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Transgender umpire Rithika Shri: गार्ड ने स्टेडियम से भगाया,पहचान के लिए झेला तिरस्कार, जानें कौन हैं भारत की ट्रांसजेंडर अंपायर ऋतिका श्री

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नई दिल्ली: पिछले साल भारत के पूर्व क्रिकेटर संजय बांगर के बेटे आर्यन ने जब यह जानकारी दी कि उन्होंने अपना जेंडर बदल लिया है तो हर कोई हैरान था. आर्यन अपने पिता की तरह ही एक क्रिकेटर थे, लेकिन अब वह अनाया बांगर चुकी हैं. आर्यन से अनाया बनने के बाद उनके लिए मुश्किल ये हो गई है कि अब वह भारत के लिए क्रिकेट नहीं खेल पाएंगी. क्योंकि बीसीसीआई में तीसरे जेंडर के लिए किसी भी तरह का प्रावधान नहीं है. ऐसे में अनाया ने इसके लिए मांग भी उठाई है कि भारतीय क्रिकेट में तीसरे जेंडर को भी मौका मिलना चाहिए.

ऐसी ही एक कहानी ट्रांसजेंडर ऋतिका श्री की है जो पुरुष से महिला बनी और क्रिकेट में अंपायरिंग के अपने पैशन को पूरा किया, लेकिन उनके लिए ये बिल्कुल भी आसान नहीं रहा. ऋतिका श्री ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए ट्रांसजेंडर अंपायर बनने के अपनी संघर्षपूर्ण कहानी को साझा किया. ऋतिका श्री ने अपने इंटरव्यू में बताया कि कैसे पिछले साल सितंबर में कोयंबटूर के एक बड़े शिक्षण संस्थान के सुरक्षा गार्ड ने उन्हें गेट के अंदर नहीं जाने दिया. ऋतिका वहां एक क्रिकेट मैच में अंपायरिंग करने आई थीं. जेंडर ट्रांसफॉर्मेशन के एक साल बाद यह उनका पहला मैच था.

ऋतिका को गार्ड ने गेट के बाहर से भगा दिया था

ऋतिका ने अपनी संघर्ष की कहानी को बताते हुए कहा, “गार्ड ने मुझे अंदर तक नहीं जाने दिया और तुरंत भगा दिया, लेकिन उस दिन मेरे अंदर से एक आवाज आई कि मुझे उसका सामना करना चाहिए. मैंने उससे कहा मैं यहां अंपायर बनने आई हूं. मैं लड़-झगड़कर अंदर तो चली गई लेकिन मैदान तक पहुंचने से पहले ही गार्डों की एक दूसरी टोली ने मुझे रोक दिया. कुछ फोन कॉल्स किए गए और आखिरकार उन्हें अंदर जाने की अनुमति मिल गई, लेकिन तब तक ऋतिका बहुत भावुक हो चुकी थीं.”

उन्होंने कहा, “उस सुबह मैं अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकी. मेरे लिए यह एक बड़ा पल था. भीख मांगने या शोषण सहने के बजाय एक सम्मानजनक जीवन शुरू करने का पल, लेकिन मुझे फिर से तिरस्कार झेलना पड़ा. मैंने उस दिन कड़े सवाल पूछे कि क्या एक ट्रांसजेंडर सामान्य जीवन नहीं जी सकता? मुझे वह अपमान बर्दाश्त नहीं हुआ.”

2019 में ऋतिका ने किया अंपायर बनने का फैसला

बता दें कि ऋतिका ने साल 2019 में एक मोहाली में हुए एक आईपीएल मैच देखने के बाद अंपायर बनने का फैसला किया. उस समय ऋतिका 25 साल की थीं और उनका नाम मुथु राज था. अंपायरों को काम करते देख उन्होंने मन ही मन तय कर लिया कि उन्हें भी यही करना है. 2020 के लॉकडाउन में उनकी आईटी की नौकरी छूट गई. वह सलेम चली गईं, जहां उन्होंने अंपायरिंग को अपना पूरा समय दिया. तब वह एक पुरुष के रूप में रह रही थीं.

ऋतिका ने बताया कि सलेम क्रिकेट एसोसिएशन ने उनकी बहुत मदद की. वहां के सीनियर अंपायरों को उन्होंने सबसे पहले अपने अंदर हो रहे बदलावों के बारे में बताया था. उन्होंने सलेम और नमक्कल में 300 से अधिक मैचों में अंपायरिंग की. लिंग परिवर्तन के इलाज के कारण वह एक साल तक खेल से दूर रहीं. जब वह वापस आईं, तो उनके सामने एक तकनीकी समस्या थी.

ऋतिका के लिए हुआ नियम में बदलाव

ऋतिका के लिए कोयंबटूर क्रिकेट एसोसिएशन ने नियम में बदलाव करने का फैसला किया. इसे लेकर ऋतिका ने कहा कि, “मैच अधिकारियों के लिए तीसरे लिंग यानी थर्ड जेंडर की कोई श्रेणी नहीं थी या तो पुरुष थे या महिला. लेकिन कोयंबटूर क्रिकेट एसोसिएशन ने मेरा साथ दिया. उन्होंने केवल मेरा रिकॉर्ड देखा और बिना किसी भेदभाव के मुझे अपना लिया.”

कोयंबटूर वाली घटना के बाद CDCA ने कड़ा कदम उठाया. उन्होंने क्लब मालिकों, खिलाड़ियों और अंपायरों के लिए जागरूकता सत्र आयोजित किए. जिस संस्थान ने ऋतिका को रोका था, वहां अब मैच नहीं होते. अब किसी भी मैच से पहले वहां के मैदान मालिक को संदेश भेजा जाता है कि ऋतिका श्री अंपायरिंग करेंगी, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें.”

खिलाड़ी भी करते हैं ऋतिका श्री का सम्मान

मैदान पर खिलाड़ियों का व्यवहार उनकी उम्मीद से कहीं बेहतर रहा. ऋतिका कहती हैं कि, “खिलाड़ी मुझे मैम कहकर बुलाते हैं. मुझे लगता है कि मैदान पर सही फैसले लेने की वजह से मुझे यह सम्मान मिला है. वे मुझे ट्रांसजेंडर नहीं, बल्कि एक सामान्य व्यक्ति की तरह देखते हैं.” अगले महीने ऋतिका तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन की अंपायर परीक्षा देंगी. जब परीक्षा का फॉर्म आया तो उसमें थर्ड जेंडर का विकल्प नहीं था. लेकिन जब यह बात अधिकारियों तक पहुंचाई गई तो टीएनसीए ने फॉर्म बदलकर उसमें तीसरा लिंग शामिल किया.

इस बदलाव को लेकर ऋतिका ने कहा, “मेरे लिए यह पहली जीत थी. मैंने इतिहास रच दिया है.” हालांकि बीसीसीआई की अभी ऐसी कोई स्पष्ट नीति नहीं है, लेकिन टीएनसीए ने ऋतिका को पूरा समर्थन देने का वादा किया है. ऋतिका अगले महीने होने वाली परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं.



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