Women reservation bill live, Ravikishan speech: लोकसभा महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान रविकिशन और आसंदी जगदंबिका पाल के बीच भोजपुरी में बातचीत देखने को मिला.इस दौरान रविकिशन ने अपनी पत्नी के पैर छुने की बात भी कही जिस पर खूब ठहाके भी लगे. बीच-बीच में जगदंबिका पाल ने उन्हें रोकने की कोशिश की और भोजपुरी अंदाज में कहा-हो गईल…हो गईल…बहुत हो गईल. सदन में यह माहौल हल्का-फुल्का भी हुआ और गंभीर भी.
रवि किशन ने कहा- इ कौनो चुनावी मुद्दा नाही बा
रवि किशन ने महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए कहा कि धन्यवाद अध्यक्ष महोदय. आज का ये दिन स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा. मैं यहां संविधान के इन तीनों विधेयकों के समर्थन में खड़ा हुआ हूं. ये विधेयक यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में नूतन भारत के संकल्प की सिद्धि है. ये विधेयक सरकार की उस अटूट इच्छाशक्ति का परिणाम है जिसने नामुमकिन को मुमकिन करके दिखाया है. अध्यक्ष महोदय, ये कोई चुनावी मुद्दा नहीं है जैसा कि विपक्ष कहते हैं चुनाब बा यूपी में चुनाव आई, बंगाल में चुनाव चलता…ई कौनो चुनाव के मुद्दा नाही बा. इ लोग विरोधी बाड़न महिला के आरक्षण के. ये चुनाव का मुद्दा नहीं है.रविकिशन को भोजपुरी में बोलते देख आसंदी जगदंबिका पाल से भी नहीं रहा गया और वह बीच में ही भोजपुरी में बोल पड़े-ह त का बा.. ह त बता द.जिस पर रवि किशन ने जवाब दिया-हां बा…बहुत बढ़िया…त इ ह देख…इ हमनी के संस्कार है. ये संस्कार है भाजपा का. ये मोदी जी के संस्कार का मुद्दा है और ये वही लेकर आए हैं. ये लोग भूला गए क्योंकि मैं उस दर्द को जानता हूं.
अंधेरे के दर्द को मैंने अपने घर में भी महसूस किया
रवि किशन ने आगे कहा-अभी हमारे विपक्ष के जो वहां के सर्वे-सर्वा नेता बोल रहे थे.अपनी बैकयार्ड की कहानी, अपनी राजशाही बैकयार्ड की कहानी… मैं अपनी गरीबी की कहानी सुनाता हूं. मेरे गांव, मेरे घर में चूल्हा नहीं था. मेरे गांव, मेरे घर में शौचालय नहीं था. मैंने अपनी घर की माता-बहनों को, अपने गांव की, अपने भोजपुरिया समाज की, अपने बिहार-यूपी की और जितने भी गांव देश में जहां गरीबी रही, शौचालय नहीं…उनके दर्द को देखा है. वो शाम के अंधेरे का इंतजार करती थीं.वही महिला कि शौच में जाएंगे…उस अंधेरे के दर्द को मैंने अपने घर में भी महसूस किया. अपनी दादी की आंखों को भी तकलीफ में देखा…चूल्हा फूंकते हुए. प्रधानमंत्री मोदी जी आए… महिलाओं के दर्द का निस्तारण हुआ, निवारण हुआ. देश जागरूक हुआ. 65-60 साल जहां विरोधी कभी सोचे नहीं थे…महिलाओं के इस सबसे बड़े दर्द को…इतने बड़े भारत को ये लोग चला रहे थे…आधी आबादी के बारे में जो लोग नहीं सोचे…”
कुल नेता हईं जो ग्राम पंचायत में हैं
रवि किशन ने आगे कहा कि वो महिला वो शक्ति जो आज फाइटर जेट उड़ा रही है, जो आज सेना में है, सेना का नेतृत्व कर रही हैं, आज ग्राम पंचायत में हैं, आज पढ़ाई में आगे हैं, स्पोर्ट्स में, पैरा ओलंपिक में, क्रिकेट में… अभी महिला वर्ल्ड कप ले के आ गई…वो महिला के आरक्षण की बात…क्यों ये दरवाजे उन महिलाओं को…भारत की महिलाओं को रोकें? 140 करोड़ की आबादी में 70 करोड़ महिलाएं…हमारा जिला गोरखपुर जहां का मैं सांसद हूं…वहां की आबादी 50 लाख से ज्यादा है…परिसीमन होगा तब मौका मिलेगा.हमके सब गांव के बहिन-बिटिया कहत रहीं… सिद्धार्थनगर आपका क्षेत्र इतना बड़ा, देवरिया इतना बड़ा, कुशीनगर इतना बड़ा…अरे बहिन-बिटिया कहत रहलीं…कुल नेता हईं जो ग्राम पंचायत में हैं, सदस्य हैं, महिला मोर्चा में हैं कि भइया अब हमनी के मौका मिली…भैया हमलोग भी आएंगे सदन में…आवाज उठाएंगे…महिलाओं की आवाज…अब उन पर अपराध होगा…दरवाजा नहीं ठोकेंगी.”
त आप पत्नी के पैर छुए ल न?
इस बीच आसंदी रविकिशन को जगदंबिका पाल ने टोका और कहा कि आपका प्रचार भी तो आपकी पत्नी ही करती हैं.रवि किशन ने कहा-हां…हमारे वाह…हमारा प्रचार…एक लाख वोट…मुझे लाखों वोट मिलता है…मेरा एक-डेढ़ लाख वोट मेरी धर्मपत्नी लेकर आती है और मैं उनके पैर छूता हूं. तीन बिटिया हैं मेरी…एक बिटिया आर्म्स फोर्स की तैयारी कर रही है.जगदंबिका पाल भोजपुरी में बोले-त आप पत्नी के पैर छुए ल न?जिस पर रवि किशन ने कहा-हां हम छुई लां…आ सबक छुए क चाहीं…आ विरोधी लोग के बड़ कष्ट भइल…क्यों नहीं छुना चाहिए? यही लक्ष्मी है..वही देवी है… हमारे दुख में जब मेरे पास पैसा नहीं था..मैं जब सिनेमा में स्ट्रगल करता था.वो गरीबी में मेरी पत्नी मेरा साथ दी.तो मैं क्यों नहीं उसका पैर छुऊंगा? वो छुआने नहीं देती.वो जब सो रही होती है.गहरी नींद में रहती है तब हम उनके पैर छूते हैं और छुना चाहिए.ये विरोधियों को भी छुना चाहिए.जो महिला के विरोधी हैं.तब ताकतवर रवि किशन बनेंगे.तब विश्व जानेगा आपको.इस पर पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा.
रवि किशन ने पूछा-का कहल ह?
उनकी इस बात पर जगदंबिका पाल ने कहा-अब आपके काम बन गईल…गईल दूर-दूर तक संदेश.महिलाओं के बीच में ऐसा कोई पत्नीव्रता है.रवि किशन ने पूछा-का कहल ह?जगदंबिका पाल ने कहा-पत्नीव्रता… पत्नीव्रता… पत्नीव्रता.. जिस पर रवि किशन ने कहा-गीत सुनने का समय नहीं है.ये महिलाओं के दर्द को सुनने का समय है. यहां लोग अपने गार्डन की कहानी सुनाकर चले गए. जहां प्रधानमंत्री का अपमान करते हैं.ऐसे प्रधानमंत्री का.जिसको देश की जनता ने चुना है.ऐसे पीएम का आप अपमान करते हो.दुखद है.महिलाओं को 33 प्रतिशत मिलना चाहिए.महिलाओं को आना चाहिए.परिसीमन होना चाहिए.नहीं तो ये महिला जो आज वोट करने जाती हैं मोदी जी को.ये कभी इस भारत की महिला विपक्षियों को वोट नहीं करेंगी.मैं दावे के साथ कहता हूं.अगर ये पारित नहीं हुआ तो एक भी महिला का वोट विरोधियों को नहीं मिलेगा.ये मेरी बात ऑन रिकॉर्ड रखिएगा.हर हर महादेव.महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए ये 33%.जगदंबिका पाल ने कहा कि अब खत्म कीजिए…धन्यवाद.
सुन हो अध्यक्ष महोदय
इस पर रवि किशन ने कहा-सुन हो अध्यक्ष महोदय और परिसीमन भी होखे के चाहीं.जय हो आपकी. एगो सुन ल..एगो बात सुन.जिस पर जगदंबिका पाल ने कहा-हो गईल..हो गईल..अरे ढेर हो गईल..तब तक रवि किशन अपना पेज ढूंढते हुए बोले-कहां रे..इस पर पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा.जगदंबिका पाल बोले-अरे हो गईल.हो गईल.रवि किशन ने कहा-बस…परिसीमन मिलना चाहिए..जय…धन्यवाद अध्यक्ष महोदय.


