Last Updated:
Tips and Tricks: गर्मियों के मौसम में सबसे अधिक इस कारण खरबूजे की डिमांड रहती है, लेकिन कई बार जब लोग मार्केट से खरबूजा की खरीदारी करते हैं तो खरीदारी करते समय जानकारी न होने के कारण सही तरीके से पके हुए खरबूजे का चयन नहीं कर पाते हैं, जिससे उनका नुकसान भी होता है. आइए आपको बताते हैं कि सही खरबूजा कैसा होता है.
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान नदी के किनारे खरबूजा की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं. खरबूजा की खेती कर किसानों को अच्छा खासा मुनाफा होता है. कम लागत में अधिक मुनाफा खरबूजा की खेती से कमाया जा सकता है. वहीं गर्मियों के मौसम में खरबूजा की डिमांड सबसे अधिक होती है, क्योंकि खरबूजा मीठा होता है और हमारे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है. खरबूजा शरीर को न सिर्फ ठंडक देता है, बल्कि पानी की कमी को भी पूरा करता है.

वहीं कुछ लोग आज भी थपथपाकर की आवाज सुनकर यह पहचान लेते हैं कि खरबूजा मीठा है या फीका. खरबूजे को हल्के से थपथपाएं, अगर उसमें से गहरी और भरी हुई आवाज (थड-थड जैसी) आती है, तो वह पका हुआ होता है. तेज और खोखली आवाज आने पर वह अंदर से कच्चा या सूखा हो सकता है. कटे या दरार वाले खरबूजे न खरीदें, इनमें बैक्टीरिया होने का खतरा रहता है. बहुत ज्यादा मुलायम या दबे हुए हिस्से वाले खरबूजे खराब हो सकते हैं.

गर्मियों के मौसम में सबसे अधिक खरबूजे की डिमांड रहती है. कई बार जब लोग मार्केट से खरबूजा की खरीदारी करते हैं, लेकिन खरीदारी करते समय जानकारी न होने के कारण सही तरीके से पके हुए खरबूजे का चयन नहीं कर पाते हैं, जिससे उनका नुकसान भी होता है. लोग अक्सर कहते हैं कि बाहर से तो खरबूजा अच्छा दिखाई देता है, लेकिन अंदर से कच्चा निकलता है. कई बार जब हम मार्केट में खरबूजा की खरीदारी करने जाते हैं, तब खरबूजे का कलर और आकार देखकर खरीद लेते हैं, लेकिन यह सबसे बड़ी गलती होती है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

पके हुए खरबूजे की पहचान आप खरबूजे के वजन से भी कर सकते हैं. अगर आप खरबूजा खरीद रहे हैं तो एक खरबूजे का वजन अगर 500 ग्राम से अधिक है, तो आप समझ जाइए कि यह खरबूजा मीठा और रसदार होगा. एक अच्छा और रसदार खरबूजा अपने आकार के हिसाब से भारी महसूस होता है. हल्का खरबूजा अक्सर सूखा या कम मीठा हो सकता है. ज्यादा वजन का मतलब है कि उसमें पानी और मिठास से भरपूर.

जो किसान खरबूजे की खेती करते हैं, वो खरबूजे के डंठल से भी यह पहचान लेते हैं कि खरबूजा पक गया है. कई बार जानकारी ना हो पाने के कारण किसान खेतों से खरबूजा तोड़ देते हैं. वहीं फिर वह कच्चा रह जाता है, जिससे उनका नुकसान हो जाता है. अगर डंठल सूखा और थोड़ा अंदर की ओर धंसा हुआ है, तो खरबूजा पका हुआ है. हरा या ताजा डंठल होने का मतलब है कि उसे समय से पहले तोड़ा गया है. बहुत ज्यादा मुलायम या सड़ा हुआ डंठल खराबी का संकेत हो सकता है.

वहीं अगर खरबूजे से कोई खास गंध नहीं है, तो वह खरबूजा कच्चा हो सकता है. बहुत ज्यादा तेज या खट्टी गंध आने पर वह ज्यादा पका या खराब भी हो सकता है. कई बार रसदार खरबूजा अपने आकार के हिसाब से भरा होता है. हल्का खरबूजा अक्सर सूख जाता है. पके हुए खरबूजे में हल्की मीठी खुशबू आती रहती है, जिसका स्वाद भी अलग होता है.

खरबूजा खरीदते समय छिलके के रंग और जाल को सही तरीके से चेक कर लें. पके हुए खरबूजे का रंग हल्का पीला या सुनहरा होता है. खरबूजे काजाल (नेट पैटर्न) स्पष्ट और उभरा हुआ होना चाहिए. अगर खरबूजे का छिलका हरा है या खरबूजे के ऊपर जाल कम दिख रहा हो, तो समझ लें कि खरबूजा अभी पूरी तरह पका नहीं है, जिसकी खरीदारी ना करें

अगर आप भी हर बार मीठा और स्वादिष्ट खरबूजा खरीदना चाहते हैं, तो कुछ आसान लेकिन बेहद कारगर टिप्स को अपनाकर आप इस परेशानी से बच सकते हैं. मीठा और पका हुआ खरबूजा अपनी खास सुगंध से ही पहचान में आ जाता है. खरबूजा खरीदने जाएं, तो सबसे पहले उसे सूंघकर देखें. अगर खरबूजे से हल्की मीठी खुशबू आ रही है, तो यह पका हुआ और स्वादिष्ट होने का संकेत है.


