लाख रुपए का टर्नओवर हो रहा है. संजू मिश्रा ने बताया कि भविष्य का प्लान हमारा यह है कि हम अपने अक्षरा, स्वाद अवध के आंगन का पूरे देश में आउटलेट खोलना चाहती हूं और अपने इस ब्रांड को देश और विदेश में फैलाना चाहती हूं. इस पर काम भी कर रही हूं.
कितने महिलाओं को दे रही है रोजगार
संजू देवी बताती है फिलहाल हमारे यहां इस समय लगभग 5 से 6 महिलाएं काम कर रहे हैं. संजू मिश्रा की सफलता यह दिखाती है कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए तो छोटे से काम से भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं अगर घर बैठे ऐसा काम शुरू करें, तो वह भी अच्छी कमाई कर सकती हैं. गोंडा की संजू मिश्रा की कहानी आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है. यह साबित करती है कि हिम्मत और मेहनत से कोई भी अपने सपनों को सच कर सकता है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें


