12.4 C
Munich

ममता दीदी पर गिरेगी सिविल कोर्ट की गाज? अनुसूचित जाति आयोग ने 3 दिनों में मांगा जवाब, TMC की बढ़ी मुश्किलें

Must read


होमताजा खबरदेश

ममता पर गिरेगी सिविल कोर्ट की गाज? अनुसूचित जाति आयोग ने 3 दिन में मांगा जवाब

Last Updated:

अनुसूचित जाति आयोग ने बंगाल के टॉप अधिकारियों को सख्त और फाइनल चेतावनी दी है. लेटर में लिखा है, ‘तय समय में जवाब नहीं मिला तो कमीशन सिविल कोर्ट की पावर इस्तेमाल करेगा’. कमीशन अधिकारियों को सरेआम समन जारी करके अपने सामने पेश होने का आदेश दे सकता है. एनसीएससी का यह नोटिस बंगाल चुनाव के दूसरे फेज से ठीक तीन दिन पहले आया है. बंगाल में 29 अप्रैल को दूसरे फेज की बहुत अहम और बड़ी वोटिंग होनी है.

ख़बरें फटाफट

Zoom

एससी समुदाय पर ममता बनर्जी की टिप्पणियों ने तूल पकड़ लिया है.

कोलकाता. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने एक बंगाली न्यूज चैनल द्वारा प्रसारित एक वीडियो क्लिप का स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें कथित तौर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया था. कमीशन का यह दखल ऐसे समय में आया है जो राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील है, क्योंकि राज्य में अभी विधानसभा चुनाव चल रहे हैं. इस दखल ने मुख्यमंत्री के बयानों के विषय और संदर्भ को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है.

एनसीएससी की डायरेक्टर सोनाली दत्ता ने रविवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला और पुलिस महानिदेशक सिद्ध नाथ गुप्ता को एक पत्र लिखा. इसमें उन्होंने बताया कि कमीशन ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस मामले की ‘जांच/पड़ताल’ करने का फैसला किया है. इस पत्र की एक कॉपी आईएएनएस के पास भी मौजूद है. इसमें कमीशन ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को यह निर्देश भी दिया है कि वे नोटिस मिलने के तीन दिनों के भीतर दत्ता को ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (एटीआर) सौंपें.

कमीशन ने अब तक की गई किसी भी शुरुआती जांच का ब्योरा मांगा है, साथ ही यह भी पूछा है कि वीडियो क्लिप में कही गई बातों के जवाब में राज्य प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं. नारियाला और गुप्ता को भेजे गए इस संदेश में एनसीएससी ने चेतावनी दी है कि अगर तय समय-सीमा यानी तीन दिनों के भीतर एटीआर नहीं मिली, तो कमीशन भारत के संविधान द्वारा मिली शक्तियों के अनुसार कार्रवाई करने के लिए मजबूर हो जाएगा.

पत्र में लिखा है, “कृपया ध्यान दें कि यदि कमीशन को तय समय के भीतर आपकी ओर से कोई जवाब नहीं मिलता है, तो कमीशन भारत के संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत एक सिविल कोर्ट को मिली शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है. इसके तहत, कमीशन आपको व्यक्तिगत रूप से या अपने किसी प्रतिनिधि के माध्यम से कमीशन के सामने पेश होने के लिए समन जारी कर सकता है.” कमीशन की ओर से यह नोटिस पश्चिम बंगाल में दो चरणों में हो रहे विधानसभा चुनावों के दूसरे चरण से ठीक तीन दिन पहले आया है. दूसरा चरण 29 अप्रैल को होना है, जिसमें छह जिलों और कोलकाता की कुल 142 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा. वोटों की गिनती 4 मई को होगी.

About the Author

authorimg

Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



Source link

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article