कोलकाता. पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद अब सबकी नजरें कल यानी 4 मई के नतीजों पर टिकी हैं. लेकिन इस बार चर्चा सिर्फ सीटों की नहीं, बल्कि उस मिठास की भी है, जो जीत के बाद बंगाल की हवा में घुलेगी. बीजेपी ने हरियाणा चुनाव में जलेबी बांटकर अब बंगाल के रण में नमकीन झालमुड़ी को चर्चा में ला दिया है. ऐसे में बंगाल में कल कौन सी मिठाइयां बांटी जाएगी, इसको लेकर स्थिति साफ नहीं है. लेकिन पीएम मोदी की झालमुड़ी भी अब अगर बीजेपी के डिश में शामिल हो जाए तो हैरानी नहीं होगी. आमतौर पर बीजेपी अपनी हर जीत का जश्न लड्डू बांटकर मनाती है, लेकिन बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए इस बार पार्टी ने अपनी ‘मेन्यू’ में बड़ा बदलाव कर सकती है. बीजेपी इस बार लड्डू के साथ नमकीन झालमुड़ी भी बांट सकती है.
लड्डू नहीं, अब ये बंटेगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी रैलियों के दौरान ही यह संकेत दे दिया था कि बीजेपी की जीत का जश्न इस बार अनोखा होगा. उन्होंने नादिया की एक रैली में स्पष्ट कहा, ‘4 मई को बंगाल में बीजेपी की जीत का जश्न मनाया जाएगा, जिसमें मिठाइयों के साथ-साथ ‘झालमुड़ी’ भी बांटी जाएगी’. झालमुड़ी बंगाल का सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड है और बीजेपी इसे बांटकर खुद को बंगाल की मिट्टी और आम आदमी से जोड़ने की कोशिश कर रही है. पार्टी का मानना है कि झालमुड़ी की चटपटी मिठास और तीखापन टीएमसी के अत्याचार के अंत का प्रतीक होगा.
संदेश पर ‘कमल’ और ‘दो फूल’ का कब्जा
कोलकाता की मशहूर मिठाई की दुकानों, जैसे ‘बलराम मुल्लिक और राधारमण मुल्लिक’, ने चुनावी माहौल को भुनाने के लिए विशेष ‘चुनावी संदेश’ तैयार किए हैं. इन मिठाइयों पर बीजेपी का कमल, टीएमसी का जोड़ा फूल और अन्य दलों के प्रतीक चिन्ह उकेरे गए हैं. मिठाई दुकानदारों का कहना है कि कार्यकर्ता अपनी-अपनी पार्टियों के प्रतीकों वाले संदेश भारी मात्रा में ऑर्डर कर रहे हैं. यह पहली बार है जब बंगाल की पारंपरिक मिठाई संदेश का इस्तेमाल सीधे तौर पर राजनीतिक प्रचार और जीत के जश्न के लिए इतने बड़े पैमाने पर हो रहा है.
पश्चिम बंगाल में रसगुल्ला सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि बंगाली अस्मिता का प्रतीक है.
रसगुल्ले की साख बनाम बीजेपी का नया विकल्प
पश्चिम बंगाल में रसगुल्ला सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि बंगाली अस्मिता का प्रतीक है, जिसके लिए ममता सरकार ने भौगोलिक संकेत (GI Tag) भी हासिल किया है. टीएमसी कार्यकर्ताओं का मानना है कि उनकी जीत का जश्न केवल पारंपरिक रसगुल्ले और ‘मिष्टी दोई’ से ही पूरा हो सकता है. दूसरी ओर, बीजेपी ने रसगुल्ले के मुकाबले ‘झालमुड़ी’ और विशेष ‘कमल संदेश’ को खड़ा कर दिया है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह केवल मिठाई का चुनाव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान की लड़ाई है.
‘जलेबी’ की कड़वाहट या बंगाल की मिठास?
हरियाणा में कांग्रेस की हार के बाद ‘जलेबी’ को लेकर हुए कटाक्षों ने बीजेपी को एक नया फॉर्मूला दे दिया है. बंगाल में बीजेपी के नेता कह रहे हैं कि जिस तरह हरियाणा में जलेबी ने सुर्खियां बटोरीं, वैसे ही बंगाल की जीत पर ‘झालमुड़ी’ टीएमसी के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम करेगी. वहीं टीएमसी ने इसे बंगाल की संस्कृति का अपमान बताया है. टीएमसी नेताओं का तर्क है कि बीजेपी ‘झालमुड़ी’ जैसे हल्के नाश्ते की बात कर बंगाल की महान मिठाइयों का कद कम करने की कोशिश कर रही है.
एग्जिट पोल के नतीजों और सट्टा बाजार के रुझानों के बीच कोलकाता की हलवाई दुकानों पर एडवांस बुकिंग शुरू हो चुकी है. अगर बीजेपी जीतती है, तो कोलकाता की सड़कों पर झालमुड़ी के साथ भगवा संदेश बंटते दिखेंगे. वहीं अगर टीएमसी की वापसी होती है, तो फिर से रसगुल्ले की नदियां बहेंगी. अब देखना यह है कि 4 मई को बंगाल की जनता ‘मिष्टी’ का स्वाद लेती है या पीएम मोदी की पसंदीदा ‘झालमुड़ी’ का चटपटा स्वाद टीएमसी पर भारी पड़ता है.
बीजेपी की जीत पर मिठाई के इस नए विवाद ने बंगाल चुनाव को और भी जायकेदार बना दिया है. क्या इस बार वाकई ‘झालमुड़ी’ चुनावी नतीजों का नया ‘सिग्नेचर फूड’ बनेगी? यह तो 4 मई को ही साफ होगा.


