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Kanpur News: भीषण गर्मी का असर अब फसलों पर भी पड़ने लगा है. इस समय सबसे जरूरी है पौधों की नमी बनाए रखना. किसान खेतों में और लोग घरों के गमलों में पानी हमेशा सुबह जल्दी या फिर शाम को ही दें. आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि फसलों की देखभाल के लिए क्या करें.
कानपुर: पूरे उत्तर प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी अब खेतों और बगीचों पर भी भारी पड़ने लगी है. तेज धूप और गर्म हवाओं के चलते फसलें सूखने लगी हैं, जबकि घरों की छतों और बालकनी में लगे पौधे भी मुरझाने लगे हैं. ऐसे हालात को देखते हुए चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने किसानों और बागवानी करने वालों के लिए खास एडवाइजरी जारी की है. विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने साफ कहा है कि अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो गर्मी फसलों और पौधों को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है.
विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार प्रो वी के त्रिपाठी ने बताया कि इस समय सबसे जरूरी है पौधों की नमी बनाए रखना. उन्होंने कहा कि किसान खेतों में और लोग घरों के गमलों में पानी हमेशा सुबह जल्दी या फिर शाम को ही दें. दोपहर की तेज धूप में सिंचाई करने से पानी तुरंत भाप बन जाता है और पौधों की जड़ों पर उल्टा असर पड़ सकता है. कई बार ज्यादा गर्म मिट्टी में पानी पड़ने से पौधे झुलस भी जाते हैं.
खेतों में अपनाएं ये आसान तरीका
वैज्ञानिकों ने किसानों को मल्चिंग तकनीक अपनाने की सलाह दी है. इसमें खेत की मिट्टी को सूखी घास, पुआल या पत्तियों से ढक दिया जाता है. इससे मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है और गर्म हवा का असर सीधे फसलों पर नहीं पड़ता. साथ ही पानी की खपत भी कम होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में खेतों की बार-बार गहरी जुताई करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे जमीन की नमी तेजी से खत्म होने लगती है. हल्की सिंचाई और समय-समय पर नमी की जांच करना ज्यादा फायदेमंद रहेगा.
घर के पौधों को भी चाहिए खास देखभाल
गर्मी का असर सिर्फ खेतों तक नहीं है. घरों में लगे मनी प्लांट, तुलसी, गुलाब और दूसरे सजावटी पौधे भी तेज धूप में तेजी से सूख रहे हैं. ऐसे में वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि गमलों को ऐसी जगह रखें, जहां सीधी धूप कम पहुंचे. अगर संभव हो तो ग्रीन नेट का इस्तेमाल करें. उन्होंने कहा कि छोटे गमलों को एक साथ रखने से उनमें नमी बनी रहती है और पौधे जल्दी सूखते नहीं हैं. इसके अलावा पौधों की सूखी पत्तियां हटाते रहना भी जरूरी है, ताकि उनमें नई ग्रोथ बनी रहे.
खाद डालने में न करें जल्दबाजी
विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस समय ज्यादा नाइट्रोजन वाली तेज रासायनिक खाद का इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है. गर्मी में ऐसी खाद पौधों की जड़ों को जला सकती है और फसल की बढ़वार भी रुक सकती है. इसलिए जरूरत के हिसाब से ही खाद का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है.
प्रो वी के त्रिपाठी ने कहा कि मौसम भले ही कठिन हो, लेकिन थोड़ी सावधानी और सही तरीके अपनाकर किसान अपनी फसलें बचा सकते हैं. वहीं घरों में पौधे लगाने वाले लोग भी अगर समय पर देखभाल करें तो भीषण गर्मी में भी अपने बगीचे को हरा-भरा रख सकते हैं.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.


