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सावधान! गन्ने की पत्तियां जलाना बेवकूफी! इस विधि से बनाएं ‘काला सोना’, खेत में होगी शानदार पैदावार

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सावधान! गन्ने की पत्तियां जलाना बेवकूफी! इस विधि से बनाएं ‘काला सोना’

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अक्सर गन्ने की फसल की कटाई के बाद किसान बची हुई पेड़ी को खराब समझकर जला देते हैं, लेकिन अगर सही प्रबंधन किया जाए, तो यह किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है. आइए किसान से जानते हैं कि पेड़ी किसान के किस काम आ सकता है.

शाहजहांपुर: गन्ने की कटाई के बाद किसान अक्सर अगली फसल की तैयारी में जुट जाते हैं. लेकिन अगर गन्ने की कटाई के बाद बची हुई पेड़ी (Ratoon) का सही प्रबंधन किया जाए, तो यह किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है. पेड़ी की फसल में बुवाई का खर्च नहीं लगता और यह मुख्य फसल की तुलना में जल्दी तैयार हो जाती है. कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि कटाई के तुरंत बाद अगर किसान कुछ वैज्ञानिक तकनीक को अपनाएं, तो कम लागत में गन्ने की शानदार पैदावार ली जा सकती है. सही समय पर खाद और पानी का प्रबंधन पेड़ी की गुणवत्ता को बढ़ा देता है.

कृषि एक्सपर्ट डॉ. एन.पी. गुप्ता का कहना है कि गन्ने की कटाई के बाद खेत में बची पत्तियों और अवशेषों को जलाना नहीं चाहिए. इसे पूरे खेत में समान रूप से फैला दें और बायो-डिकम्पोजर का छिड़काव करें. इससे पत्तियां जल्दी सड़कर खाद का काम करेंगी और खरपतवार भी कम उगेंगे. पेड़ी की फसल में प्रति एकड़ एक बोरी DAP और लगभग 40 किलो यूरिया का प्रयोग करना चाहिए. खाद को जड़ों के पास डालकर हल्की गुड़ाई कर देने से कल्लों का फुटाव अच्छा होता है और पैदावार में भारी बढ़ोतरी देखी जाती है.

अवशेषों का सही उपयोग
गन्ने की कटाई के बाद खेत में जो पत्तियां और अवशेष बचते हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में पताई कहा जाता है, उन्हें खेत से बाहर निकालने या जलाने के बजाय खेत में ही फैला देना चाहिए. इस पर बायो-डिकम्पोजर का छिड़काव करने से ये अवशेष जैविक खाद में बदल जाते हैं. यह न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है, बल्कि नमी को भी सोखकर रखता है. इससे सिंचाई की आवश्यकता कम पड़ती है और पौधों को प्राकृतिक पोषण मिलता है.

खाद और उर्वरक प्रबंधन
पेड़ी की फसल को शुरुआती दौर में नाइट्रोजन और फास्फोरस की अधिक आवश्यकता होती है. किसानों को प्रति एकड़ एक बोरी DAP और 40 किलो यूरिया का संतुलित उपयोग करना चाहिए. इसे सीधे मिट्टी में फेंकने के बजाय जड़ों के पास डालना अधिक प्रभावी होता है. खाद डालने के बाद हल्की गुड़ाई अवश्य करें, ताकि पोषक तत्व सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंच सकें और कल्ले मजबूती से विकसित हो सकें.

खरपतवार नियंत्रण की तकनीक
खेत में सिंचाई के बाद अक्सर भारी मात्रा में खरपतवार उग आते हैं, जो मुख्य फसल का पोषण छीन लेते हैं. पेड़ी के नए कल्ले निकलते समय रासायनिक खरपतवार नाशकों के प्रयोग से बचना चाहिए, क्योंकि ये कोमल पौधों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके स्थान पर समय-समय पर निराई-गुड़ाई करना सबसे बेहतर विकल्प है. अगर अवशेषों को खेत में फैलाया गया है, तो वो मल्चिंग का काम करते हैं और खरपतवारों को उगने से काफी हद तक रोकते हैं.

पेड़ी फसल के आर्थिक लाभ
पेड़ी प्रबंधन अपनाने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें बीज और खेत की जुताई का खर्च शून्य हो जाता है, क्योंकि जड़ें पहले से ही स्थापित होती हैं, इसलिए फसल जल्दी बढ़ती है और चीनी मिलों के लिए जल्दी उपलब्ध हो जाती है. सही देखभाल से पेड़ी की उपज मुख्य फसल के बराबर या उससे भी अधिक हो सकती है. कम निवेश और कम समय में अधिक मुनाफा कमाने के लिए पेड़ी प्रबंधन आधुनिक खेती का एक जरूरी हिस्सा है.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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