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पिच पर निकाली सफेद रुमाल और कर दिया ‘सरेंडर’, कपिल देव के बड़े छक्कों ने कर दिया गेंदबाज को मजबूर, ऐसा दोबारा नहीं हुआ

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पिच पर निकाली सफेद रुमाल और कर दिया ‘सरेंडर’, ऐसा दोबरा कभी नहीं हुआ

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80 के दशक की यह घटना क्रिकेट इतिहास के सबसे मज़ेदार और खेल भावना से भरे पलों में से एक मानी जाती है. न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज़ जर्मी कॉने  द्वारा कपिल देव के सामने सफेद रुमाल दिखाकर ‘सरेंडर’ करने का यह किस्सा 21 दिसंबर 1980 को ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर हुआ था. 

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1980 में गाबा मैदान पर न्यूजीलैंड के खिलाड़ी जर्मी कॉने ने सफेद रुमाल दिखाकर किया ता कपिल देव के सामने सरेंडर

नई दिल्ली.  क्रिकेट के मैदान पर अक्सर तनाव और स्लेजिंग देखने को मिलती है, लेकिन 46 साल पहले  भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच हुए एक मैच में कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरे स्टेडियम को हँसने पर मजबूर कर दिया.  भारत के दिग्गज ऑलराउंडर कपिल देव अपनी आक्रामक बल्लेबाज़ी के चरम पर थे और न्यूज़ीलैंड के जर्मी कॉने ने उनके सामने घुटने टेकने के बजाय अपनी जेब से सफेद रुमाल निकालकर एक मज़ेदार अंदाज़ में हार स्वीकार कर ली.

80 के दशक की यह घटना क्रिकेट इतिहास के सबसे मज़ेदार और खेल भावना से भरे पलों में से एक मानी जाती है. न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज़ जर्मी कॉने  द्वारा कपिल देव के सामने सफेद रुमाल दिखाकर ‘सरेंडर’ करने का यह किस्सा 21 दिसंबर 1980 को ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर हुआ था.

कपिल का आक्रामक अवतार

यह मैच बेंसन एंड हेजेज वर्ल्ड सीरीज़ कप  का हिस्सा था. भारतीय टीम मुश्किल में थी और कपिल देव क्रीज़ पर आए थे. न्यूज़ीलैंड की ओर से जर्मी कॉने गेंदबाज़ी कर रहे थे, जो अपनी मध्यम गति की गेंदबाज़ी के लिए जाने जाते थे. कपिल देव ने अपनी पारी के दौरान जर्मी कॉने की लगातार दो गेंदों पर दो बेहद लंबे छक्के जड़ दिए. पहली गेंद पर उन्होंने मिड-ऑफ के ऊपर से एक शानदार छक्का मारा. अगली ही गेंद पर उन्होंने उसी दिशा में पहले से भी ज़ोरदार प्रहार किया, जो सीधा स्टैंड्स में जा गिरा.

सफेद रुमाल का किस्सा

जैसे ही कॉने तीसरी गेंद फेंकने के लिए अपने रन-अप की ओर वापस मुड़े, उन्होंने महसूस किया कि कपिल को रोकना नामुमकिन है तो उन्होंने खेल भावना और मज़ाक के अंदाज़ में अपनी जेब से एक सफेद रुमाल निकाला और उसे कपिल की तरफ लहराते हुए ‘सरेंडर’ (आत्मसमर्पण) का इशारा किया. इस नज़ारे को देख कपिल देव खुद अपनी हँसी नहीं रोक पाए और पूरा गाबा स्टेडियम ठहाकों से गूंज उठा。कॉने ने बाद में बताया कि यह एक ‘मॉक सरेंडर’ (झूठा आत्मसमर्पण) था. उस मैच में कपिल देव 75 रन (51 गेंद) इसमें कई बड़े छक्के शामिल थे, जिन्होंने न्यूज़ीलैंड के आक्रमण को ध्वस्त कर दिया. बाद में पिटने के बाद कॉने ने बल्लेबाज़ी में कमाल दिखाया और अपनी टीम को जीत दिलाई. न्यूज़ीलैंड की जीत न्यूज़ीलैंड ने यह रोमांचक मैच 3 विकेट से जीत लिया था.

आज के दौर के प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में जहाँ खिलाड़ी एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं, वहीं जर्मी कॉने और कपिल देव का यह पल हमें याद दिलाता है कि क्रिकेट आखिर में एक खेल है, जिसे आनंद और सम्मान के साथ खेला जाना चाहिए.



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