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वैभव सूर्यवंशी से कम नहीं UP का यह लड़का! पिता को पैरालिसिस, मां व्हीलचेयर पर… फिर भी क्रिकेट में गाड़ा झंडा

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सहारनपुर: संघर्ष ही सफलता की पूंजी है, ये लाइन सहारनपुर के 15 वर्षीय छात्र अर्णव पर सटीक बैठती है, क्योंकि कहा जाता है कि हर एक सफलता के पीछे उसकी संघर्षभरी कहानी छिपी होती है. कुछ ऐसी ही कहानी है अर्णव की, जो उम्र में बेहद छोटा है, जिसने 4 साल पहले दूसरे बच्चों को देखकर क्रिकेट खेलना शुरू किया था और उसको लगता था कि वह उन बच्चों से बेहतर क्रिकेट खेल सकता है. घर की स्थिति बेहद ही खराब होने के चलते उसने क्रिकेट खेलने की अपनी इच्छा अपनी माता को जाहिर की. अर्णव की माता शुरू से ही व्हीलचेयर पर हैं और 2 साल पहले पिता को भी पैरालिसिस अटैक आ चुका है.

घर का खर्च उठाने के लिए बड़ा भाई प्राइवेट जॉब करता है. अर्णव की पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट में भी उसको आगे बढ़ाना किसी चुनौती से कम नहीं था. अर्णव की माता ने अर्णव का दाखिला क्रिकेट एकेडमी में कराया. सुबह के समय उसकी माता उसे स्कूल के लिए तैयार करती और घर से 5 किलोमीटर दूर अर्णव साइकिल से स्कूल जाता. छुट्टी होने पर घर आकर खाना खाता और फिर क्रिकेट एकेडमी के लिए निकल जाता. दिन रात की यह मेहनत उस वक्त रंग लाई, जब अर्णव का सिलेक्शन अंडर-14 यूपी टीम में हुआ.

यूपी टीम में दमदार बैटिंग
अर्णव ने इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया और उसने हर मैच में अच्छा स्कोर किया, जिसकी बदौलत यूपी की टीम में सभी मैच उसको खिलाए गए और यूपी टीम चैंपियन बनी. अर्णव की माता व्हीलचेयर पर होने के बावजूद अपने बेटे को बॉलिंग कराकर प्रैक्टिस कराती हैं, जबकि सहारनपुर क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से भी अर्णव की परिस्थितियों को देखते हुए हर संभव मदद की गई.

आज एक बार फिर से सहारनपुर का क्रिकेट ऊंचाइयों को छू रहा है. सहारनपुर से निकलने वाले कई खिलाड़ी आज अंडर-19 इंडियन टीम सहित आई.पी.एल में धमाल मचा रहे हैं. जबकि अर्णव का सपना है कि वह इंडियन टीम में खेलकर अपने माता-पिता और शहर सहित देश का नाम रोशन करे.

व्हीलचेयर पर बैठकर मां कराती हैं बॉलिंग
खिलाड़ी अर्णव ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि मेरे पापा जिनको 2 साल पहले पैरालिसिस का अटैक आया था और माता बचपन से ही व्हीलचेयर पर हैं. 4 साल पहले मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था और क्रिकेट खेलने का जुनून मुझे किसी खिलाड़ी को देखकर नहीं, बल्कि अंदर से ही आया कि मुझे क्रिकेट खेलना चाहिए. मैं राइट हैंड बैड्समैन हूं, तो सबसे अच्छा प्लेयर मुझे विराट कोहली और रोहित शर्मा लगते हैं. उन दोनों खिलाड़ियों को फॉलो करते हुए ही मैं क्रिकेट खेल रहा हूं. मेरी माता ने मुझे शुरू से ही बहुत सपोर्ट किया है. जब मैं प्रैक्टिस करता हूं, तब मेरी माता व्हीलचेयर पर बैठकर मुझे बोलिंग कराती हैं, जिससे कि मैं अपनी प्रेक्टिस अच्छे से कर सकूं.

बेटे ने क्रिकेट खेलने की जताई इच्छा
अर्णव की माता कुसुम ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि मेरा बेटा पिछले 4 साल से क्रिकेट खेल रहा है. मेरा बेटा इस साल अंडर-14 खेलकर आया है, जिसमें उसने यूपी को प्रेजेंट किया. बच्चों को इस तरीके से क्रिकेट खेलते हुए बहुत ही अच्छा लग रहा है, क्योंकि जब वह स्कूल जाया करता था, तब दूसरे बच्चों को देखकर वह भी क्रिकेट खेलना चाहता था. तब उसने आकर मुझे क्रिकेट खेलने की इच्छा जताई और घर की स्थिति खराब होने के बावजूद भी मैंने उसको क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन कराई.

उन्होंने कहा कि मुझे उसके अंदर एक शुरू से ही जुनून दिखता था और मुझे लगता है मेरा बेटा जिस तरीके से अभी खेल रहा है आने वाले समय में वह बहुत अच्छा बेस्ट मैन बनेगा. घर की स्थिति ठीक नहीं है अर्णव के पिता को 2 साल पहले लाइसेंस अटैक आया था जबकि मैं शुरू से ही व्हीलचेयर पर हूं, मैंने हमेशा उसके साथ मेहनत की है स्कूल के लिए खाना बनाने से लेकर क्रिकेट की प्रैक्टिस में उसका सहयोग करती हूं.

क्रिकेट एसोसिएशन की तरफ से मिली मदद
क्रिकेट एसोसिएशन के सेक्रेटरी लतीफ-उर-रहमान ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि सहारनपुर के क्रिकेट खिलाड़ियों को हमारी एसोसिएशन लगातार आगे बढ़ा रही है. यही कारण है कि सहारनपुर से अभी तक निकले कई खिलाड़ी अंडर-19 टीम और आईपीएल में धमाल मचा रहे हैं. उसी कड़ी में सहारनपुर का एक 14 वर्षीय बच्चा अर्णव हाल ही में अंडर-14 क्रिकेट टीम में यूपी की टीम की ओर से धमाल मचा कर आया है, जो एक बेहतर बैट्समैन है. घर की स्थिति बेहद खराब होने के चलते इसको एसोसिएशन की ओर से पूरे तरीके से सपोर्ट किया गया और यही कारण है कि आज यह बच्चा पूरी मेहनत करके सहारनपुर का नाम रोशन करके आया है.

नालंदा वर्ल्ड स्कूल के एम.डी मुकुल चौधरी ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि हमारे स्कूल और हमारे जनपद के लिए बड़ी खुशी की बात है कि हमारे स्कूल का एक बच्चा जो कक्षा 9 का छात्र है, उसका सिलेक्शन यूपी के अंडर-14 टीम में हुआ है. बच्चा शुरू से ही मेहनती है और लगातार हम लोगों की नजर उस पर बनी हुई थी. बच्चे के अंदर लगन इतनी है कि वह छुट्टी वाले दिन भी प्रैक्टिस के लिए आता है. उसी का नतीजा है कि बच्चा आज यूपी में अपने स्कूल और अपने परिवार का नाम रोशन कर रहा है.



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