4.4 C
Munich

Justice Swarana Kanta Sharma | Justice Swarana Kanta Sharma vs CBI vs Arvind Kejriwal | जस्टिस स्वर्णकांता ने CBI को देख कही ऐसी बात… हंसने लगे सभी

Must read


Justice Swarana Kanta Sharma Jokes On CBI: अदालतों की गंभीर और तनावपूर्ण कार्यवाही के बीच कभी-कभी कुछ ऐसे पल भी आ जाते हैं, जो माहौल को एकदम हल्का कर देते हैं. दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को अरविंद केजरीवाल मामले पर सुनवाई के दौरान भी कुछ ऐसा ही दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जब एक गंभीर मामले की सुनवाई के दौरान इंटरनेट ने धोखा दे दिया. और एक महिला जज के मजाकिया अंदाज ने पूरे कोर्ट रूम को ठहाकों से गूंजा दिया.

इसका कारण तो CBI वालों को पता होगा… दरअसल, कोर्ट की कार्यवाही चल रही थी और तभी तकनीकी खामी के कारण कोर्ट रूम का इंटरनेट काम करना बंद कर गया. इंटरनेट ठप होने की वजह से कोर्ट को थोड़ी देर के लिए ब्रेक लेना पड़ा. इसी बीच जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने बहुत ही हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, ‘ये क्या प्रॉब्लम हुआ है, ये तो पहली बार ऐसा हुआ है… इसका कारण तो CBI वालों को ही पता होगा…?’

सभी लोग हंसने लगे

जस्टिस शर्मा के मुंह से सीबीआई के लिए यह बात सुनते ही कोर्ट रूम में मौजूद सभी वकील और अन्य लोग जोर-जोर से हंस पड़े. बता दें कि उस समय कोर्ट में सीबीआई से ही जुड़ा एक अहम मामला चल रहा था, जिसके चलते जज साहिबा का यह मजाकिया तंज एकदम सटीक बैठा. तनावपूर्ण माहौल एकदम से हल्का हो गया.

वादी और मेरे बीच के विवाद का फैसला…

इस हंसी-मजाक के बाद जस्टिस शर्मा ने एक बेहद गंभीर मुद्दे पर भी अपनी साफ राय रखी. उनके सामने अरविंद केजरीवाल ने अर्जी लगाई थी कि वह केस की सुनवाई से खुद को अलग करने (Recusal) की मांग की गई थी. इस पर उन्होंने कहा, ‘दुर्भाग्यवश, आज मुझे दो वादियों के बीच के विवाद का फैसला करने के लिए नहीं, बल्कि एक वादी और मेरे बीच के विवाद का फैसला करने के लिए कहा गया है.’

जजों के बच्चों के वकील बनने पर बेबाक जवाब

केजरीवाल ने हितों के टकराव का आरोप लगाने वालों को आड़े हाथों लेते हुए जस्टिस शर्मा ने जजों के परिवारों के अधिकारों की रक्षा की. उन्होंने दो टूक कहा, ‘अगर किसी राजनेता की पत्नी राजनेता बन सकती है, अगर किसी राजनेता के बच्चे राजनेता बन सकते हैं, तो यह कैसे कहा जा सकता है कि किसी जज के बच्चे वकालत के पेशे में नहीं आ सकते? इसका मतलब तो जजों के परिवार के मौलिक अधिकारों को छीनना होगा.’ उन्होंने स्पष्ट किया कि असल ‘हितों का टकराव’ होने और किसी चीज को जबरन ऐसा बताकर पेश करने में बहुत बड़ा फर्क होता है.

हजार बार बोलने से झूठ सच नहीं हो जाता

सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे नैरेटिव और झूठी बातों पर भी उन्होंने कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा, ‘इस कोर्ट के एक अधिकारी के रूप में मैं इस तथ्य से पूरी तरह वाकिफ हूं कि कोर्ट में या सोशल मीडिया पर हजार बार दोहराए जाने से कोई झूठ, सच नहीं बन जाता. वह झूठ ही रहता है. केवल इसलिए कि किसी झूठ को कई बार दोहराया गया है, सच अपनी ताकत नहीं खो देता.’

दिल्ली हाईकोर्ट में इंटरनेट बंद होने पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने क्या मजाकिया टिप्पणी की?
कोर्ट रूम का इंटरनेट बंद होने पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने हल्के अंदाज में कहा, ‘ये क्या प्रॉब्लम हुआ है, ये तो पहली बार ऐसा हुआ है, इसका कारण तो CBI वालों को पता ही होगा…?” उनकी इस बात पर कोर्ट रूम में मौजूद सभी लोग हंस पड़े.

जजों के बच्चों के वकालत में आने को लेकर जस्टिस शर्मा ने क्या कहा?
जस्टिस शर्मा ने कहा कि अगर किसी राजनेता की पत्नी और बच्चे राजनेता बन सकते हैं, तो जज के बच्चे भी वकालत के पेशे में आ सकते हैं. ऐसा न होने देना जजों के परिवार के मौलिक अधिकारों को छीनने जैसा होगा.

सोशल मीडिया पर फैलाई जाने वाली झूठी बातों पर जस्टिस शर्मा ने क्या कहा?
उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे कोर्ट हो या सोशल मीडिया, किसी झूठ को हजार बार दोहराने से वह सच नहीं बन जाता. सच कभी भी अपनी ताकत नहीं खोता है.



Source link

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article