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UP-दिल्ली या मुंबई-गुजरात? PNG बुकिंग में किसने कौन आगे,होर्मुज संकट को भापा

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LPG crisis- पश्चिम एशिया संकट से एलपीजी मांग तेजी से बढ़ी है. केंद्र ने पीएनजी कनेक्‍शन के लिए अभियान चला रखा है. इस दौरान 5.2 लाख नए कनेक्शन दिए गए हैं. इनमें से महाराष्ट्र सबसे आगे हैं,जहां पर 1.2 लाख कनेक्‍शन दिए गए हैं और निष्क्रिय कनेक्शन भी तेजी से एक्टिव किए गए हैं.

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पीएनजी के बंद पड़े कनेक्‍शन को दोबारा से एक्टिव भी कराया जा रहा है.

नई दिल्ली. पश्चिम एशिया संकट की वजह से देश में एलपीजी की मांग बढ़ गयी है, जिसे देखते हुए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की बुकिंग में भारी उछाल आया है. केंद्र सरकार ने इस‍के लिए विशेष अभियान चलाया है, जिसके बाद मार्च से अब तक महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, दिल्ली और हरियाणा में सबसे ज्यादा नए कनेक्शन बुक और पुराने कनेक्शन एक्टिव किए गए हैं. इनमें सबसे आगे महराष्‍ट्र रहा है, जहां से सबसे ज्‍यादा बुकिंग की गयी है.

टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोलियम एंड रेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड ( पीएनजीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार 16 अप्रैल तक पूरे देश में 5.2 लाख नए पीएनजी कनेक्शन बुक किए गए. इनमें सबसे आगे महाराष्ट्र है, जहां 1.2 लाख नए कनेक्शन बुक हुए, जो कुल का 22% से ज्यादा है. दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश है, जहां 88,000 नए कनेक्शन बुक हुए. गुजरात तीसरे स्थान पर रहा, जहां 76,000 नए कनेक्शन बुक किए गए. दिल्ली और हरियाणा भी इस सूची में प्रमुख राज्यों में शामिल हैं.

निष्क्रिय पड़े कनेक्शनों को सक्रिय करने में भी महाराष्ट्र ने बाजी मारी. पूरे देश में 4.7 लाख निष्क्रिय कनेक्शन एक्टिव किए गए, जिनमें से 1.2 लाख केवल महाराष्ट्र में और 1 लाख उत्तर प्रदेश में एक्टिव हुए. केंद्र सरकार ने एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए पीएनजी विस्तार अभियान को तेज कर दिया है. इस अभियान को 30 जून 2026 तक बढ़ा दिया गया है. रेगुलेटरी बोर्ड ने 110 क्षेत्रों में घरेलू पीएनजी कनेक्शन तेजी से देने के निर्देश दिए हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के 25 और महाराष्ट्र के 12 क्षेत्र शामिल हैं.

सरकार ने सभी राज्यों को अतिरिक्त 10% कमर्शियल एलपीजी आवंटन देने का भी फैसला किया है. पेट्रोलियम मंत्रालय के की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि 22 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इस योजना से जुड़ चुके हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि पीएनजी न सिर्फ एलपीजी की कमी को पूरा करेगा, बल्कि यह स्वच्छ ईंधन होने के कारण पर्यावरण के लिए भी बेहतर है. रसोई गैस की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार अब पाइपलाइन और बिछाने की मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर दे रही है.

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Sharad Pandeyविशेष संवाददाता

करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्‍यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें



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