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Farming Tips for Farmers: आप भी गेहूं की कटाई के बाद खेत के अवशेषों को जला देते हैं. तो आप अनजाने में अपनी जमीन का सबसे बड़ा नुकसान कर रहे हैं. मुरादाबाद के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए ऐसी टिप्स साझा की हैं, जिससे न केवल मिट्टी की ताकत बढ़ेगी बल्कि आपकी अगली फसल की पैदावार भी दोगुनी हो जाएगी. इन अवशेषों को जलाने के बजाय सिर्फ 3 किलो यूरिया का इस्तेमाल आपकी जमीन को सोना बना सकता है. इतना ही नहीं ढैंचा और सनई जैसी फसलें खाद का खर्चा बचाकर आपकी जेब भर सकती हैं.
मुरादाबाद: यूपी के मुरादाबाद समेत पूरे राज्य में इस समय गेहूं की कटाई का काम जोर-शोर से चल रहा है. जैसे-जैसे खेत खाली हो रहे हैं, किसानों ने अगली फसल की तैयारी भी शुरू कर दी है. अक्सर किसान जल्दबाजी में गेहूं की कटाई के बाद बचे हुए अवशेषों को जला देते हैं, लेकिन यह तरीका न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे मिट्टी की उर्वरक शक्ति भी नष्ट हो जाती है. मुरादाबाद के कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कुछ ऐसे खास तरीके बताए हैं, जिन्हें अपनाकर वे अपने खेत की ताकत बढ़ा सकते हैं और अगली फसल से बंपर मुनाफा कमा सकते हैं.
अवशेषों को जलाएं नहीं, उन्हें खाद बनाएं
मुरादाबाद के कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदीरत्ता ने बताया कि इस बार बारिश की वजह से गेहूं की कटाई में थोड़ी देरी हुई है, जो आमतौर पर 15 अप्रैल तक पूरी हो जाती है. उन्होंने किसानों को सख्त हिदायत दी है कि गेहूं कटने के बाद खेत में जो जड़ें और अवशेष बचते हैं, उन्हें बिल्कुल न जलाएं. जलाने के बजाय, किसान खेत में हल्का पानी यानी पलेवा लगाएं और प्रति एकड़ के हिसाब से मात्र 3 किलो यूरिया का छिड़काव कर दें. ऐसा करने से गेहूं के अवशेष खेत के अंदर ही गल जाएंगे और खाद में बदल जाएंगे. इससे मिट्टी में जीवाश्म की मात्रा बढ़ती है जो फसल के लिए बहुत जरूरी है और मिट्टी को अंदर से पोषण प्रदान करती है.
ढैंचा और सनई बढ़ाएगा फायदा
खेत की ताकत बढ़ाने का दूसरा सबसे शानदार तरीका हरी खाद का इस्तेमाल करना है. डॉ. मेहंदीरत्ता के अनुसार, गेहूं के बाद किसान भाई अपने खेत में ढैंचा या सनई जैसी दलहनी फसलें लगा सकते हैं. जब ये फसलें तैयार हो जाएं, तो उन्हें पकने या फूल आने से पहले ही खेत में जुताई करके पलट देना चाहिए. मिट्टी में दबने के बाद ये फसलें गलकर खाद बन जाती हैं जिससे मिट्टी में कुदरती रूप से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है. इसके अलावा खेत में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ता है जिससे मिट्टी उपजाऊ बनती है और उसकी पानी सोखने की क्षमता भी काफी बढ़ जाती है, जिससे अगली फसल में सिंचाई की कम जरूरत पड़ती है.
खाद की बचत से बढ़ेगी किसानों की आमदनी
अगर किसान इन टिप्स को सही तरीके से फॉलो करते हैं, तो अगली फसल जैसे धान या अन्य सब्जियों में उन्हें बाहर से महंगे रासायनिक खाद डालने की जरूरत बहुत कम पड़ेगी. इससे खेती की लागत में बड़ी कमी आएगी और पैदावार पहले के मुकाबले काफी ज्यादा मिलेगी. जब लागत कम और पैदावार अधिक होगी, तो किसानों की आय में भी वृद्धि होगी और खेती का घाटा मुनाफे में बदल जाएगा.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें


