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बलराम दास ने बताया कि इस स्थान पर पहले पिंडी रूप में पूजा की जाती थी और जो पूजा करते थे वह प्रत्येक मंगलवार को अयोध्या के हनुमानगढ़ी हनुमान जी का दर्शन करने जाते थे. अचानक उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया और वह अयोध्या जाने में असमर्थ हो गए, और एक दिन उनके सपने में हनुमान जी स्वयं आकर बताते हैं कि जिस स्थान पर आप पिंडी रूप में पूजा करते हैं. उस स्थान के नीचे हमारा स्वरूप विराजमान है. उसे मिट्टी के पिंडी को हटाइए मिट्टी के पिंडी को हटाने के बाद बैठे हुए हनुमान जी की स्वरूप बाहर निकाला तभी से यहां पर हनुमान जी की पूजा की जाती है.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड इटियाथोक के ग्राम सभा रुदापुर में स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है. यह मंदिर करीब 200 से ढाई सौ वर्ष पुराना माना जाता है और यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं. लोकल 18 से बातचीत के दौरान मंदिर के महंत बलराम दास बताते हैं कि इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना और रोचक है. कहा जाता है कि यहां पहले एक छोटा सा स्थान था, जहां भगवान हनुमान की पूजा की जाती थी. समय के साथ श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती गई और धीरे-धीरे इस स्थान को मंदिर का रूप दे दिया गया. आज यह मंदिर गोंडा की पहचान बन चुका है.
इस मंदिर का जाने इतिहास
बलराम दास ने बताया कि इस स्थान पर पहले पिंडी रूप में पूजा की जाती थी और जो पूजा करते थे वह प्रत्येक मंगलवार को अयोध्या के हनुमानगढ़ी हनुमान जी का दर्शन करने जाते थे. अचानक उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया और वह अयोध्या जाने में असमर्थ हो गए, और एक दिन उनके सपने में हनुमान जी स्वयं आकर बताते हैं कि जिस स्थान पर आप पिंडी रूप में पूजा करते हैं. उस स्थान के नीचे हमारा स्वरूप विराजमान है. उसे मिट्टी के पिंडी को हटाइए मिट्टी के पिंडी को हटाने के बाद बैठे हुए हनुमान जी की स्वरूप बाहर निकाला तभी से यहां पर हनुमान जी की पूजा की जाती है. यह बात लगभग 200 से ढाई सौ वर्ष पुरानी मानी जाती है.
महंत चरण दास ने कराया था निर्माण
बलराम दास बताते हैं कि लगभग 200 से ढाई सौ वर्ष पूर्व हमारे पूर्वज महंत रामचरण दास द्वारा कराया गया है माना जाता है कि रामचरण दास हनुमान जी के प्रिय भक्त थे और सबसे बड़ी बात यह है कि यहां पर हनुमान जी की मूर्ति या प्रतिमा की स्थापना नहीं की गई है यहां पर स्वयंभू हनुमान जी प्रकट हुए हैं और जहां पर स्वयंभू हनुमान जी प्रकट होते हैं या हनुमान जी स्वयं रहते हैं उसे स्थान को हनुमानगढ़ कहा जाता है इसलिए इस स्थान का श्री हनुमानगढ़ी मंदिर रुदापुर धाम के नाम से जाना जाता है. बलराम दास बताते हैं कि हनुमानगढ़ी मंदिर पर गोंडा, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, बस्ती, अयोध्या, गोरखपुर, सुल्तानपुर, अमेठी समेत पूरे प्रदेश से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं. हनुमानगढ़ी मंदिर पर प्रत्येक मंगलवार के दिन मेले का आयोजन होता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें


