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Cement Packaging : ईरान युद्ध की वजह से प्लास्टिक बनाने के कच्चे माल की सप्लाई पर गंभीर असर पड़ा है और कीमतें 70 फीसदी तक बढ़ चुकी हैं. इस वजह से सीमेंट की बोरी बनाने की कॉस्ट भी बढ़ी है. यह लागत सीमेंट उत्पादन की लागत पर असर डाल रही है जिससे आने वाले समय में इसके दाम बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है.
ईरान युद्ध की वजह से सीमेंट बोरी की लागत बढ़ गई है.
नई दिल्ली. ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया संकट ने भारत के कई सेक्टर्स पर असर डाला है. अभी तक सिर्फ ईंधन जैसे तेल और गैस की ही बात हो रही है, लेकिन प्लास्टिक सेक्टर पर भी इसका बखूबी असर दिख रहा है. सीमेंट कंपनियों का कहना है कि उनकी पैकेजिंग कॉस्ट लगातार बढ़ रही है. लिहाजा आने वाले समय में सीमेंट की कीमतों पर भी इसका असर दिख सकता है. ईरान युद्ध की वजह से सप्लाई पर असर पड़ा और प्लास्टिक पैकेजिंग बैग्स की बढ़ती कीमतें अल्ट्राटेक सीमेंट के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं.
देश की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी अल्ट्राटेक का कहना है कि ईंधन और मालभाड़े के बढ़े हुए खर्च भी कंपनी पर दबाव डाल रहे हैं, जबकि आदित्य बिड़ला समूह की यह प्रमुख कंपनी वित्तवर्ष 2026-27 में डबल डिजिट वॉल्यूम ग्रोथ का लक्ष्य लेकर चल रही है. कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर अतुल डागा ने बताया कि पिछली तिमाही में तत्काल प्रभाव इसलिए नहीं दिखा, क्योंकि सभी के पास ईंधन का स्टॉक था. मार्च में बैग्स की कीमतें अचानक बढ़ गईं और सभी प्रभावित हुए. लागत काफी बढ़ गई और बैग्स पर हमारी अतिरिक्त लागत लगभग 90 करोड़ रुपये रही, जो तिमाही के अन्य खर्चों में दिखती है.
70 फीसदी महंगा हुआ कच्चा माल
उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण पॉलिमर और प्लास्टिक के कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल आया है. सप्लाई चेन में बाधा और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण दाम 70 फीसदी तक बढ़ गए हैं. डागा ने स्पष्ट किया कि भले ही पैकेजिंग की लागत बढ़ी है, लेकिन बैग्स की उपलब्धता कोई समस्या नहीं बनी है. यह महंगा जरूर हुआ है, लेकिन संकट नहीं है. इस बढ़े खर्च को कम करने के लिए लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स की मदद ली जाएगी.
150 सप्लायर्स देते हैं बैग
डागा ने बताया कि पिछले दो साल में लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स हमारे लिए अनुकूल नहीं थे, लेकिन अब ये हमारे पक्ष में होंगे और कई अन्य कंपनियों के पास ऐसे इंतजाम नहीं हैं. बैग्स को लेकर कंपनी देशभर में करीब 150 सप्लायर्स के साथ काम करती है, जिससे बड़े पैमाने पर खरीदारी के कारण उसकी बारगेनिंग पावर मजबूत रहती है. जब किसी सप्लायर के लिए वॉल्यूम का फायदा होता है, तो वह बड़े ग्राहक को सर्विस देने के लिए ज्यादा इच्छुक होता है. डीजल की कीमतों और मालभाड़े के खर्च पर प्रबंधन ने सतर्क रुख अपनाया है और इसका असर अभी नहीं दिख रहा.
मार्च में बढ़े थे सीमेंट के दाम
सीएफओ का कहना है कि अभी डीजल की बढ़ी कीमत का असर नहीं दिखा है, लेकिन आगे जरूरी इसका असर पड़ेगा. फिलहाल हम मार्च तिमाही में ही अपने प्रोडक्ट के दाम बढ़ा चुके हैं तो आगे स्थिति के हिसाब से इस पर फैसला करेंगे. हमारा उत्पादन 2027-28 तक 24 करोड़ टन पहुंचाने का लक्ष्य है. इसके लिए हम हर साल करीब 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना देख रहे हैं. भविष्य के लिए पूंजी तैयार है और आने वाले समय में हम दहाई अंकों में ग्रोथ की उम्मीद भी कर रहे हैं.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें


