13.6 C
Munich

पक्का नहीं जानते होंगे! वाराणसी में सिर्फ एक नहीं, तीन काशी विश्वनाथ मंदिर है, दूर-दूर से दर्शन को आते भक्त

Must read


Last Updated:

Kashi Vishwanath Temple: काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर बसी है और इसके पुराधिपति बाबा विश्वनाथ हैं. द्वादश ज्योतिर्लिंगों में काशी विश्वनाथ का विशेष महत्व है. यहां एक शिवलिंग में शिव संग माता पार्वती विराजमान हैं. दुनियाभर के करोड़ों भक्तों ने काशी विश्वनाथ मंदिर में मत्था टेका होगा, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि काशी में 1 नहीं, बल्कि 3 काशी विश्वनाथ के धाम हैं.

वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर के बारे में तो आपने सुना होगा, जहां से लोगों की धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है. यह मंदिर अलग-अलग जगहों पर स्थित है. हालांकि इसके बारे में कम ही लोग जानते हैं कि वाराणसी में सिर्फ एक ही नहीं, बल्कि तीन काशी विश्वनाथ मंदिर हैं. काशी का दूसरा विश्वनाथ मंदिर बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में स्थापित है. 1931 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के निवेदन पर स्वामी कृष्णन ने इसकी नींव रखी थी. इसे नए विश्वनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है.

कुतुब मीनार से है ऊंचा

बीएचयू में स्थित यह विश्वनाथ मंदिर कई मायनों में बेहद खास है. इस मंदिर के शिखर की ऊंचाई के आगे दिल्ली का कुतुबमीनार भी छोटा है, क्योंकि इसके शिखर की लंबाई कुतुब मीनार की लंबाई से ज्यादा है. यह मंदिर आज भी शहर के ज्यादातर हिस्सों से आसानी से देखा जा सकता है. शिखर के लिहाज से बात करें तो यह मंदिर दुनिया के सबसे ऊंचे शिखर वाला मंदिर भी है.

बिरला टेम्पल के भी है मशहूर

नए विश्वनाथ मंदिर को ‘बिरला टेंपल’ के नाम से भी जाना जाता है. साल 1954 में मशहूर उद्योगपति जुगल किशोर बिरला ने इसके निर्माण का काम शुरू कराया था. बीएचयू के टूरिज्म डिपार्टमेंट के प्रोफेसर प्रवीण सिंह राणा ने बताया कि इस मंदिर के शिखर की ऊंचाई 252 फीट है. वहीं दिल्ली के कुतुब मीनार की ऊंचाई 239.5 फीट है. ऐसे में इस मंदिर का शिखर कुतुब मीनार से 12.5 फीट ऊंचा है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

दो चरणों में हुआ शिखर का निर्माण काम

इस मंदिर का निर्माण सफेद संगमरमर के पत्थरों से हुआ है, जो इसकी खूबसूरती को बढ़ाता है. यह मंदिर नागर और द्रविण वास्तुशैली पर बनी हुई है. बताते चलें कि दो चरणों में इसके शिखर के निर्माण काम पूरा हुआ था. बीएचयू के स्टूडेंट्स को काशी विश्वनाथ मंदिर न जाना पड़े, इसके लिए महामना ने कैम्पस के मध्य ही नए विश्वनाथ मंदिर की स्थापना की थी.

आते हैं हजारों पर्यटक

इस मंदिर में हर दिन हजारों पर्यटक आते हैं. यह शहर का एक फेमस टूरिस्ट स्पॉट भी है. दिन के अलग अलग समय यह मंदिर अलग-अलग रूप में देखने को मिलता है. सुबह जब धूप की चमक इसपर पड़ती है, तो मंदिर का शिखर सफेद संगमरमर की तरह चमकता है. वहीं रात के समय इस मंदिर का शिखर अलग-अलग रंग-बिरंगे लाइटों से जगमग रहता है.

स्वामी करपात्री जी ने कराया था निर्माण

काशी का तीसरा विश्वनाथ मंदिर मीर घाट पर स्थित है. पुराने मंदिर के करीब ही तीसरा काशी विश्वनाथ का मंदिर है. धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज ने इसकी स्थापना की थी. जानकारी के अनुसार, साल 1956 से 1957 के बीच यह मंदिर बनाया गया था. इस मंदिर के गर्भगृह में आज भी सिर्फ और सिर्फ पुजारी को ही प्रवेश की अनुमति है.

स्पर्श दर्शन पर रोक की उठाई थी मांग

करपात्री जी ने इस मंदिर की स्थापना पुराने काशी विश्वनाथ मंदिर में दलितों और स्पर्श दर्शन के विरोध में किया था. दरसअल 1950 के दशक में स्वामी करपात्री जी ने काशी विश्वनाथ मंदिर में स्पर्श दर्शन पर रोक लगाने की मांग उठाई थी. उनके इस मांग के खिलाफ काशी विद्वत परिषद ने विरोध जताया, जिसके बाद स्वामी करपात्री जी ने मंदिर के करीब ही तीसरे विश्वनाथ मंदिर की स्थापना कर दी.

70 साल पुराना है मंदिर

70 साल पुराने इस मंदिर में आज भी करपात्री जी के बनाए नियम फॉलो किए जाते हैं. इस मंदिर के गर्भगृह में आज भी सिर्फ पुजारियों को एंट्री मिलती है, बाकी भक्त दूर से ही बाबा विश्वनाथ का दर्शन पूजन करते हैं. इस मंदिर में दक्षिण भारतीय श्रद्धालु पूजा अनुष्ठान के लिए आते हैं. विशेष दिनों में यहां भक्तों की भीड़ भी होती है.



Source link

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article