नई दिल्ली. देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. पिछले महीने बैंक के चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे के बाद से ही उथल-पुथल जारी है. इसका असर निवेशकों के सेंटिमेंट पर भी दिखा और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने तो अपनी पूंजी धड़ाधड़ निकालनी शुरू कर दी है. सिर्फ मार्च महीने के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि विदेशी निवेशकों ने एचडीएफसी बैंक से 35 हजार करोड़ रुपये निकाल लिए हैं. यही वजह है कि बैंक के स्टॉक में लगातार गिरावट दिख रही है.
कभी लॉर्ज कैप स्टॉक्स में सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले एचडीएफसी बैंक पर हालिया घटनाक्रम का किस कदर बुरा असर पड़ा है, इसका अंदाजा आप शेयरों में आई गिरावट से ही लगा सकते हैं. बीते वित्तवर्ष की आखिरी तिमाही यानी जनवरी-मार्च में इस बैंक के शेयरों में 26.2 फीसदी की बड़ी गिरावट दिख रही है. यह मार्च 2020 यानी 6 साल में सबसे बड़ी गिरावट है, तब बैंक के शेयर कोरोना महामारी की वजह से 33 फीसदी टूटे थे. इसका मतलब है कि हालिया घटनाक्रमों ने बैंक पर महामारी जितना ही असर डाला है.
आंकड़े देख सहमे निवेशक
एचडीएफसी बैंक के हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी अब इस बैंक में 3.6 फीसदी कम हो चुकी है. मार्च तिमाही में विदेशी निवेशकों ने करीब 47.95 करोड़ शेयर बेच डाले हैं. बिकवाली का आलम ये रहा है कि अब विदेशी निवेशकों की संख्या घटकर 2,528 रह गई है, जो दिसंबर, 2025 के आखिर में 2,757 थी. यह लगातार तीसरी तिमाही है, जब इस बैंक में विदेशी निवेशकों की संख्या घटी है. बीते मार्च के आखिर तक विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी घटकर 44.05 फीसदी रह गई है, जो इससे पहले की तिमाही तक 47.67 फीसदी थी.
घरेलू निवेशकों का भरोसा कायम
यह अलग बात है कि विदेशी निवेशकों ने जहां बैंक से ताबड़तोड़ निकासी की, वहीं घरेलू निवेशकों का भरोसा आज भी कायम है. सबसे ज्यादा निवेश म्यूचुअल फंड ने किया है, जिनकी कुल हिस्सेदारी बढ़कर 29.54 फीसदी हो चुकी है. मार्च तिमाही से पहले यह हिस्सेदारी 26.66 फीसदी थी, जिसका मतलब है कि बीती तिमाही में म्यूचुअल फंड ने 2.88 फीसदी हिस्सेदारी बढ़ाई और करीब 28,293 करोड़ रुपये के 38.67 करोड़ शेयर खरीदे. प्रोविडेंट फंड ने भी इस बैंक में 2,239 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे. इसके अलावा इंश्योरेंस कंपनियों ने भी 256 करोड़ रुपये के शेयर बैंक में खरीदे हैं. इतना ही नहीं, एलआईसी ने भी इस कंपनी में 969 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं.
क्यों गिर रहे बैंक के शेयर
एचडीएफसी बैंक के शेयरों में गिरावट दिख रही है, लेकिन इसके कई कारण हैं. सबसे बड़ा कारण तो चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती का इस्तीफा ही माना जा रहा है. अतानु बीते 2 साल से बैंक के साथ जुड़े थे, लेकिन उन्होंने अपने इस्तीफे का कारण नैतिक आधार बताया है. बैंक के स्टॉक्स पर इस बात का भी असर पड़ा है कि सेबी ने अतानु के रेजिग्नेशन लेटर की समीक्षा करने की बात कही है.
कई साल से चल रही उठापटक
एचडीएफसी बैंक के प्रबंधन में यह पहली बार उथल-पुथल नहीं आई है, बीते कई साल से यह उठापटक चल रही है. अक्टूबर, 2020 से ही बैंक के शीर्ष प्रबंधन पर नियामकीय कार्रवाई होती रही है, जिसमें आरबीआई की ओर से बैंक के क्रेडिट कार्ड बिजनेस को निलंबित करना भी शामिल है. इसके अलावा एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी लिमिटेड के मर्जर को लेकर भी कई बार सख्ती हुई. हालांकि, बैंक के प्रबंधन को पूरा भरोसा है कि आगे ऐसा कोई झटका नहीं आएगा और जल्द ही इसके स्टॉक्स में भी रिकवरी दिखेगी.
अभी कई चिंताएं बाकी
एचडीएफसी बैंक का प्रबंधन भले ही कितने दावे कर ले, लेकिन आंतरिक मामलों को लेकर अभी कई चिंताएं बाकी हैं. समूह की दो कंपनियों के विलय के बाद की प्रक्रिया, लोन ओर जमा के बीच का भारी अंतर और बॉन्ड की बिक्री में कर्मचारियों की ओर से की गई हेराफेरी भी निवेशकों के सेंटिमेंट पर असर डाल रही है. कुछ रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बैंक ने कई वरिष्ठ एग्जीक्यूटिव पर कार्रवाई भी की है, जिन पर टीयर-1 बॉन्ड को गलत तरीके से बेचने का आरोप है.




