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मेरठ जिले से 45 किलोमीटर दूर महाभारत कालीन हस्तिनापुर एवं उससे संबंधित क्षेत्र में आज भी विभिन्न प्रकार के ऐतिहासिक रहस्य समाएं हुए हैं, जिसको लेकर समय-समय पर पुरात्तव विभाग द्वारा भी जानने का प्रयास किया जाता है. इसी कड़ी में मेरठ हस्तिनापुर से संबंधित किला परीक्षितगढ़ की बात की जाए तो कहा जाता है भगवान श्री कृष्ण ने यहां पर एक रात्रि विश्राम कर युद्ध को रुकवाने के लिए हस्तिनापुर के लिए प्रस्थान किया था.
मेरठ: जिले से 45 किलोमीटर दूर महाभारत कालीन हस्तिनापुर एवं उससे संबंधित क्षेत्र में आज भी विभिन्न प्रकार के ऐतिहासिक रहस्य समाएं हुए हैं, जिसको लेकर समय-समय पर पुरात्तव विभाग द्वारा भी जानने का प्रयास किया जाता है. इसी कड़ी में मेरठ हस्तिनापुर से संबंधित किला परीक्षितगढ़ की बात की जाए तो कहा जाता है भगवान श्री कृष्ण ने यहां पर एक रात्रि विश्राम कर युद्ध को रुकवाने के लिए हस्तिनापुर के लिए प्रस्थान किया था. इन्हीं को देखते हुए लोकल 18 की टीम द्वारा हस्तिनापुर एक्सपर्ट एवं शोभित विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती से खास बातचीत की.
हस्तिनापुर सभा में रखा था युद्ध रुकवाने का प्रस्ताव
लोकल18 की टीम से खास बातचीत करते हुए प्रियंक भारती ने बताया कि विभिन्न लोक गाथाएं एवं ऐतिहासिक पहलुओं में इस बात का उल्लेख है. महाभारत कालीन युद्ध को रोकने के लिए हस्तिनापुर में जो सभा का आयोजन किया गया था. उसी में प्रतिभाग करने के लिए भगवान श्री कृष्ण भी हस्तिनापुर पहुंचे थे. उससे पहले वह किला परीक्षितगढ़ जो कि उसे समय हस्तिनापुर राजधानी का ही पार्ट हुआ करता था. यहां गोपेश्वर मंदिर के नजदीकी भगवान श्री कृष्णा रुके थे. यहां रात्रि विश्राम करने के पश्चात वह हस्तिनापुर की तरफ कूच किए थे. ऐसे में आज भी यहां पर मंदिर बना हुआ है. जो महाभारत कालीन ही बताया जाता है. उन्होंने बताया कि इसके नजदीकी गधारी तालाब भी भी है, उसके बारे में भी विभिन्न ऐसी लोक गाथाएं हैं की गांधारी इसी तालाब में स्नान किया करती थी.
कण-कण में बसे हैं भगवान श्री कृष्ण
प्रियंका भारती तो यहां तक कहते हैं कि भगवान श्री कृष्ण की अगर कर्म भूमि की बात की जाए तो वह हस्तिनापुर ही मानी जाती है. ऐसे में हस्तिनापुर के कण-कण में भगवान श्री कृष्ण का उल्लेख है. उन्होंने बताया कि काफी बड़ी संख्या में देश भर से श्रद्धालु महाभारत कालीन पहलुओं को जानने के लिए मेरठ के हस्तिनापुर, किला परीक्षितगढ़ एवं अन्य क्षेत्रों में दर्शन करते हुए मिल जाएंगे.
बताते चलें कि किला परीक्षितगढ़ कि अगर बात की जाए तो यहां पर श्री श्रृंगी ऋषि आश्रम भी बना हुआ है. जिसके बारे में उल्लेख है कि यहीं से ही कलयुग की शुरुआत हुई थी. इस आश्रम में विभिन्न प्रकार के आपको ऐसे पद चिन्ह भी देखने को मिलेंगे. जो कि उस बात की गवाही देते हुए दिखाई देते हैं. ऐसे में महाभारत कालीन दृष्टि से किला परीक्षितगढ़ काफी महत्वपूर्ण माना जाता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें


