12.9 C
Munich

‘तुषार भाई ने ईश्वर से 25वां घंटा पाने के लिए अर्जी दी है’, CJI सूर्यकांत ने क्यों किया कोर्ट नंबर-1 का जिक्र

Must read


होमताजा खबरदेश

तुषार भाई ने ईश्वर से 25वां घंटा पाने के लिए अर्जी दी है, CJI क्यों बोले ऐसा?

Last Updated:

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कानून एक मानवीय उद्यम है. तुषार मेहता की बुक्स मानवीय संवेदनाएं दिखाती हैं. इन बुक्स में सिर्फ मजेदार कहानियां नहीं हैं. यह ज्यूडिशियल प्रोसेस का सच बताती हैं. कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे.

ख़बरें फटाफट

Zoom

सीजेआई सूर्यकांत ने एसजी तुषार मेहता को उनकी नई किताब के लिए बधाई दी. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने रविवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दो पुस्तकों के विमोचन के अवसर उनकी लेखनी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने प्रतिष्ठित विधि जगत में ‘तीक्ष्ण बुद्धि और पैनी दृष्टि’ के साथ प्रवेश किया है. दिल्ली में मेहता की दो पुस्तकों – ‘द बेंच, द बार, एंड द बिजारे’ और ‘द लॉफुल एंड द ऑफुल’ के विमोचन के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में प्रधान न्यायाधीश कांत ने कहा कि जब मेहता ने उन्हें इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया तो वह सोच रहे थे कि अगर कानून की दुनिया किसी ‘कॉमेडी क्लब’ में छुट्टी मनाने चली जाए तो क्या होगा.

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि पन्ने पलटते हुए उनके मन में बार-बार एक ही सवाल उठ रहा था कि मेहता को आखिर इन शानदार किताबों को लिखने का समय कहां से मिला? उन्होंने कहा, “भारत के सॉलिसिटर जनरल के रूप में मैं उन्हें अपनी सुबह कोर्ट नंबर 1 में बिताते हुए देखता हूं, उनकी दोपहर संभवतः अन्य अदालतों और सरकारी कामों में बंटी होती है और मुझे उम्मीद है कि उनकी शाम उन हजारों पन्नों के कानूनी दस्तावेज पढ़ने में बीतती होगी और फिर भी, हम सब यहां एक नहीं, बल्कि दो किताबों के विमोचन के लिए आए हैं!”

कार्यक्रम में शाह के परिवार, शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, वरिष्ठ वकीलों और कानूनी बिरादरी के अन्य सदस्यों की मौजूदगी में प्रधान न्यायाधीश ने वहां उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “तो मैंने इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश की! मेरे पास दो सिद्धांत हैं. या तो तुषार भाई ने ईश्वर से दिन में 25वां घंटा पाने के लिए अर्जी दी है और उसे सिर्फ अपने लिए सुरक्षित रखा है, या फिर उन्होंने यह खोज लिया है कि हास्य लिखने का सबसे अच्छा समय तब होता है जब कोर्ट नंबर 1 में सुनवाई के दौरान कोई फाइल पढ़ने में बहुत लंबा समय लग रहा हो. मेरा मानना ​​है कि दूसरा सिद्धांत ही सही है!”

उन्होंने कहा, “ये केवल मजेदार कहानियां नहीं हैं, बल्कि इस बात का खुलासा भी करती हैं कि न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी मानवीय संवेदनाएं कभी-कभी उसके संगमरमर जैसे औपचारिक आवरण के पीछे से कैसे झलक उठती हैं. तुषार भाई केवल हमें लतीफे सुनाकर संतुष्ट नहीं होते, बल्कि वे हर किस्से को कुशलता से इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि वह मनोरंजन भी करे और ज्ञान भी दे.” प्रधान न्यायाधीश कांत ने कहा कि मेहता विनम्रतापूर्वक याद दिलाते हैं कि कानून अपनी गंभीरता के बावजूद अब भी एक गहन मानवीय उद्यम है.

About the Author

authorimg

Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



Source link

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article