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हाल ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए वर्क फ्रॉम होम का सुझाव दिया है,जिससे फ्यूल की खपत कम करने में मदद मिल सके. अगर आपके रोजाना ऑफिस आने-जाने का खर्च 300 रुपये है, तो महीने में सिर्फ 8 दिन घर से काम करने पर लगभग 2,400 रुपये की बचत हो सकती है. पूरे साल में यह बचत करीब 30,000 रुपये तक पहुंच सकती है.आइए जानते हैं बचत करने के वे सात आसान तरीके.
अगर आप रोज कार या बाइक से ऑफिस जाते हैं, तो मेट्रो, बस या लोकल ट्रेन का इस्तेमाल करने पर विचार करें. मासिक पास आमतौर पर रोजाना के पेट्रोल और पार्किंग खर्च से काफी सस्ते पड़ते हैं. इससे यात्रा का खर्च कम होता है और ट्रैफिक की परेशानी से भी राहत मिलती है.

ऑफिस जाने के लिए सहकर्मियों के साथ कार पूलिंग या राइड शेयरिंग करना पेट्रोल और टोल खर्च को काफी कम कर सकता है. इससे वाहन पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव और रखरखाव का खर्च भी घटता है. साथ ही, सड़क पर वाहनों की संख्या कम होने से ट्रैफिक और प्रदूषण में भी कमी आती है.

कई कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए ऑफिस बस या शटल सेवा उपलब्ध कराती हैं. यदि आपके कार्यालय में यह सुविधा मौजूद है, तो इसका इस्तेमाल करना सबसे किफायती और तनावमुक्त यात्रा विकल्प हो सकता है. इससे पेट्रोल, पार्किंग और कैब जैसे अतिरिक्त खर्चों से भी बचा जा सकता है.
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ऑफिस से लौटते समय किराना खरीदारी, बैंक का काम या अन्य जरूरी काम एक साथ निपटाने की योजना बनाएं. अलग-अलग चक्कर लगाने के बजाय एक ही यात्रा में कई काम पूरे करने से पेट्रोल की बचत होती है और समय भी कम खर्च होता है. यह तरीका आपकी मासिक यात्रा लागत घटाने में मदद करता है.

यदि आप कैब या राइड-हेलिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो ऑफिस आने-जाने का समय थोड़ा बदलने की कोशिश करें. पीक आवर्स में अक्सर सर्ज प्राइसिंग लागू होती है, जिससे किराया काफी बढ़ जाता है. सही समय चुनकर आप रोजाना के सफर में अच्छा-खासा पैसा बचा सकते हैं.

अगर आपकी कंपनी हाइब्रिड या वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देती है, तो उसका सही तरीके से फायदा उठाएं. सप्ताह में दो दिन घर से काम करने पर महीनेभर में पेट्रोल, मेट्रो और कैब खर्च में लगभग 40 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है. इससे समय और ऊर्जा की भी बचत होती है. सांकेतिक फोटो

ज्यादातर लोग अपने महीने में ट्रांसपोर्टेशन खर्च का सही अंदाजा नहीं लगा पाते. पेट्रोल, टोल, पार्किंग और कैब किराए का रिकॉर्ड रखने से पता चलता है कि सबसे ज्यादा पैसा कहां खर्च हो रहा है. इससे आप गैर जरूरी खर्च कम करने और बेहतर बजट बेहतर तरीके से बनाया जा सकता है.


