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5th Gen Fighter Jet Sukhoi 57 Deal With India Update: मौजूदा वक्त में रूस की लॉटरी पर लॉटरी लग रही है. होर्जुम संकट से दुनिया में तेल महंगा हुआ. इससे रूस की कमाई खूब बढ़ गई है. अब हथियार बाजार में उसकी बांछें खिल गई है. उसके पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट सुखोई-57 की डिमांड खूब बढ़ गई है. कई देशों से इस जेट के लिए उसकी डील हुई. इस बीच भारत से डील के लेकर भी बातें काफी आगे बढ़ गई हैं.
रूसी पांचवीं पीढ़ी फाइटर जेट सुखोई-57 की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. फोटो- रायटर
पश्चिम एशिया में भड़की जंग और होर्जुम संकट के बीच बीते कुछ दिनों से रूस की झोली में खूब धन बरस रहे हैं. होर्जुम संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कच्चे तेल का भाव काफी बढ़ गया है. साथ ही तेल की आपूर्ति भी बाधित हुई. रूस इस स्थिति का खूब फायदा उठा रहा है और टैंकर भर-भरकर तेल बेच रहा है. इससे उसके तेल की डिमांड काफी बढ़ गई है. उसकी खूब कमाई हो रही है. इस बीच उसके लिए एक और अच्छी खबर आई है. एक तरफ अमेरिकी फाइटर जेट्स जंग के मैदान में धराशायी हो रहे हैं वहीं रूसी पांचवीं पीढ़ी के जेट सुखोई-57 की डिमांड बढ़ती जा रही है. एक रिपोर्ट के मुताबिक कई देश रूसी जेट की खरीद में जुटे हैं. वे रूस के साथ इस जेट लिए डील कर रहे हैं. ऐसे में इस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के लिए रूस के साथ भारत की डील कहां तक पहुंची है, हम उसकी भी चर्चा करेंगे.
दरअसल, मौजूदा वक्त में दुनिया के केवल तीन देश अमेरिका, चीन और रूस के पास पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स हैं. अमेरिका के पास एफ-22 और एफ-35, चीन के पास जे-20 और जे-35 जेट्स हैं. रूस ने अपना सुखोई-57 पांचवीं पीढ़ी का जेट बनाया है. कुछ समय पहले तक रूसी जेट को खरीददार नहीं मिलने की बात आ रही थी. लेकिन, इस ताजा रिपोर्ट ने रूसी जेट को लेकर दुनिया के भरोसे को बढ़ा दिया है.
एक डिफेंस न्यूज वेबसाइट militarywatchmagazine.com की रिपोर्ट के मुताबिक रूस की डिफेंस एक्सपोर्ट कंपनी रोसोबोरोनेक्सपोर्ट ने बड़ी सफलता का दावा किया है. कंपनी ने पुष्टि की है कि सुखोई-57 (Su-57) फाइटर जेट के लिए कई देशों ने ऑर्डर दे दिए हैं. हालांकि कंपनी ने खरीदार देशों के नाम नहीं बताए, लेकिन कहा कि सुखोई-57E एक्सपोर्ट वर्जन में काफी दिलचस्पी है और ग्राहकों की सूची लगातार बढ़ रही है. कई देशों ने पहले ही इस रूसी फाइटर जेट के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन कर लिए हैं.
सुखोई-57 की खासियतें
सुखोई-57 दुनिया में सेवा में मौजूद सिर्फ पांच पांचवीं पीढ़ी के फाइटर में से एक है. अन्य विमान चीनी J-20 और J-35, तथा अमेरिकी F-22 और F-35 हैं. विशेषज्ञों के अनुसार सुखोई-57 का एवियोनिक्स पुराने F-22 से काफी बेहतर है, हालांकि F-35 और आधुनिक चीनी फाइटर से थोड़ा पीछे माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी ताकत है हथियार बे में लंबी दूरी की मिसाइलों की विविधता, जो किसी भी अन्य स्टेल्थ विमान से ज्यादा है. साथ ही इसकी रेंज F-22 से दोगुनी है. रूस-यूक्रेन युद्ध में इसे हाई इंटेंसिटी कॉम्बैट टेस्टिंग मिली है.
अगस्त 2025 में रूसी एयरोस्पेस फोर्सेस के डिप्टी कमांडर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अलेक्जेंडर माक्सिमत्सेव ने कहा था कि नई उत्पादन सुविधाओं के शुरू होने के बाद सुखोई-57 की डिलीवरी तेजी से हो रही है. फरवरी 2025 में रोसोबोरोनेक्सपोर्ट के प्रमुख अलेक्जेंडर मिखेयेव ने पुष्टि की थी कि पहले विदेशी ग्राहक को 2025 में ही विमान डिलिवर कर दिए जाएंगे. अल्जीरिया को Su-57 का पहला निर्यात ग्राहक माना जाता है. नवंबर 2025 में खबर आई थी कि अल्जीरियाई वायु सेना में ये विमान ऑपरेशनल हो गए हैं. इसके अलावा मध्य पूर्व में भी कॉन्ट्रैक्ट साइन होने की पुष्टि हुई है. फरवरी 2026 में रूसी इंडस्ट्री एंड ट्रेड मिनिस्टर एंटोन अलिखानोव ने कहा था कि मध्य पूर्व में सुखोई-57 के लिए कुछ कॉन्ट्रैक्ट साइन हो चुके हैं, हालांकि विवरण नहीं बता सकते.
संभावना जताई जा रही कि मध्य पूर्व में ईरान वह देश हो सकता है जिसने सुखोई-57 की डील की हो. उत्तर कोरिया भी लंबे समय से रूसी फाइटर में दिलचस्पी दिखा रहा है. 2023 में उत्तर कोरियाई अधिकारियों ने सुखोई-57 कॉकपिट और उत्पादन सुविधाओं का निरीक्षण किया था. यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरिया के समर्थन के कारण रूस उत्तर कोरिया को सुखोई-57 सप्लाई करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों का काट निकाल सकता है.
भारत से संभावित डील
सुखोई-57 के लिए भारत के साथ संभावित डील सबसे ज्यादा चर्चा में है. इसी साल जनवरी में भारत के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि सुखोई-57 के लाइसेंस उत्पादन की बातचीत एडवांस लेवल में पहुंच गई है. जून 2025 में रूस ने भारत को फाइटर के सोर्स कोड तक देने का ऑफर दिया था. दिसंबर 2025 में एक अन्य रूसी अधिकारी ने कहा था कि नई सुखोई-57 वैरिएंट को भारत के साथ संयुक्त रूप से विकसित करने का कार्यक्रम चलाया जा सकता है. इसमें भारत को प्रमुख तकनीकों का मालिकाना हक मिलेगा.
रिपोर्ट्स के अनुसार रक्षा मंत्रालय निकट भविष्य में 40 सुखोई-57 की खरीद पर विचार कर रहा है, ताकि वायु सेना की सबसे मजबूत फ्रंटलाइन यूनिट्स की क्षमता तेजी से बढ़ाई जा सके. लाइसेंस उत्पादन शुरू होने से पहले यह खरीद एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है. रोसोबोरोनेक्सपोर्ट के बयान में इसी तरह के डील का जिक्र हो सकता है. सुखोई-57 की निर्यात सफलता रूस के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद उसकी हाई-एंड डिफेंस टेक्नोलॉजी की मांग बनी हुई है. अल्जीरिया में पहले ही सुखोई-57 ऑपरेशनल है.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें


