नई दिल्ली. क्रिकेट खेल के रोज बदलते स्वरूप के बीच में कुछ स्थाई नजर आता है तो वो है टेस्ट क्रिकेट. क्रिकेट के खेल को अक्सर चौकों और छक्कों के रोमांच से मापा जाता है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट की असली खूबसूरती इसकी ‘धीमी’ चाल में छिपी है. जहाँ एक तरफ टी-20 का शोर है, वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसी पारियां भी हैं जहाँ समय थम सा गया. बात उन 5 दिग्गजों की जिन्होंने अपनी सुस्त बल्लेबाजी से दुनिया को हैरान कर दिया और साबित किया कि कभी-कभी कुछ न करना भी एक कला है.
टेस्ट क्रिकेट धैर्य की परीक्षा है, लेकिन इतिहास में कुछ ऐसे लम्हे आए जब बल्लेबाजों ने इस परीक्षा को एक अलग ही स्तर पर पहुँचा दिया. यहाँ न केवल रन बनाने की गति धीमी थी, बल्कि बल्लेबाजों ने क्रीज पर बिताए समय को ही अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बना लिया.
1. इतिहास का सबसे लंबा ‘शून्य’ (डक)
जब हम शून्य पर आउट होने की बात करते हैं, तो अक्सर खिलाड़ी अगली ही गेंद पर पवेलियन लौट जाता है लेकिन 1999 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ न्यूजीलैंड के ज्योफ अलॉट ने जो किया, वह अकल्पनीय था. अलॉट ने अपनी टीम को हार से बचाने के लिए पूरे 101 मिनट तक बल्लेबाजी की और 77 गेंदे खेलीं, लेकिन उनका खाता नहीं खुला. यह क्रिकेट इतिहास का सबसे ‘लम्बा डक’ माना जाता है.
2. नवाब का धैर्य: पटौदी जूनियर
भारतीय क्रिकेट के दिग्गज नवाब ऑफ पटौदी जूनियर ने 1973 में इंग्लैंड के खिलाफ एक ऐसी पारी खेली जिसने संयम की नई परिभाषा लिखी. उन्होंने 102 मिनट क्रीज पर बिताए और केवल 5 रन बनाए. इस पारी का मकसद रनों की बारिश करना नहीं, बल्कि इंग्लैंड के गेंदबाजों को थकाकर मैच को ड्रॉ की ओर ले जाना था.
3. एबी डीविलियर्स का बदला हुआ अवतार
एबी डीविलियर्स को दुनिया उनके ‘मिस्टर 360’ अंदाज और तेज बल्लेबाजी के लिए जानती है लेकिन 2015 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर उन्होंने अपनी पहचान के विपरीत बल्लेबाजी की. भारत के खिलाफ उन्होंने 297 गेंदों में केवल 43 रन बनाए. उनकी इस ‘कछुआ चाल’ पारी का एकमात्र उद्देश्य दक्षिण अफ्रीका के लिए मैच बचाना था. भले ही वह सफल नहीं रहे, लेकिन यह पारी उनके करियर की सबसे अनुशासित पारियों में से एक गिनी जाती है.
4. हनीफ मोहम्मद: समय को मात देने वाला बल्लेबाज
पाकिस्तान के हनीफ मोहम्मद को ‘लिटिल मास्टर’ कहा जाता था. 1954 में उन्होंने एक ऐसी पारी खेली जिसमें उन्होंने 337 मिनट (साढे़ पांच घंटे से ज्यादा) बल्लेबाजी की और महज 20 रन (223 गेंदें) जोड़े. आज के दौर में इतने समय में दो टी-20 मैच खत्म हो सकते हैं, लेकिन हनीफ का लक्ष्य विकेट बचाना था.
5. एलेक बैनरमैन: 620 गेंदों का संघर्ष
1892 में जब क्रिकेट अपने शुरुआती दौर में था, तब ऑस्ट्रेलिया के एलेक बैनरमैन ने रिकॉर्ड तोड़ धैर्य दिखाया उन्होंने 91 रन बनाने के लिए 620 गेंदे खेलीं. आज के समय में 600 गेंदों का मतलब होता है पूरा एक दिन अकेले बल्लेबाजी करना. यह पारी दर्शाती है कि पुराने समय में विकेट की अहमियत कितनी ज्यादा थी. धीमी बल्लेबाजी को अक्सर बोरियत से जोड़ा जाता है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट के प्रशंसकों के लिए यह ‘तपस्या’ की तरह है. ज्योफ अलॉट का वह शून्य या डीविलियर्स के वे 43 रन महज आंकड़े नहीं हैं, बल्कि वे विपरीत परिस्थितियों में हार न मानने के प्रतीक हैं.


