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F-35 से तीन गुना महंगा, एक फाइटर जेट की कीमत में आ जाएंगे 5 तेजस लड़ाकू विमान – 6th generation f47 fighter jet costly than 5th gen f35 aircraft tejas

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Next Generation Fighter Jet: मॉडर्न एज वॉरफेयर में आधुनिक फाइटर जेट की जरूरत काफी बढ़ गई है, क्‍योंकि रडार और एयर डिफेंस सिस्‍टम के सामने आम लड़ाकू विमान एक्‍सपोज होने लगे हैं. रूस-यूक्रेन और ईरान जंग को देखते हुए दुनिया के तमाम देश अपने डिफेंस सिस्‍टम को अपग्रेड करने में जुटे हैं. इसमें नेक्‍स्‍ट जेनरेशन फाइटर जेट फोकस में है. अमेरिका अब 6th जेनरेशन का फाइटर जेट डेवलप कर रहा है, जो F-35, राफेल, तेजस जैसे लड़ाकू विमान से कहीं ज्‍यादा ताकतवर होने वाला है.

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अमेरिका F-47 के नाम से 6th जेनरेशन का अल्‍ट्रा मॉडर्न पावरफुल फाइटर जेट डेवलप कर रहा है. (फाइल फोटो/Reuters)

Next Generation Fighter Jet: दुनियाभर में सामरिक हालात हर दिन बदल रहे हैं. इसके साथ ही खतरे भी बढ़ रहे हैं. लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल और मानवरहित ड्रोन ने इस समस्‍या को और ज्‍यादा बढ़ा दिया है. एरियल थ्रेट को रोकने के लिए रडार और एयर डिफेंस सिस्‍टम भी डेवलप किए जा रहे हैं. ईरान जंग में THAAD और आयरन डोम जैसे डिफेंस सिस्‍टम को भी फेल होते हुए देखा गया है. ऐसे में इसे और डेवलप करने की कोशिश लगातार जारी है. भारत का मिशन सुदर्शन चक्र और अमेरिका का गोल्‍डन डोम इसका बड़ा उदाहरण है. इसके साथ अब एक और चुनौती भी पेश आने लगी है. मान लिया जाए कि दुश्‍मन के पास मजबूत और एडवांस एयर डिफेंस सिस्‍टम हो तो फिर उसका मुकाबला कैसे किया जा सकता है? दुनिया के तमाम देश इसकी तोड़ निकालने में जुटे हैं. बदलते हालात में 6th जेनरेशन फाइटर जेट का डेवलपमेंट फोकस में आ गया है. यूरोप में दो कंसोर्टियम नेक्‍स्‍ट जेनरेशन कॉम्‍बैट एयरक्राफ्ट डेवलप करने की योजना बना रहे हैं. भारत ने इसके लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया है. इसी क्रम में अमेरिका ने भी बड़ा कदम उठाया है. अमेरिका ने 6th जेनरेशन फाइटर जेट विकसित करने का अरबों डॉलर का ठेका बोइंग को दिया है. इस फ्यूचर फाइटर जेट का नाम F-47 रखा गया है. बताया जा रहा है कि एक F-47 जेट की कीमत F-35 से तीन गुना ज्‍यादा होने वाली है. राफेल से भी कई गुना पावरफुल एक F-47 एयरक्राफ्ट की कीमत में 4-5 तेजस विमान आ जाएंगे. F-47 को F-22 रैप्‍टर का नेक्‍स्‍ट स्‍टेप माना जा रहा है.

अमेरिकी वायुसेना (US Air Force) ने अपने अगले पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में बड़ा दांव खेलते हुए Boeing F-47 को भविष्य के स्वॉर्म लीडर के रूप में विकसित करने का फैसला किया है. यह निर्णय केवल एक नए फाइटर जेट को शामिल करने भर का नहीं है, बल्कि हवाई युद्ध की पूरी रणनीति को बदलने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. F-22 Raptor के बाद आने वाला F-47 छठी पीढ़ी का विमान होगा, जिसमें ऑल-एंगल स्टील्थ, एडैप्टिव इंजन तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मिशन सिस्टम जैसी उन्नत क्षमताएं शामिल होंगी. मार्च 2025 में इसे औपचारिक रूप से नामित करने और कॉन्ट्रैक्ट देने के बाद अब यह प्रोग्राम तेजी से इंजीनियरिंग चरण में आगे बढ़ रहा है.

F-47 कॉम्‍बैट एयरक्राफ्ट राफेल और तेजस के मुकाबले कहीं ज्‍यादा पावरफुल होगा. यह F-22 रैप्‍टर से भी एक कदम आगे का विमान होने वाला है. (फाइल फोटो/Reuters)

लागत काफी ज्‍यादा

हालांकि, इस महत्वाकांक्षी परियोजना की लागत भी उतनी ही बड़ी है. F-47 की प्रति यूनिट कीमत लगभग 300 मिलियन डॉलर (तकरीबन 3000 करोड़ रुपये) आंकी गई है, जो इसे दुनिया का सबसे महंगा फाइटर जेट बनाती है. यह लागत F-35A Lightning II की तुलना में लगभग तीन गुना है. इतनी कीमत में 4 से 5 तेजस फाइटर जेट खरीदा जा सकता है. बता दें कि एक तेजस फाइटर जेट की अनुमानित लागत 600 से 650 करोड़ रुपये है. इसके अलावा इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग डेवलपमेंट (EMD) कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 20 अरब डॉलर से अधिक है, जबकि अप्रैल 2026 तक कुल प्रोग्राम पर करीब 8.5 अरब डॉलर खर्च किए जा चुके हैं. अमेरिकी वायुसेना ने वित्तीय वर्ष 2027 के बजट में इस कार्यक्रम को तेज करने के लिए 3.5 से 5 अरब डॉलर की अतिरिक्त मांग भी रखी है. यह संकेत देता है कि बजटीय दबाव के बावजूद पेंटागन इस परियोजना को प्राथमिकता दे रहा है.

F-47 vs राफेल vs तेजस फाइटर जेट
F-47 फाइटर जेट   राफेल फाइटर जेट  तेजस फाइटर जेट
Boeing F-47 अमेरिका के United States Air Force के NGAD प्रोग्राम के तहत विकसित किया जा रहा छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जो F-22 Raptor की जगह लेगा. Dassault Rafale एक 4.5 जेनरेशन का ट्विन-इंजन ओमनीरोल फाइटर जेट है, जिसे Dassault Aviation ने विकसित किया है. यह एयर सुपीरियरिटी, रिकॉनिसेंस और डीप-स्ट्राइक मिशनों में सक्षम है. HAL तेजस एक 4.5 पीढ़ी का हल्का, सिंगल-इंजन मल्टीरोल लड़ाकू विमान है, जिसे एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) ने डिजाइन किया है और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित किया जा रहा है.
यह विमान अत्याधुनिक स्टेल्थ तकनीक और मैक 2 से अधिक गति (2500 KMPH) की क्षमता से लैस होगा, साथ ही लगभग 1,000 नॉटिकल मील (तकरीबन 1900 KM) से ज्यादा का कॉम्बैट रेंज प्रदान करेगा, खासकर प्रशांत क्षेत्र को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. राफेल की सबसे बड़ी खासियत इसकी ओमनीरोल कैपेबिलिटी है, जिससे यह एक ही sortie में कई तरह के मिशन (जैसे हवाई लड़ाई और जमीनी हमला) एक साथ अंजाम दे सकता है. अपनी श्रेणी में सबसे छोटा और हल्का विमान होने के कारण तेजस में कंपोजिट एयरफ्रेम और हाई-G टर्न क्षमता है, जो इसे अत्यधिक फुर्तीला बनाती है.
डिजाइन के लिहाज से इसमें टेललेस कॉन्फिगरेशन, शॉवल नोज और बेहद कम रडार सिग्नेचर जैसी खूबियां होंगी, जिससे इसकी पहचान B-21 Raider जैसे स्टेल्थ बॉम्बर के करीब मानी जा रही है. यह लड़ाकू विमान Mach 1.8 (तकरीबन 2200 KMPH) तक की रफ्तार हासिल कर सकता है और इसका कॉम्बैट रेडियस 1000 किमी से ज्यादा है, जिससे लंबी दूरी के ऑपरेशन संभव होते हैं. तेजस की अधिकतम गति लगभग Mach 1.6 से 1.8 (2200 किलोमीटर प्रति घंटा) तक है, जिससे यह सुपरसोनिक ऑपरेशन में सक्षम है.
F-47 को कमांड हब या क्वार्टरबैक की भूमिका में विकसित किया जा रहा है, जो YFQ-42A और YFQ-44A जैसे ड्रोन को नियंत्रित कर युद्ध क्षमता कई गुना बढ़ाएगा. राफेल में उन्नत RBE2 AESA रडार और SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम लगे हैं, साथ ही यह Meteor, SCALP और MICA जैसी आधुनिक मिसाइलों समेत करीब 9,500 किलोग्राम हथियार ले जाने में सक्षम है. यह विमान वायु रक्षा, ग्राउंड अटैक और समुद्री अभियानों में सक्षम है, जिससे भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ती है.
इस फाइटर की पहली उड़ान 2028 के आसपास और 2030 के दशक की शुरुआत में सेवा में शामिल होने की उम्मीद है, जबकि इसकी अनुमानित लागत करीब 300 मिलियन डॉलर प्रति विमान बताई जा रही है, जो F-35 Lightning II से काफी अधिक है. यह जेट फिलहाल F3R स्टैंडर्ड में ऑपरेट हो रहा है, जबकि इसका उन्नत F4 और भविष्य का F5 वर्जन (AI, ड्रोन टीमिंग और हाइपरसोनिक क्षमता के साथ) विकसित किया जा रहा है; इसे फ्रांस, भारत समेत कई देश इस्तेमाल कर रहे हैं. Mk1A वेरिएंट में AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) सूट और फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम जैसे उन्नत एवियोनिक्स शामिल हैं, जो इसे अत्याधुनिक बनाते हैं.

F-22 Raptor का हमसाया

F-47 के विकास पर F-22 Raptor प्रोग्राम की छाया भी साफ दिखाई देती है. F-22 को मूल रूप से 750 विमानों के बड़े बेड़े के रूप में तैयार करने की योजना थी, लेकिन शीत युद्ध के बाद बजट कटौती के कारण यह संख्या घटकर सिर्फ 187 रह गई. यही वजह है कि विशेषज्ञों के बीच यह आशंका बनी हुई है कि कहीं F-47 को भी इसी तरह की कटौती का सामना न करना पड़े. फिर भी 2026 का रणनीतिक माहौल F-22 के दौर से काफी अलग है. F-22 को जहां एक स्टैंडअलोन एयर सुपीरियोरिटी फाइटर के रूप में डिजाइन किया गया था, वहीं F-47 को एक “डिजिटल क्वार्टरबैक” की भूमिका में तैयार किया जा रहा है. इसका मतलब है कि यह अकेले लड़ाई नहीं लड़ेगा, बल्कि पूरे नेटवर्क सेंट्रिक वॉर सिस्‍टम का नेतृत्व करेगा. इस नई रणनीति का सबसे अहम हिस्सा है Collaborative Combat Aircraft (CCA) यानी मानव रहित ड्रोन सिस्टम के साथ इसका तालमेल. ये ड्रोन अतिरिक्त सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर उपकरण और हथियार लेकर चलते हैं और F-47 के निर्देशों पर काम करते हैं. इस तरह कम संख्या में F-47 विमान भी कहीं ज्यादा ताकतवर और प्रभावी बन सकते हैं.

F-47 फाइटर जेट को डेवलप करने की जिम्‍मेदारी बोइंग को दी गई है. (फाइल फोटो/Reuters)

F-47 पर क्‍या है प्‍लान

अमेरिकी वायुसेना फिलहाल F-47 के लिए 185 से अधिक विमानों का लक्ष्य रख रही है, जो लगभग F-22 के मौजूदा बेड़े के बराबर है. लेकिन मैन्‍ड-अनमैन्‍ड टीमिंग की अवधारणा के चलते यह छोटी संख्या भी बड़े स्तर पर युद्ध क्षमता प्रदान कर सकती है. हालांकि, इस कार्यक्रम के सामने बजटीय प्रतिस्पर्धा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. F-47 को अमेरिकी नौसेना के F/A-XX प्रोग्राम और F-35 के अपग्रेड जैसे महंगे प्रोजेक्ट्स के साथ फंडिंग के लिए प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है. इसी दबाव के चलते 2024 में NGAD प्रोग्राम को कुछ समय के लिए रोकना भी पड़ा था, जिसे बाद में पुनर्गठित कर F-47 के रूप में फिर से शुरू किया गया. इसके बावजूद, पेंटागन इस परियोजना को रणनीतिक रूप से अनिवार्य मानता है. खासकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा और चीन द्वारा छठी पीढ़ी के फाइटर विमानों के तेजी से विकास ने F-47 की अहमियत को और बढ़ा दिया है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें



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