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बिगड़ रही आदत ! कमाई घटी तो कर्ज से खर्चे पूरे कर रहे लोग, कोरोना के बाद ढाई गुना से ज्‍यादा बढ़ा बोझ

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RBI New Report : रिजर्व बैंक ने हालिया रिपोर्ट में बताया है कि देश में कोरोनाकाल के बाद लोगों में कर्ज लेकर खर्चे पूरे करने की प्रवृत्ति बढ़ी है. इस दौरान क्रेडिट कार्ड का इस्‍तेमाल करीब ढाई गुना बढ़ा, जबकि रकम में हर साल 27 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसी दौरान ड‍ेबिट कार्ड का उपयोग कम हुआ है.

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कोरोनाकाल के बाद से क्रेडिट कार्ड से खर्च काफी बढ़ गया है.

नई दिल्‍ली. कहा तो ये जाता है कि जब कमाई घटे तो आदमी को अपने खर्चे भी कम कर लेने चाहिए, लेकिन भारतीयों की बिगड़ती आदतों ने इस गणित को भी उल्‍टा कर दिया है. रिजर्व बैंक की हालिया रिपोर्ट बताती है कि महामारी के बाद जब लोगों की कमाई पर असर पड़ा तो उन्‍होंने कर्ज लेकर अपने खर्चे पूरे करने शुरू कर दिए. आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2021 से 2025 के बीच क्रेडिट कार्ड लेनदेन में 2.6 गुना से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

आरबीआई के अनुसार, इस अवधि के दौरान निजी क्षेत्र के बैंकों ने अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाते हुए क्रेडिट कार्ड सेक्‍टर में दबदबा और मजबूत किया है. आरबीआई की ‘भुगतान प्रणाली रिपोर्ट, दिसंबर 2025’ के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2021 में क्रेडिट कार्ड लेनदेन की संख्या 216 करोड़ थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 570 करोड़ हो गई. इसी अवधि के दौरान लेनदेन का मूल्य भी 8.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 23.2 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो करीब 27 फीसदी की सालाना वृद्धि दिखाता है.

कम हो रहा डेबिट कार्ड से खर्च
आरबीआई रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इसी अवधि में डेबिट कार्ड लेनदेन में गिरावट दर्ज की गई. साल 2021 में डेबिट कार्ड लेनदेन की संख्या 408.7 करोड़ थी, जो साल 2025 में घटकर 133.6 करोड़ रह गई. इस दौरान लेनदेन का मूल्य भी 7.4 लाख करोड़ रुपये से घटकर 4.5 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. आरबीआई ने इस गिरावट का कारण यूपीआई, डिजिटल वॉलेट और क्रेडिट कार्ड के बढ़ते उपयोग को बताया है. हालांकि, डेबिट कार्ड अब भी सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले कार्ड बने हुए हैं.

सरकारी से आगे निकले प्राइवेट बैंक
रिपोर्ट के अनुसार, निजी क्षेत्र के बैंकों ने क्रेडिट कार्ड बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर दिसंबर, 2025 तक 71.1 फीसदी कर ली, जो दिसंबर, 2021 में 67.7 फीसदी थी. सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी मामूली बढ़कर 23.9 फीसदी हो गई, जबकि विदेशी बैंकों की हिस्सेदारी घटकर 3.8 फीसदी रह गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, लघु वित्त बैंकों ने दिसंबर, 2025 तक 14 लाख क्रेडिट कार्ड जारी किए.

डिजिटल भुगतान में तेज इजाफा
आरबीआई ने यह भी बताया कि देश में डिजिटल भुगतान प्रणाली तेजी से विस्तार कर रही है. साल 2016 से 2025 के बीच डिजिटल लेनदेन की संख्या 33 गुना बढ़ी, जबकि मूल्य लगभग तीन गुना हो गया. पिछले पांच साल में ही डिजिटल भुगतान चार गुना से अधिक बढ़े हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग के कारण डेबिट कार्ड का इस्तेमाल लगातार घट रहा है, जबकि यूपीआई, डिजिटल वॉलेट और क्रेडिट कार्ड का उपयोग बढ़ा है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें



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