Sambhal DM, IAS Story: उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक युवक ने जिलाधिकारी को एक-दो नहीं, पूरे 17 बार फोन कॉल कर दिए. कॉल का मकसद न तो कोई शिकायत थी और न ही कोई जरूरी सूचना, बल्कि युवक सिर्फ हाल-चाल पूछ रहा था, लेकिन यही मजाक उसे जेल तक ले गया. मामला तब गंभीर हुआ जब बार-बार कॉल से प्रशासनिक कामकाज में बाधा पड़ने लगी और पुलिस ने इसे शांतिभंग की श्रेणी में लिया.
कौन हैं IAS राजेंद्र पेंसिया?
संभल के पूर्व डीएम राजेंद्र पेंसिया मूल रूप से राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के रहने वाले हैं. उनका जन्म 10 अगस्त 1983 को हुआ. उन्होंने बीकॉम तक पढ़ाई की लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ बड़े लक्ष्य भी तय कर लिए थे.साल 2005 में राजेंद्र पेंसिया तृतीय श्रेणी शिक्षक बने. नौकरी के साथ उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी जारी रखी. पहले UPSC में सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.
RAS पास कर बने BDO
UPSC में असफलता के बाद उन्होंने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS)की परीक्षा दी और सफल होकर बीडीओ बने. यहीं से उनका आत्मविश्वास और मजबूत हुआ.लगातार प्रयासों के बाद 2011 में RAS परीक्षा में 8वीं रैंक हासिल की और वह डिप्टी कलेक्टर/SDM बन गए हालांकि IAS बनने का सपना अभी बाकी था.
पांचवीं कोशिश में मिली UPSC में सफलता
चार बार असफल होने के बाद राजेन्द्र पेंसिया ने आखिरकार 2015 की UPSC परीक्षा पास कर ली.इस तरह वह 2016 बैच के IAS अधिकारी बने.उनकी ट्रेनिंग लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA)में पूरी हुई.इसके बाद वह मिर्जापुर में असिस्टेंट कलेक्टर,इटावा और मथुरा में जॉइंट मजिस्ट्रेट फिर फर्रुखाबाद के CDO रहे.
पहली बार कब बने जिलाधिकारी?
आगरा विकास प्राधिकरण के वाइस चेयरमैन और शहरी विकास विभाग में स्पेशल सेक्रेटरी रहने के बाद 25 जून 2024 को उन्हें पहली बार संभल का जिलाधिकारी बनाया गया. यही उनका पहला जिला था. अब वह मुरादाबाद में डीएम की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला थाना हयातनगर क्षेत्र का है. सरायतरीन के मोहल्ला नवाबखेल कच्चा बाजार में रहने वाले अराफात ने 2 मई को संभल के तत्कालीन डीएम राजेन्द्र पेंसिया के सीयूजी नंबर पर लगातार 17 बार फोन किया. कभी वह पूछता कि डीएम साहब कैसे हैं तो कभी यह जानना चाहता कि मुझ पर कोई कार्रवाई तो नहीं करवा देंगे?कई बार कॉल कंट्रोल रूम से रिसीव हुई, जिसके बाद प्रशासन सतर्क हो गया. रविवार शाम पुलिस ने युवक को गिरफ्तार कर लिया.
युवक का दावा-‘मजे-मजे में फोन किया था’
गिरफ्तारी के बाद अराफात ने कहा कि उसने सिर्फ मजाक में और हाल-चाल पूछने के लिए फोन किया था. उसका कहना था कि डीएम साहब ने भी उससे कहा था कि कोई सजा नहीं मिलेगी, लेकिन इसके बावजूद पुलिस उसे पकड़कर ले गई. युवक का यह भी कहना था कि उसे अंदाजा नहीं था कि साधारण कॉल इतनी बड़ी सजा में बदल जाएगी.
सपा सांसद के कार्यक्रम से भी जुड़ा नाम
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब सामने आया कि अराफात एक दिन पहले संभल के सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के कार्यक्रम में शायरी पढ़ चुका था. मंच से उसने सांसद की तारीफ में शेर पढ़े, जिस पर तालियां भी बजीं. इसके बाद वह वहां से चला गया. अगले ही दिन उसकी गिरफ्तारी हो गई, जिससे इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं.
14 दिन की जेल
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अराफात का जिला संयुक्त चिकित्सालय में मेडिकल कराया. इसके बाद उसे सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया.सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार ने पुलिस की एफआईआर का संज्ञान लेते हुए युवक को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. पुलिस ने स्पष्ट किया कि अगर जमानत याचिका आती है तो उस पर कानून के मुताबिक विचार किया जाएगा.
डीएम का तबादला
इस पूरे घटनाक्रम के बीच संभल के जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया का तबादला भी हो गया. अब वह मुरादाबाद के जिलाधिकारी बनाए गए हैं. उनकी जगह अंकित खंडेलवाल को संभल का नया डीएम नियुक्त किया गया है.
क्यों चर्चा में है यह मामला?
एक तरफ एक युवक का मजे-मजे में किया गया फोन और दूसरी तरफ प्रशासनिक पद की गरिमा इस टकराव ने पूरे जिले में बहस छेड़ दी है. सवाल यही है कि मजाक और कानून की सीमा कहां खत्म होती है? संभल का यह मामला इसी सवाल के साथ लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.


