कौन है सिल्वर जेनरेशन? जिसके लिए गुरुग्राम बन रहे ‘स्पेशल होम्स’, एक घर की कीमत करोड़ों में

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Senior Living Homes: अभी तक आपने जेनरेशन-Z या मिलेनियल्स के बारे में सुना होगा जो घर खरीदने में सबसे आगे हैं, लेकिन क्या आपने सिल्वर जेनरेशन के बारे में सुना है, जो अब रियल एस्टेट मार्केट की लिस्ट में सबसे ऊपर चल रहे हैं. इस जेनरेशन के लोगों के लिए गुरुग्राम और नोएडा में स्पेशल होम्स बनाए जा रहे हैं. ये कीमतों और बनावट में लग्जरी और अल्ट्रा लग्जरी घरों जैसे तो हैं सुविधाओं के मामले में उनसे भी इक्कीस साबित हो रहे हैं और यही वजह है कि इन घरों को युवा भी पसंद कर रहे हैं.

आपको बता दें कि वरिष्ठ नागरिकों को सिल्वर जेनरेशन कहा जाता है. भारत में सीनियर सिटिजन की आबादी तेजी से बढ़ रही है. हाल ही में आई जेएलएल रिपोर्ट कहती है कि बुजुर्ग आबादी जिसे सिल्वर जनरेशन कहा जाता है, की संख्या 2050 तक तीन गुना बढ़कर लगभग 30 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है. इस बदलाव का सीधा असर देश में आवास की मांग पर भी पड़ रहा है. यही वजह है कि अब बुजुर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किए जा रहे सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं और रियल एस्टेट के एक मजबूत व भरोसेमंद सेगमेंट के रूप में उभर रहे हैं.

युवा इन घरों को इसलिए भी ज्यादा पसंद कर रहे हैं क्योंकि वे अपने बुजुर्ग परिजनों के लिए सुव्यवस्थित घर लेना चाहते हैं जिनमें तुरंत स्वास्थ्य सेवाएं, 24×7 चाक-चौबंद सुरक्षा, एल्डरली केयर यानि बुजुर्गों की देखभाल की सुविधा, सामुदायिक गतिविधियां और आरामदायक जीवनशैली की व्यवस्था होती है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित, सम्मानजनक और संतुलित जीवन मिल सके.

सोच में हुआ बदलाव
आज के सीनियर सिटिजन पिछली पीढ़ी से सोच में काफी आगे हैं. यही वजह है कि आज के सेवानिवृत्त और अर्ध-सेवानिवृत्त लोग सिर्फ देखभाल की सुविधा नहीं चाहते, बल्कि वे ऐसे बेहतर और उम्र के अनुसार बनाए गए समुदायों की तलाश करते हैं जहां उन्हें स्वतंत्र जीवन के साथ स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा भी मिले. वे अपने जीवन के इस चरण को एक्टिव तरीके से आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ जीना चाहते हैं.

आमतौर पर 55 साल से ज्यादा उम्र के लोग उन आवासीय प्रोजेक्ट को पसंद कर रहे हैं जहां आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध हों, घरों का डिजाइन सरल और सेफ हो और आसपास ऐसा सामाजिक माहौल हो जहां वे अपनी उम्र के लोगों से जुड़ सकें और सक्रिय रह सकें.

आज सीनियर लिविंग का मतलब केवल शांत जगह पर रहना नहीं है, बल्कि यह एक संतुलित और स्वतंत्र लाइफस्टाइल है, जिसमें सुविधा, सुरक्षा और सामाजिक सहभागिता तीनों का ध्यान रखा जाता है.

गुरुग्राम बन रहा है सीनियर लिविंग का सेंटर
भारत में पुणे और कोयंबटूर जैसे दक्षिण भारत के शहरों ने भारत में वरिष्ठ नागरिक आवास (सीनियर लिविंग या सीनियर हाउसिंग) की शुरुआत की थी लेकिन अब गुरुग्राम तेजी से उत्तर भारत के एक बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है. यहां का मजबूत हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतरीन कनेक्टिविटी और विकसित सामाजिक परिवेश इसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए रहने के लिहाज से आकर्षक बनाते हैं.

खासकर सेंट्रल गुरुग्राम बुजुर्गों के लिए ज्यादा सुविधाजनक माना जाता है. मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल, डायग्नोस्टिक सेंटर, फार्मेसी और रोजमर्रा की जरूरी सुविधाएं पास में होना उनके लिए केवल सुविधा नहीं, बल्कि जरूरत है. अच्छे अस्पतालों और मजबूत नागरिक सुविधाओं के पास रहना सुरक्षा और आराम दोनों सुनिश्चित करता है.

इस समय क्षेत्र में कई सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट शुरू हो रहे हैं, लेकिन समय पर तैयार होना एक महत्वपूर्ण मुद्दा है. कई परियोजनाओं को पूरा होने में वर्षों लग सकते हैं, इसलिए जो परिवार रिटायरमेंट के बाद तुरंत शिफ्ट होना चाहते हैं, उनके लिए तैयार या जल्द तैयार होने वाले प्रोजेक्ट ज्यादा उपयुक्त विकल्प बन रहे हैं.

लग्जरी और मेडिकल सुविधाओं का संतुलित मेल
सीनियर लिविंग के नए दौर के प्रोजेक्ट अब केवल क्लीनिकल (अस्पताल जैसी) मॉडल तक सीमित नहीं हैं बल्कि ये चीजें भी शामिल हैं.

  1. . 24×7 चिकित्सा सहायता: किसी भी आपातकालीन स्थिति के लिए चौबीसों घंटे मेडिकल स्टाफ और एम्बुलेंस की उपलब्धता.
  2. . प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थानों के साथ साझेदारी: मेदांता, मैक्स या फोर्टिस जैसे बड़े अस्पतालों के साथ टाई-अप, ताकि रेजिडेंट्स को प्रायोरिटी के आधार पर इलाज मिल सके.
  3. . एंटी-स्लिप फ्लोरिंग और एर्गोनोमिक लेआउट: फिसलने से बचाने वाले फर्श और बढ़ती उम्र की शारीरिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए घरों के नक्शे.
  4. . आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली (Emergency Response Systems): घरों के भीतर पैनिक बटन और सेंसर, जो संकट के समय तुरंत सुरक्षा टीम को सूचित कर देते हैं.
  5. . वेलनेस स्पेस और मनोरंजक कार्यक्रम: योग केंद्र, ध्यान कक्ष और विशेष रूप से डिजाइन किए गए सामाजिक कार्यक्रम ताकि निवासी मानसिक और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें.
  6. . यह सेगमेंट (वरिष्ठ नागरिक आवास) अब तेजी से हॉस्पिटैलिटी मानकों के अनुरूप विकसित हो रहा है, जिसमें सुरक्षा, आराम और जीवनशैली की निरंतरता का संतुलित मेल देखने को मिलता है.
  7. .निरंतर चिकित्सा निगरानी न केवल निवासियों के लिए मानसिक शांति सुनिश्चित करती है, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी भरोसे का कारण बनती है, विशेषकर उन एनआरआई और एचएनआई परिवारों के लिए, जो अपने माता-पिता के लिए सुरक्षित और सुव्यवस्थित घर खोज रहे हैं.

सीनियर लिविंग में बढ़ रही डिमांड
दक्षिण भारत की तरह अब उत्तर भार में भी ऐसे घरों की डिमांड बढ़ रही है. आर्थिक दृष्टि से सीनियर लिविंग पूरी तरह से मांग पर आधारित क्षेत्र है. रियल एस्टेट की अन्य अटकलों या सट्टा-आधारित श्रेणियों के विपरीत, इसका विकास जनसांख्यिकीय अनिवार्यता पर आधारित है. शहरी परिवारों में जीवन प्रत्याशा बढ़ने और वित्तीय समझदारी के कारण अब लोग लंबी अवधि के रहने की योजनाओं को पहले से तय कर रहे हैं.

पायनियर अर्बन लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऋषभ पेरिवाल कहते हैं कि सीनियर लिविंग रियल एस्टेट अब एक छोटे और सीमित वर्ग से विकसित होकर एक व्यवस्थित और मजबूत निवेश क्षेत्र बन गया है. आज इसका उद्देश्य केवल बुजुर्गों की देखभाल करना नहीं है, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना है जो सम्मान, स्वतंत्रता और लंबी उम्र को बढ़ावा दे. गुरुग्राम जैसे शहरों में, केंद्रीय स्थान पर स्थित प्रीमियम समुदायों जिनमें एकीकृत चिकित्सा सुविधाएं हैं, वहां इसकी मांग बहुत ज्यादा है. जागरुकता बढ़ने के साथ, सीनियर लिविंग अब आवासीय रियल एस्टेट का एक स्थायी और तेजी से बढ़ता हुआ क्षेत्र बनता जा रहा है.

जे एस्टेट्स के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल गोदारा ने कहा कि भारत का सीनियर लिविंग सेगमेंट चरणबद्ध तरीके से विकसित हो रहा है. यह विकास बदलते पारिवारिक ढांचे, लंबी जीवन प्रत्याशा और वरिष्ठ नागरिकों में स्वतंत्र लेकिन सुरक्षित रहने की बढ़ती आकांक्षाओं के कारण हो रहा है. विशेष रूप से गुरुग्राम इस क्षेत्र में सबसे आगे है क्योंकि यहां संपन्नता, मजबूत स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा और जीवनशैली-आधारित आवासीय इकोसिस्टम का बेहतरीन मेल देखने को मिलता है.

ऐसे में सिल्वर सर्ज (वरिष्ठ नागरिक आबादी में वृद्धि) कोई अस्थायी प्रवृत्ति नहीं है, यह एक स्थायी जनसांख्यिकीय बदलाव को दर्शाता है. जैसे-जैसे इस क्षेत्र में नए प्रोजेक्ट्स विकसित होंगे, उनकी तुलना मुख्य रूप से स्थान, स्वास्थ्य सुविधाओं के एकीकरण, निर्माण की गुणवत्ता और जीवनशैली के मानकों के आधार पर की जाएगी.

गुरुग्राम में सीनियर लिविंग का यह विकास यह दर्शाता है कि भारत में वृद्धावस्था को अब केवल ‘एकांतवास’ के रूप में नहीं, बल्कि जीवन के उस चरण के रूप में देखा जा रहा है जो आराम, सुरक्षा और सक्रिय सामाजिक जीवन का हकदार है.



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