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ताला कारोबारी मोहम्मद जमाल बताते हैं कि यह जो तकरीबन 80 साल पुराना प्राचीन ताला है. इस चैनल वाला ताला कहा जाता है जब अलीगढ़ में ताला बनाने की शुरुआत की गई थी तो इसी चैनल वाले ताले की तर्ज पर लकड़ी का ताला बनाया गया था. जो की साइज में इस ताले से दोगुना या तीन गुना बढ़ा हुआ करता था. क्योंकि लकड़ी के इतने छोटे पार्ट्स नहीं बन सकते थे इसलिए बाद में यह छोटे पार्ट्स पीतल में बनना शुरू हुए. तो इस प्रकार से लकड़ी के ताले के बाद जो तले का इजात हुआ वह पीतल का हुआ जिसके हर पार्ट्स पीतल के ही हुआ करते थे.
अलीगढ़: अलीगढ़ ताला और तालीम के लिए विश्व भर में जाना जाता है. शहर में ताले का बड़े पैमाने पर कारोबार किया जाता है इसीलिए अलीगढ़ शहर को ताला नगरी के नाम से भी जाना जाता है. इस शहर की एक बड़ी आबादी ताले के कारोबार के ऊपर निर्भर करती है यहां विभिन्न प्रकार के ताले तैयार किए जाते हैं जिसमें कुछ एंटीक और प्राचीन तले भी शामिल हैं. इसी कड़ी में शामिल है अलीगढ़ का 80 साल पुराना चैनल वाला ताला. यह ताला आज भले ही प्रचलन में नहीं है लेकिन इस ताले की कहानी बड़ी रोचक है.
ब्रिटिश काल में तैयार किया गया ताला
दरअसल इस ताले के बारे में बताया जाता है कि यह ताला 80 साल से जाएदा पुराना है और ब्रिटिश शासन काल के दौरान इस ताले का निर्माण किया गया था. शुरुआती दौर में लकड़ी के ताले का इस्तेमाल किया जाता था जिसको बाद में समय के साथ धीरे-धीरे अपडेट करते हुए इसको पीतल के ताले की शक्ल दी गई. इस पीतल के ताले को बिल्कुल लकड़ी के ताले की तर्ज पर बनाया गया और इसके हर एक पार्ट्स अलग हुआ करते थे जिनको असेंबल करके ताले की शक्ल दी जाती थी इसीलिए इसको चैनल वाला ताला कहा जाता था. इस चैनल वाले ताले को एंटीक ताला या प्राचीन ताला भी कहा जा सकता है. यह मार्केट में आज प्रचलन में नहीं है लेकिन इस ताले को देखने के बाद ताले का इतिहास जरूर पता चलता है.
जानकारी देते हुए ताला कारोबारी मोहम्मद जमाल बताते हैं कि यह जो तकरीबन 80 साल पुराना प्राचीन ताला है. इस चैनल वाला ताला कहा जाता है जब अलीगढ़ में ताला बनाने की शुरुआत की गई थी तो इसी चैनल वाले ताले की तर्ज पर लकड़ी का ताला बनाया गया था. जो की साइज में इस ताले से दोगुना या तीन गुना बढ़ा हुआ करता था. क्योंकि लकड़ी के इतने छोटे पार्ट्स नहीं बन सकते थे इसलिए बाद में यह छोटे पार्ट्स पीतल में बनना शुरू हुए. तो इस प्रकार से लकड़ी के ताले के बाद जो तले का इजात हुआ वह पीतल का हुआ जिसके हर पार्ट्स पीतल के ही हुआ करते थे.
पीतल से किया गया है तैयार
ताला कारोबारी जमाल बताते हैं कि पीतल में बनाए जाने की वजह से इस ताले की आयु बहुत बढ़ गई. जो ताला इस वक्त हमारे पास मौजूद है वह करीब 80 वर्ष पुराना है. इस ताले के बारे में यह कहा जा सकता है कि इस ताले का निर्माण ब्रिटिश शासन काल के दौर में किया गया था. क्योंकि इसको बनाने में कास्ट बहुत महंगी पड़ेगी और इसको मार्केट में बेचना भी मुश्किल होगा. इस ताले की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इतना पुराना ताला होने के बावजूद आज भी यह ताला सही से चल रहा है और काम कर रहा है.
उन्होंने कहा कि अभी तक इस ताले में किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं आई है और ना ही कोई खराबी आई है. यह ताला अभी मार्केट में प्रचलन में नहीं है. हमारे पास भी है तालाब काफी समय से रखा हुआ है बतौर एक एंटीक पीस. इस ताले को चैनल वाला ताला इसलिए कहा जाता है क्योंकि जब इसको लकड़ी के रूप में बनाया गया था तो उसके हर एक पार्ट्स अलग-अलग हुआ करते थे. तो उन पार्ट्स को असेंबल करके ताला बनाया जाता था और यह ब्रिटिश काल के समय में होता था इसीलिए इस ताले का नाम चैनल वाला ताला पड़ा.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें


