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टाइटैनिक जहाज में डूबने वालों में एक जॉन बोरलैंड थायर अमेरिका के महान क्रिकेटिंग इतिहास का एक अहम हिस्सा थे. फिलाडेल्फिया के एक प्रतिष्ठित क्रिकेट परिवार से ताल्लुक रखने वाले थायर ने ‘फिलाडेल्फियंस’ के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला. 1884 में उन्होंने इंग्लैंड का दौरा भी किया था.
जॉन बोरलैंड थायर के नाम एक बहुत ही भावुक कर देने वाला रिकॉर्ड दर्ज हो गया। वह टाइटैनिक के मलबे में समाने वाले एकमात्र ज्ञात प्रथम श्रेणी क्रिकेटर बने.
नई दिल्ली. 14 अप्रैल, 1912 की वह काली रात जब ‘टाइटैनिक’ जैसा विशाल और कभी न डूबने वाला जहाज अटलांटिक महासागर की गहराइयों में समा रहा था, तो वहाँ केवल हाहाकार नहीं था उस बर्फीले समंदर के बीच वीरता, त्याग और प्रेम की कई कहानियाँ लिखी जा रही थीं. उन्हीं में से एक नाम था जॉन बोरलैंड थायर का. थायर केवल एक रईस कारोबारी नहीं थे, बल्कि वे खेल के मैदान के एक मझे हुए खिलाड़ी थे जिन्होंने अपनी आखिरी पारी टाइटैनिक के डेक पर पूरी गरिमा के साथ खेली.
जॉन बोरलैंड थायर अमेरिका के महान क्रिकेटिंग इतिहास का एक अहम हिस्सा थे. फिलाडेल्फिया के एक प्रतिष्ठित क्रिकेट परिवार से ताल्लुक रखने वाले थायर ने ‘फिलाडेल्फियंस’ के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला. 1884 में उन्होंने इंग्लैंड का दौरा भी किया था. रेलमार्गों और बड़े व्यवसायों की दुनिया में कदम रखने से बहुत पहले, क्रिकेट ने उनके व्यक्तित्व को अनुशासन और साहस से सींचा था.
वह भयानक रात और अंतिम बलिदान
जब टाइटैनिक एक हिमखंड से टकराया और धीरे-धीरे डूबने लगा, तो अफरा-तफरी के बीच थायर ने एक चट्टान जैसा धैर्य दिखाया. उन्होंने सबसे पहले अपनी पत्नी मैरियन और उनकी नौकरानी को सुरक्षित लाइफबोट तक पहुँचाया. जहाज पर जगह कम थी और नियम था ‘महिलाएं और बच्चे पहले’. एक पति और पिता के रूप में अपना कर्तव्य पूरा करने के बाद, थायर ने खुद पीछे हटने का फैसला किया. उन्होंने अपनी जान के ऊपर दूसरों की सुरक्षा को रखा उस रात उनका बेटा, जैक थायर, चमत्कारिक रूप से बच गया, लेकिन जॉन बोरलैंड थायर समुद्र की लहरों में कहीं खो गए.
इतिहास में एक अनूठी और गमगीन पहचान
मानवता की इस महान त्रासदी में जॉन बोरलैंड थायर के नाम एक बहुत ही भावुक कर देने वाला रिकॉर्ड दर्ज हो गया. वह टाइटैनिक के मलबे में समाने वाले एकमात्र ज्ञात प्रथम श्रेणी क्रिकेटर बने. आज जब हम टाइटैनिक को याद करते हैं, तो थायर की कहानी हमें याद दिलाती है कि खेल हमें केवल जीतना नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में हार को भी सम्मान के साथ स्वीकार करना सिखाता है. वह मैदान पर एक शानदार क्रिकेटर थे, लेकिन अपनी अंतिम घड़ी में वह एक सच्चे नायक साबित हुए.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


