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1998 में इंग्लैंड के ट्रेंट ब्रिज के मैदान पर माइक आर्थटन और एलन डोनाल्ड के बीच जो घमासान हुआ, उसे क्रिकेट इतिहास के सबसे खतरनाक और रोमांचक स्पेल के रूप में याद किया जाता है. उस शाम मैदान पर जो जुनून और गुस्सा दिखा, उसने खेल की गरिमा और प्रतिद्वंद्विता की नई परिभाषा लिख दी थी जब दक्षिण अफ्रीका के “व्हाइट लाइटनिंग” एलन डोनाल्ड ने इंग्लैंड के माइक आर्थटन को अपनी आग उगलती गेंदों से निशाना बनाया
1998 में माइक ऑर्थटन ने खेला था क्रिकेट इतिहास का सबसे खतरनाक ओवर, गेंदबाज थे एलन डोनाल्ड
नई दिल्ली. जब से क्रिकेट खेल की शुरुआत हुई तेज गेंदबाजों के लिए बाउंसर उनकी अभिव्यक्ति का एक साधन हुआ करता था. समय के साथ खेल में बहुत से बदलाव देखने को मिले बस नहीं बदला तो रफ्तार के साथ उछाल भरी गेंदों का बल्लेबाजों से सवाल पूछना. सवाल तक तो ठीक था कुछ ऐसे मैच और कुछ ऐसे ओवर क्रिकेट इतिहास में फेंके गए जिसको देखकर आज भी लगता है कि वो बल्लेबोज को आउट करने के लिए नहीं उनको चोट पहुंचाने के लिए फेंके गए.
1998 में इंग्लैंड के ट्रेंट ब्रिज के मैदान पर माइक आर्थटन और एलन डोनाल्ड के बीच जो घमासान हुआ, उसे क्रिकेट इतिहास के सबसे खतरनाक और रोमांचक स्पेल के रूप में याद किया जाता है. उस शाम मैदान पर जो जुनून और गुस्सा दिखा, उसने खेल की गरिमा और प्रतिद्वंद्विता की नई परिभाषा लिख दी थी जब दक्षिण अफ्रीका के “व्हाइट लाइटनिंग” एलन डोनाल्ड ने इंग्लैंड के माइक आर्थटन को अपनी आग उगलती गेंदों से निशाना बनाया, तो वह सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि ‘सर्वाइवल’ की जंग थी.
विवाद की शुरुआत: अंपायर का वह फ़ैसला
इंग्लैंड को जीत के लिए 247 रनों की दरकार थी और आर्थटन 27 रन पर खेल रहे थे तभी डोनाल्ड की एक तीखी बाउंसर आर्थटन के दस्तानों को छूती हुई विकेटकीपर मार्क बाउचर के हाथों में गई. दक्षिण अफ्रीकी टीम ने ज़ोरदार अपील की, लेकिन अंपायर स्टीव डन टस से मस नहीं हुए और ‘नॉट आउट’ का इशारा कर दिया.
95 mph की रफ़्तार और बाउंसरों की बौछार
इस फ़ैसले ने डोनाल्ड को ‘ज्वालामुखी’ बना दिया और उन्होंने लगभग 95 mph की रफ़्तार से गेंदबाजी शुरू की और आर्थटन के शरीर को निशाना बनाना शुरू कर दिया. कभी ओवर द विकेट तो कभी राउंड द स्टंप से डोनाल्ड ने एंगल बदलकर लगातार बाउंसरों की बारिश की. हर खतरनाक गेंद के बाद डोनाल्ड और आर्थटन के बीच तीखी ‘आई कांटेक्ट’ की जंग चली, जहां कोई भी झुकने को तैयार नहीं था. गेंदें आर्थटन के चेहरे के करीब से गुज़र रही थीं और कुछ उनके शरीर पर भी लगीं. डोनाल्ड अंपायर और बल्लेबाज दोनों पर अपना गुस्सा निकाल रहे थे.
आर्थटन की ऐतिहासिक पारी
इतने घातक हमले के बावजूद आर्थटन क्रीज़ पर डटे रहे उन्होंने धैर्य नहीं खोया और अंततः 98 रन* की नाबाद पारी खेलकर इंग्लैंड को 8 विकेट से जीत दिलाई. दिलचस्प बात यह है कि मैच खत्म होने के बाद दोनों दिग्गजों ने ड्रेसिंग रूम में एक साथ बीयर पी बाद में आर्थटन ने वह दस्तानासाइन करके डोनाल्ड को तोहफे में दिया, जिस पर वे आउट थे पर अंपायर की वजह से वो बच गए और अपनी टीम को एतिहासिक जीत दिला गए.


