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साल 2026 में 25 जनवरी की शाम को प्रतीक द्विवेदी और हिमांशु शर्मा ने प्रतीक गौरी को दुबई स्थित एक ऑफिस में बुलाया. इस दौरान उनसे कहा गया कि कंपनी विवाद को आपसी सहमति से सुलझाना है. मीटिंग के दौरान सभी लोगों से कहा गया कि गोपनीयता बनाए रखने के लिए मोबाइल फोन दूसरे कमरे में रख दिए जाए. करीब एक घंटे तक फोन के अंदर हिमांशु शर्मा ने चोरी किए गए पासकोड की मदद से मोबाइल अनलॉक किया.
सीईओ के खाते से ट्रांसफर कर लिए 49 करोड़ रुपये की डिजिटल करंसी. (सांकेतिक तस्वीर)
गौतमबुद्ध नगरः नोएडा के सेक्टर 65 में स्थित ब्लॉकचेन कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ ने साइबर थाने में केस दर्ज कराने के बाद अपने पूर्व बिजनेस पार्टनर के खिलाफ पुलिस को नए सबूत दिए हैं. पीड़ित ने पुलिस को एक ऑडियो रिकॉर्ड सौंपा है, जिसमें आरोपी द्वारा वर्चुअल करंसी को दूसरे वॉलेट में ट्रांसफर करने की बात कबूल की है. यह पूरा मामला साल 2025 का है, जहां अगस्त महीने में युवराज रघुवंशी पीड़ित के नोएडा वाले ऑफिस में आया और इस दौरान उनके मोबाइल का पासवर्ड देख लिया. इसके बाद फिर उन्हें दुबई बुलाया गया और वहां पर पीड़ित का मोबाइल फोन लेकर 13 अकाउंट को नए वॉलेट में इंपोर्ट कर दिया गया.
पुलिस ने 9 लोगों के खिलाफ दर्ज किया केस
करोड़ों रुपये की क्रिप्टोकरंसी अलग-अलग वॉलेट्स में ट्रांसफर कर दी गई. बताया गया कि करीब 39 लाख यूएसडीटी, बिटकॉइन, एथेरियम, सोलाना और अन्य डिजिटल टोकन भी शामिल थे. जिनकी भारतीय कीमत 49 से 50 करोड़ रुपये बताई गई है. इस मामले में पुलिस ने 9 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. दिल्ली के विवक विहार स्थित निवासी प्रतीक गौरी है, जो ब्लॉकचेन कारोबारी है. पुलिस को प्रतीक गौरी ने बताया कि उनकी मुलाकात प्रतीक द्विवेदी से उनकी मुलाकात साल 2021 में हुई थी.
1 साल में 21 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई
दोनों की बातचीत टेक्नोलॉजी, क्रिप्टोकरंसी और फ्यूचर की इंटरनेट तकनीक वेबथ्री को लेकर होती थी. फिर दोनों ने मिलकर 5ire नाम की एक ब्लॉकचेन कंपनी शुरू की. इस कंपनी में प्रतीक गौरी सीईओ बने और प्रतीक द्विवेदी चीफ प्रॉडक्ट ऑफिसर की जिम्मेदारी मिली. कंपनी ने अक्टूबर 2021 से अप्रैल 2022 के बीच 21 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग जुटाई थी.
दुबई बुलाकर फोन से ट्रांसफर कर ली करंसी
साल 2026 में 25 जनवरी की शाम को प्रतीक द्विवेदी और हिमांशु शर्मा ने प्रतीक गौरी को दुबई स्थित एक ऑफिस में बुलाया. इस दौरान उनसे कहा गया कि कंपनी विवाद को आपसी सहमति से सुलझाना है. मीटिंग के दौरान सभी लोगों से कहा गया कि गोपनीयता बनाए रखने के लिए मोबाइल फोन दूसरे कमरे में रख दिए जाए. करीब एक घंटे तक फोन के अंदर हिमांशु शर्मा ने चोरी किए गए पासकोड की मदद से मोबाइल अनलॉक किया. फिर उसने ट्रस्ट वॉलेट ऐप खोला. उसका पिन डाला और पीड़ित के 13 अलग-अलग क्रिप्टो खातों की सीड फ्रेज कॉपी कर ली. इसके बाद करोड़ों रुपये के क्रिप्टोकरंसी अलग-अलग वॉलेट्स में ट्रांसफर कर दी गई.
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Prashant Rai am currently working as Chief Sub Editor at News18 Hindi Digital, where he lead the creation of hyper-local news stories focusing on politics, crime, and viral developments that directly impact loc…और पढ़ें


