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रंगों में बसी विरासत! उदयपुर में लहरिया-बंधेज का जलवा कायम, सदियों पुरानी कला आज भी फैशन और पर्यटन की शान

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रंगों में बसी विरासत! उदयपुर का लहरिया-बंधेज आज भी क्यों है इतना खास?

 

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Leheriya Bandhej Udaipur: उदयपुर में लहरिया और बंधेज की पारंपरिक कला आज भी अपनी चमक बनाए हुए है. सदियों पुरानी यह टाई-डाई तकनीक न केवल राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान है, बल्कि पर्यटन का भी अहम हिस्सा बन चुकी है. यहां के कारीगर आज भी पारंपरिक तरीकों से कपड़ों को रंग-बिरंगे डिजाइनों में ढालते हैं, जो देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. लहरिया और बंधेज की साड़ियां, दुपट्टे और ड्रेस मटेरियल खासतौर पर त्योहारों और शादी-ब्याह के मौसम में बेहद लोकप्रिय होते हैं. आधुनिक फैशन के साथ तालमेल बिठाते हुए इस कला ने अपनी खास पहचान बनाए रखी है. यह विरासत न केवल कारीगरों की आजीविका का स्रोत है, बल्कि राजस्थान की समृद्ध संस्कृति को भी दुनिया के सामने प्रस्तुत करती है.



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