11 C
Munich

₹143579 करोड़ की 5th जेन जेट डील, पाकिस्‍तान ने बढ़ाई भारत की टेंशन – Turkey Pakistan usd 15000000000 KAAN 5th Generation Stealth Fighter Jet Deal

Must read


Turkey-Pakistan 5th Gen Fighter Jet Deal: भारत पूरी प्‍लानिंग के तहत अपने डिफेंस सिस्‍टम को अपग्रेड कर रहा है. फाइटर जेट से लेकर मिसाइल, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्‍टम तक डेवलप किए जा रहे हैं. फ्रांस से 114 राफेल जेट खरीदने का सौदा किया गया है. इसे देश के इतिहास की सबसे बड़ी डिफेंस डील बताया जा रहा है. वहीं, नेक्‍स्‍ट जेनरेशन का फाइटर जेट बनाने के लिए स्‍वेदशी स्‍तर पर AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है. इसका उद्देश्‍य पांचवीं पीढ़ी और उससे आगे का लड़ाकू विमान डेवलप करना है. चीन पहले ही 5th जेनरेशन का स्‍टील्‍थ जेट बना चुका है. अब पाकिस्‍तान से बड़ी खबर सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि पाक‍िस्‍तान ने तुर्की के साथ बड़ी डिफेंस डील की है, जिसके तहत इस्‍लामाबाद पांचवीं पीढ़ी का 65 फाइटर जेट खरीदेगा. हालांकि, अभी तक दोनों देशों की तरफ से इस महाडील की पुष्टि नहीं की गई है. ऐसा होने पर दक्षिण एशिया में पावर बैलेंस गड़बड़ा सकता है. यदि मीडिया रिपोर्ट सही है तो पाक‍िस्‍तान का यह कदम चीन के प्रति उसके मोहभंग को भी दिखाता है. इससे पहले इस बात की चर्चा थी कि पाकिस्‍तान अपने परंपरागत सहयोगी चीन से पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट खरीदेगा, लेकिन अब इस्‍लामाबाद ने अंकारा का रुख कर लिया है

तुर्की और पाकिस्तान के बीच कथित तौर पर 65 अत्याधुनिक KAAN फिफ्थ जेनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट्स की खरीद को लेकर 15 अरब डॉलर (₹143579 करोड़ भारतीय मुद्रा में, पाकिस्‍तान मुद्रा में 417741 करोड़ रुपया) की बड़ी डिफेंस डील की खबर ने वैश्विक रक्षा जगत में हलचल पैदा कर दी है. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की के एक ड‍िफेंस जर्नलिस्‍ट ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच यह समझौता हो चुका है, हालांकि अभी तक न तो पाकिस्तान सरकार और न ही तुर्की की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि की गई है. यदि यह समझौता सही साबित होता है, तो यह पाकिस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी रक्षा खरीद में से एक माना जाएगा. साथ ही यह तुर्की के स्वदेशी फिफ्थ जेनरेशन लड़ाकू विमान कार्यक्रम KAAN के लिए भी बड़ा निर्यात अवसर साबित हो सकता है. KAAN (जिसे पहले TF-X या MMU नाम से जाना जाता था) तुर्की का स्वदेशी स्टील्थ फाइटर जेट है. इसे अत्याधुनिक एवियोनिक्स, कम रडार पहचान क्षमता और एयर सुपीरियोरिटी मिशनों के लिए विकसित किया गया है.

तुर्की का KAAN vs राफेल F-4
KAAN फाइटर जेट राफेल F-4 फाइटर जेट
तुर्की का पहला स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट TAI KAAN तेजी से अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में अपनी पहचान बना रहा है. इसे Turkish Aerospace Industries (TAI) ने विकसित किया है और इसने फरवरी 2024 में अपनी पहली सफल उड़ान भरी थी. फ्रांस द्वारा विकसित डसॉल्ट राफेल F4 एक अत्याधुनिक 4.5वीं पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे एयर सुपीरियरिटी, न्यूक्लियर डिटरेंस और डीप-स्ट्राइक मिशनों के लिए तैयार किया गया है. यह राफेल के सबसे आधुनिक संस्करणों में गिना जाता है.
KAAN एक ट्विन-इंजन, ऑल-वेदर और एयर सुपीरियॉरिटी फाइटर विमान है, जिसे कम रडार पहचान (Low Radar Cross Section) और स्टेल्थ क्षमता को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. विमान में इंटरनल वेपन बे दिए गए हैं, जिससे इसकी रडार विजिबिलिटी और कम हो जाती है. राफेल F4 की सबसे बड़ी खासियत इसकी नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर क्षमता है. यह फाइटर जेट सैटेलाइट, ग्राउंड कमांड नेटवर्क और अन्य लड़ाकू प्लेटफॉर्म्स के साथ रियल टाइम डेटा साझा कर सकता है, जिससे युद्धक्षेत्र में तेज और सटीक फैसले लेने में मदद मिलती है.
विमान की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुपरक्रूज क्षमता मानी जा रही है. ट्विन-इंजन कॉन्फिगरेशन के कारण यह बिना आफ्टरबर्नर के लंबे समय तक सुपरसोनिक गति बनाए रखने में सक्षम होगा. इस विमान में अपग्रेडेड RBE2 AESA रडार, एडवांस SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और थेल्स स्कॉर्पियन हेलमेट-माउंटेड डिस्प्ले जैसे आधुनिक सेंसर लगाए गए हैं. इससे पायलट को दुश्मन के लक्ष्यों की तेजी से पहचान और ट्रैकिंग में मदद मिलती है.
KAAN में तुर्की की स्वदेशी एवियोनिक्स और सेंसर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसमें Aselsan द्वारा विकसित Karat Infrared Search and Track (IRST) सिस्टम और Toygun इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल टारगेटिंग सिस्टम लगाया गया है. इसके अलावा KEMENT Tactical Data Link के जरिए यह रियल टाइम नेटवर्किंग और ड्रोन के साथ संयुक्त ऑपरेशन करने में सक्षम होगा. हथियार क्षमता के मामले में राफेल F4 लंबी दूरी की Meteor BVR मिसाइल और 1,000 किलोग्राम तक के ASM1000 प्रिसिजन गाइडेड बम ले जाने में सक्षम है. इसके अलावा इसमें AI सहायता प्राप्त टार्गेटिंग सिस्टम और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस तकनीक भी शामिल की गई है.
Turkish Aerospace Industries के अनुसार, KAAN की शुरुआती डिलीवरी 2028 के अंत तक तुर्की वायुसेना को शुरू करने का लक्ष्य है, जबकि इसकी पूर्ण ऑपरेशनल क्षमता 2030 के शुरुआती वर्षों तक हासिल होने की उम्मीद है. इस बीच इंडोनेशिया समेत कई देशों ने इसमें रुचि दिखाई है और पाकिस्तान व सऊदी अरब के साथ भी रक्षा सहयोग बढ़ने की चर्चा है. फ्रांस की वायुसेना और नौसेना में राफेल F4.1 मुख्य ऑपरेशनल प्लेटफॉर्म बन चुका है. वहीं भारत ने 114 राफेल विमानों की खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है. भारतीय संस्करण को F4+ कहा जा रहा है, जिसमें स्वदेशी हथियार, सुरक्षित डेटा लिंक और स्टील्थ विमान पहचानने में सक्षम उन्नत रडार शामिल होंगे. इन विमानों का बड़ा हिस्सा नागपुर में असेंबल किए जाने की योजना है.

लंबे समय से पक रही थी खिचड़ी

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान लंबे समय से KAAN कार्यक्रम में रुचि दिखाता रहा है. दोनों देशों के बीच पहले भी JF-17 लड़ाकू विमान जैसे कई रक्षा सहयोग कार्यक्रम चल चुके हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी इंजीनियर भी KAAN प्रोजेक्‍ट के विकास में शामिल रहे हैं और ज्‍वाइंट प्रोडक्‍शन फैशिलिटी स्थापित करने पर भी चर्चा हो चुकी है. ऐसे में यह डील केवल विमान खरीद तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर और स्थानीय उत्पादन जैसे बड़े औद्योगिक सहयोग का रास्ता भी खोल सकती है. पाकिस्तान के लिए यह सौदा उसकी वायु शक्ति में बड़ा रणनीतिक बदलाव ला सकता है. यदि उसे बड़ी संख्या में फिफ्थ जेनरेशन स्टील्थ विमान मिलते हैं, तो उसकी वायुसेना की क्षमताओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी. माना जा रहा है कि ये विमान पाकिस्तान के मौजूदा लड़ाकू बेड़े के साथ मिलकर क्षेत्रीय संतुलन और प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर सकते हैं.

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो हजारों करोड़ की इस डील के तहत पाकिस्‍तान मित्र देश तुर्की से 65 स्‍टील्‍थ एयरक्राफ्ट खरीदेगा. (फाइल फोटो/Reuters)

पाकिस्‍तान के अलावा भी अन्‍य खरीदार

दूसरी ओर, तुर्की के लिए यह डील उसके रक्षा निर्यात कार्यक्रम की बड़ी सफलता के रूप में देखी जा रही है. राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन के नेतृत्व में तुर्की पिछले कुछ वर्षों से अपनी घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने पर जोर दे रहा है, ताकि विदेशी हथियार पर निर्भरता कम की जा सके. KAAN प्रोजेक्‍ट इसी रणनीति का प्रमुख हिस्सा मानी जाती है. तुर्की पहले ही अपने वायुसेना कार्यक्रम के लिए KAAN के शुरुआती करार कर चुका है और अब मित्र देशों को इसका निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इंडोनेशिया और अजरबैजान जैसे देशों के साथ भी KAAN को लेकर बातचीत चल रही है. ऐसे में पाकिस्तान के साथ संभावित समझौता तुर्की को फिफ्थ जेनरेशन लड़ाकू विमान बाजार में एक नए खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकता है.

भारत ने फ्रांस के साथ 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने का सौदा किया है. राफेल 4.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान है. (फाइल फोटो/Reuters)

तुर्की-पाकिस्तान के बीच किस डिफेंस डील का दावा किया गया है?
एक तुर्की रक्षा पत्रकार ने दावा किया है कि तुर्की और पाकिस्तान के बीच 65 KAAN फिफ्थ-जेनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट्स की खरीद के लिए करीब 15 अरब डॉलर की बड़ी रक्षा डील हुई है. अगर यह समझौता सही साबित होता है, तो यह पाकिस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी रक्षा खरीद में शामिल होगा.

KAAN फाइटर जेट की खासियत क्या है?
KAAN तुर्की का स्वदेशी फिफ्थ-जेनरेशन स्टील्थ फाइटर एयरक्राफ्ट है, जिसे पहले TF-X या MMU नाम से भी जाना जाता था. इसमें लो-ऑब्जर्वेबल स्टील्थ डिजाइन, आधुनिक एवियोनिक्स, एयर सुपीरियॉरिटी क्षमता और एडवांस हथियार प्रणाली जैसी खूबियां शामिल हैं.

क्या इस डील की आधिकारिक पुष्टि हुई है?
फिलहाल पाकिस्तान सरकार, ISPR, तुर्की के रक्षा मंत्रालय या Turkish Aerospace Industries (TAI) की ओर से इस डील की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. इसलिए इस खबर को लेकर अभी सतर्कता बरती जा रही है.

पाकिस्तान को इस डील से क्या रणनीतिक फायदा हो सकता है?
अगर पाकिस्तान को KAAN जेट्स मिलते हैं, तो उसकी वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा होगा. इससे पाकिस्तान की स्टील्थ और एयर कॉम्बैट क्षमता मजबूत होगी, साथ ही क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर भी असर पड़ सकता है.

तुर्की और पाकिस्तान के रक्षा सहयोग का महत्व क्या है?
दोनों देशों के बीच पहले से JF-17 जैसे प्रोजेक्ट्स में सहयोग रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान के इंजीनियर KAAN प्रोग्राम में भी योगदान दे रहे हैं. संभावित डील से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, संयुक्त उत्पादन और दीर्घकालिक रक्षा औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा मिल सकता है.

अभी तक डिफेंस डील की पुष्टि नहीं

हालांकि, फिलहाल इस पूरे मामले में आधिकारिक पुष्टि का अभाव बना हुआ है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय, ISPR, तुर्की के रक्षा मंत्रालय और Turkish Aerospace Industries की ओर से अब तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है. रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि इतने बड़े रक्षा समझौते में लंबी बातचीत, वित्तीय व्यवस्था और सरकारी मंजूरियां शामिल होती हैं, जिन्हें पूरी तरह गोपनीय रखना आसान नहीं होता. ऐसे में अब सभी की नजर दोनों देशों की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है.

भारत के लिए चिंता का सबब क्‍यों?

यदि यह रिपोर्ट सही साबित होती है तो भारत की चिंता बढ़ सकती है. भारत ने फ्रांस के साथ 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद को लेकर करार किया है, लेकिन यह 4.5 जेनरेशन का जेट है. वहीं, पाकिस्‍तान और तुर्की के बीच पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट को लेकर करार होने की बात सामने आई है. बता दें कि फिफ्थ जेनरेशन जेट को रडार या एयर डिफेंस सिस्‍टम से इंटरसेप्‍ट करना आसान नहीं होता है. भारत भी फौरी जरूरतों को पूरा करने के लिए पांचवीं पीढ़ी का जेट खरीदना चाहता है, लेकिन अभी तक यह तलाश पूरी नहीं हुई है. स्‍वदेशी स्‍तर पर नेक्‍स्‍ट जेनरेशन जेट डेवलप करने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है, लेकिन इसके ऑपरेशनल होने में 10 साल या उससे ज्‍यादा का वक्‍त लग सकता है.



Source link

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article