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आपने सोशल मीडिया में एक बुजुर्ग को कंधे कंकाल लेकर जाते हुए वीडियो जरूर देखा होगा. इसे देखने के बाद अब आपके मन में एक सवाल जरूर उठ रहा होगा कि यह सब होने के बाद उसकी कोई मदद हो सकी या नहीं. बैंक से पैसा निकाल पाया या अभी भी कागजी कार्रवाई में मामला अटका है. प्राशासन ने तुरंत मदद कराकर भुगतान करा दिया है.
प्रशासन ने तुंरत सर्टिफिकेट जारी कर बैंक से भुगतान कराया.
क्योंझर (ओडिशा). आपने सोशल मीडिया में एक बुजुर्ग को कंधे कंकाल लेकर जाते हुए वीडियो जरूर देखा होगा. जो अपनी बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंच जाता है. क्योंकि बैंक वाले बार बार उसकी बहन का मृत्यु सर्टिफिकेट मांग रहे थे. इसे देखने के बाद अब आपके मन में एक सवाल जरूर उठ रहा होगा कि यह सब होने के बाद उसकी कोई मदद हो सकी या नहीं. बैंक से पैसा निकाल पाया या अभी भी कागजी कार्रवाई में मामला अटका है. मामला सोशल मीडिया में आने के बाद प्रशासन भी हरकत में आ गया और सभी कागजी कार्रवाई आनन-फानन में पूरी कर ली गयी और बुजुर्ग ने पैसा निकाल लिए हैं.
इतना ही नहीं परिवार के हालात को देखते हुए अधिकारियों ने जितम मुंडा की मदद से मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस प्रमाण पत्र बनाने में सहायता की. पूरा प्रोसेस फास्ट-ट्रैक मोड में पूरा किया गया. मेडिकल अधिकारी ने तुरंत मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया. जिसकी मदद से बैंक में जमा पैसे निकालने में आसानी हो गयी. इसके लिए तहसीलदार ने खुद बैंक अधिकारियों से कोआर्डीनेट किया. फिर बहन के खाते में जमा 19,300 + ब्याज सहित कुल 19,402 रुपये जितू मुंडा को दिए गए.
परेशान होकर बुजुर्ग बहन का शव कब्र से खोदकर बैंक पहुंचा था.
प्रशासन ने दिए ये निर्देश
प्रशासन ने स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि खासकर दूर-दराज के इलाकों में सरकारी और बैंकिंग सर्विस देते समय ज्यादा ध्यान दें. इसके साथ ही यह भी जांच शुरू कर दी गई है कि कहीं किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं बरती गयी, जिसके कारण व्यक्ति को इतना बड़ा कदम उठाना पड़ा.
मामले पर एक नजर
जीतू मुंडा की बड़ी बहन की करीब दो-तीन महीने पहले बीमारी से मौत हो गई थी. बहन के नाम पर ओडिशा ग्राम्य बैंक में कुछ पैसे जमा थे. परिवार में कोई अन्य कानूनी वारिस नहीं होने के कारण जीतू मुंडा ही पैसे निकालने के लिए बैंक पहुंचा. लेकिन बैंक अधिकारियों ने निकासी के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र मांगा. गरीबी और अशिक्षा के कारण मुंडा जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सका. कई बार बैंक के चक्कर लगाने के बाद भी जब उसे पैसे नहीं मिले, तो उसने यह कदम उठाया.
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करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें


