नई दिल्ली. लोकसभा में शुक्रवार को संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका. इस बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, लेकिन सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में विफल रही. मतदान के दौरान बिल के पक्ष में 298 सांसदों ने वोट किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया, जिसके चलते यह विधेयक पास नहीं हो पाया. इस अहम विधेयक के गिरने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि हमने संविधान पर हुए इस हमले को हरा दिया है. हमने साफ तौर पर कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है. हमने इसे रोक दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए उन्होंने आगे कहा कि 2023 में लाए गए महिला बिल को लागू किया जाए, जिस पर पूरा विपक्ष समर्थन देने को तैयार है.
वहीं, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह केवल महिला आरक्षण का सवाल नहीं था, बल्कि देश के लोकतंत्र और अखंडता से जुड़ा विषय था. उन्होंने कहा कि हम कभी इससे सहमत नहीं हो सकते कि महिला आरक्षण को परिसीमन से इस तरह जोड़ा जाए कि वह पुरानी जनगणना पर आधारित हो, जिसमें ओबीसी वर्ग शामिल ही नहीं है. ऐसे में इस बिल का पारित होना संभव नहीं था.
बिल के गिरने पर ‘एक्स’ पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा, “संशोधन विधेयक गिर गया. उन्होंने महिलाओं के नाम पर, संविधान को तोड़ने के लिए, असंवैधानिक तरकीब का इस्तेमाल किया. भारत ने देख लिया. इंडिया ने रोक दिया. जय संविधान.”
प्रियंका गांधी ने इसे लोकतंत्र और देश की एकता के लिए बड़ी जीत करार दिया. उन्होंने कहा कि विपक्ष शुरू से ही इस बिल के मौजूदा स्वरूप का विरोध कर रहा था और अंततः संसद में यह बिल पास नहीं हो सका.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने लिखा, “तमिलनाडु ने दिल्ली को हराया! 23 अप्रैल को हम दिल्ली के घमंड को और उस घमंड को सपोर्ट करने वाले गुलामों को एक साथ हराएंगे!”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की अपनी खतरनाक परिसीमन प्रस्तावों को महिला आरक्षण से जोड़ने की नापाक और शरारती कोशिश लोकसभा में निर्णायक रूप से नाकाम हो गई है.”
उन्होंने आगे कहा, “यह हमारे लोकतंत्र, हमारे संघवाद और संविधान की जीत है. यह गैर-जैविक, गैर-गृहस्थ प्रधानमंत्री की वैधता पर भी सवाल खड़ा करता है. मोदी सरकार के लिए अगले कदम साफ हैं, उन्हें 2029 के चुनावों के लिए लोकसभा की मौजूदा व्यवस्था में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करना चाहिए. सितंबर 2023 से ही पूरे विपक्ष की यही लगातार मांग रही है, जब संसद ने सर्वसम्मति से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ पारित किया था, जिसे आखिरकार कल देर रात ही अधिसूचित किया गया.”
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पोस्ट में लिखा, “मोदी-शाह ने देश की आधी आबादी को ढाल बनाकर डिलिमिटेशन करने की कोशिश की और इस देश के लोकतंत्र, संविधान और संघवाद को चोट पहुंचाने का कुत्सित प्रयास किया. उनकी ये चालबाजी एकजुट विपक्ष, ‘इंडिया’ ने भांप ली और संविधान संशोधन बिल गिर गया. हम सभी विपक्षी दलों के नेताओं का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं.”
खरगे ने आगे कहा, “मोदी-शाह अपनी राजनीति को चमकाने के लिए भारत के लोकतंत्र को तबाह करने चले थे, उनकी ये साज़िश अब औंधे मुंह गिर गई है. हम मोदी सरकार से फिर एक बार मांग करते हैं कि वो 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के अनुसार महिलाओं को 33% आरक्षण 2029 के चुनावों से ही दिया जाए. कांग्रेस पार्टी सितंबर 2023 से इसकी मांग कर रही है. यह ‘नारी शक्ति’ के प्रति प्रधानमंत्री जी की प्रतिबद्धता की असली परीक्षा होगी.”
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “संसद में डिलिमिटेशन बिल फेल हुआ. मोदी जी के अहंकार की हार हुई. मोदी सरकार की उल्टी गिनती शुरू.” बता दें कि संविधान के अनुच्छेद 368 के उपबंधों के अनुसार, सभा की कुल सदस्य संख्या के बहुमत द्वारा और सभा के उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो तिहाई बहुमत द्वारा विधेयक पारित नहीं हुआ.


