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West Bengal Bharti Ghotala: सुजीत बोस कर बैठे लालू यादव वाला कांड? वहां नौकरी के बदले जमीन, यहां फ्लैट्स… समझिए बंगाल भर्ती घोटाले की पूरी कहानी

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बंगाल में सत्‍ता बदलते ही हालात बदल गए हैं. नगरपालिका भर्ती घोटाले में अब तक बचते रहे ममता सरकार के मंत्री सुजीत बोस को ईडी ने सोमवार को ग‍िरफ्तार कर ल‍िया. जब उनके आरोपों की फेहर‍िस्‍त ईडी ने पढ़नी शुरू की तो लगा क‍ि ये तो कुछ वैसा ही कांड कर बैठे हैं, जो आरोप लालू यादव के पर‍िवार पर लगे हैं. फर्क सिर्फ इतना है क‍ि लालू यादव ने नौकरी देने के बदले लोगों की जमीनें हथ‍ियाई, और इन्‍होंने नौकरी के बदले पैसे लिए, फ्लैट लिए और भर्ती सिस्टम को पूरी तरह मैनेज किया. हम आपको बंगाल भर्ती घोटाले की एक एक परत बताने जा रहे हैं.

आखिर सुजीत बोस हैं कौन?

सुजीत बोस तृणमूल कांग्रेस के उन नेताओं में गिने जाते हैं जिनकी पकड़ सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं मानी जाती थी. उत्तर 24 परगना और खासकर बिधाननगर इलाके में उन्हें बेहद प्रभावशाली नेता माना जाता रहा है. ममता बनर्जी सरकार में वह अग्निशमन मंत्री रहे. उन्हें तृणमूल के ऑर्गेनाइजेशनल मैनेजर नेताओं में गिना जाता था. यानी सिर्फ चुनावी चेहरा नहीं, बल्कि संगठन और स्थानीय नेटवर्क पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेता. इसी वजह से उनकी गिरफ्तारी राजनीतिक तौर पर भी बड़ी मानी जा रही है.

आरोप क्‍या है?

आरोप है कि पश्चिम बंगाल के कई नगर निगमों और शहरी निकायों में नियमों को दरकिनार करके, पैसे लेकर, राजनीतिक सिफारिश पर और फर्जी प्रक्रिया के जरिए भर्तियां की गईं. यानी जिन लोगों को नौकरी मिलनी चाहिए थी, उनकी जगह कथित तौर पर ऐसे लोगों को भर्ती कर लिया गया जिन्होंने पैसे दिए, राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल किया या सिस्टम से सेटिंग की. ED और CBI दोनों एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं.

जांच एजेंसियों का दावा है कि नगर निगम भर्ती घोटाला संगठित नेटवर्क की तरह काम करता था. आरोपों के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी. कई पदों के लिए वैध विज्ञापन नहीं निकाले गए. मेरिट लिस्ट संदिग्ध थीं. इंटरव्यू और चयन प्रक्रिया में हेरफेर हुआ
कई लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये लिए गए.

पूरा मामला शुरू कहां से हुआ?

नगर निगम भर्ती घोटाले की कहानी सीधे सुजीत बोस से शुरू नहीं होती. असल शुरुआत हुई शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच से. 2023 में ED प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच कर रही थी. इसी दौरान एजेंसी ने कारोबारी अयान सिल और उसके करीबियों के ठिकानों पर छापेमारी की. यहीं से जांच को बड़ा सुराग मिला. यहां से ED को कई डिजिटल फाइलें, भर्ती से जुड़े दस्तावेज, कथित भुगतान रिकॉर्ड और OMR डेटा मिले. जांच में एजेंसी को शक हुआ कि घोटाला सिर्फ शिक्षक भर्ती तक सीमित नहीं था. बल्कि पश्चिम बंगाल के कई नगर निगमों में भी नौकरियां बेची जा रही थीं.

किन-किन जगहों पर हुआ कथित खेल?

ED के मुताबिक जांच में कई नगर निगमों और नगरपालिका क्षेत्रों के नाम सामने आए, जहां भर्तियों में घोटाले क‍िए गए. आरोप है कि इन निकायों में भर्ती प्रक्रिया को सिस्टमेटिक तरीके से प्रभावित किया गया. अगर आपको लगता है कि मामला सिर्फ बड़े अधिकारियों की नियुक्ति का था, तो ऐसा नहीं है. ED का दावा है कि कथित घोटाला नगर निगमों की लगभग पूरी लोअर और मिड-लेवल भर्ती में फैला हुआ था.

क‍िन पदों पर होनी थी भर्ती

मजदूर
स्वीपर
क्लर्क
पियून
ड्राइवर
एम्बुलेंस अटेंडेंट
पंप ऑपरेटर
हेल्पर
सैनिटरी असिस्टेंट
असिस्टेंट मिस्त्री

यानी वे नौकरियां, जिनके लिए गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार सालों तैयारी करते हैं.

अयान स‍िल कौन है और उसका रोल क्या?

पूरे केस का टेक्निकल और ऑपरेशनल केंद्र माना जा रहा है अयान स‍िल. उसकी कंपनी ABS Infozon Pvt Ltd को कई नगर निगमों की भर्ती प्रक्रिया का कॉन्ट्रैक्ट मिला था. कंपनी पेपर छापती थी. OMR शीट डिजाइन करती थी. OMR जांचती थी और मेरिट लिस्ट तैयार करती थी. यानी भर्ती सिस्टम की चाबी उसी के हाथ में थी. ED का आरोप है कि अयान स‍िल ने OMR शीट में हेरफेर किया. नंबर बदले और पैसे लेकर अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलवाई.





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