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‘बिल हर महीने आ रहा, पानी कभी नहीं आया’, उद्यमियों की छलकी पीड़ा, बूंद-बूंद के लिए तरस रहा ग्रेटर नोएडा का ईकोटेक-3

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Greater Noida ki local news : ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र ईकोटेक-3 में पानी के कनेक्शन दिए जाने और नियमित बिल आने के बावजूद सप्लाई नहीं हो रही. टैंकर से पानी मंगवाना पड़ रहा है. उद्यमी मनीष चौहान लोकल 18 से बताते हैं कि बाहर से पानी मंगाने से उत्पादन लागत बढ़ रही है. प्रतिस्पर्धा में बने रहना मुश्किल हो रहा है. उद्यमी नरेश कुमार चौहान बताते हैं कि कई बार शिकायत करने के बावजूद सिर्फ आश्वासन ही मिला है. क्षेत्र में केवल पानी ही नहीं, बल्कि कई बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है.

ग्रेटर नोएडा. यूपी के ग्रेटर नोएडा स्थिति औद्योगिक क्षेत्र ईकोटेक-3 में बुनियादी सुविधाओं की कमी एक बार फिर उजागर हो रही है. यहां के उद्यमी पिछले कई वर्षों से पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं. स्थिति इतनी खराब है कि उद्योगों को न केवल उत्पादन कार्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि पीने के पानी तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि पानी के कनेक्शन दिए जाने और नियमित बिल आने के बावजूद सप्लाई नहीं हो रही. ईकोटेक-3 के उद्यमी मनीष चौहान लोकल 18 से बताते हैं कि वे पिछले 5-6 साल से महंगे पानी पर निर्भर हैं. उनका कहना है कि इस क्षेत्र में पानी की समस्या सबसे ज्यादा है और इसका सीधा असर उद्योग पर पड़ रहा है. टैंकर के जरिए पानी मंगवाना महंगा साबित हो रहा है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही है और प्रतिस्पर्धा में बने रहना मुश्किल हो रहा है. इतने वर्षों में समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया.

उद्यमी नरेश कुमार चौहान बताते हैं कि स्थिति और भी चिंताजनक है. पानी के कनेक्शन तो दिए गए हैं और हर महीने बिल भी आ रहा है, लेकिन पाइपलाइन से पानी कभी नहीं आया. मैंने आज तक सप्लाई का पानी आते नहीं देखा. उनका आरोप है कि यह समस्या शुरू से ही बनी हुई है और कई बार शिकायत करने के बावजूद सिर्फ आश्वासन ही मिला है. नरेश कहते हैं कि क्षेत्र में केवल पानी ही नहीं, बल्कि अन्य बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है. यहां की सड़कें जर्जर हालत में हैं, जिससे आवागमन और माल ढुलाई में भी परेशानी होती है. समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो उद्योगों के संचालन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.

‘अब केवल दो विकल्प’

उद्यमी जितेंद्र चौहान कहते हैं कि उद्यमियों के पास अब केवल दो ही विकल्प बचे हैं—या तो टैंकर मंगवाएं या बाजार से पानी खरीदें. यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है और अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. ईकोटेक-3 जैसे औद्योगिक क्षेत्र में पानी की कमी न केवल उद्योगों के लिए बल्कि वहां काम करने वाले हजारों कर्मचारियों के लिए भी चिंता का विषय है. पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता का अभाव यह सवाल खड़ा करता है कि औद्योगिक विकास के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी क्यों हो रही है. उद्यमियों का कहना है कि वे नियमित रूप से बिल भर रहे हैं, लेकिन मिल कुछ नहीं रहा.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें



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