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ये रिकॉर्ड रन चेज था जब भारत ने घरेलू मैदान पर पहली बार टेस्ट इतिहास में 387 रनों का विशाल लक्ष्य हासिल किया था. मुंबई हमलों के ठीक बाद मिली इस जीत ने पूरे देश को एक साथ जश्न मनाने का मौका दिया. हार्मिसन, फ्लिंटॉफ और स्वान जैसे विश्व स्तरीय गेंदबाज चेन्नई की तपती गर्मी और भारतीय बल्लेबाजों के प्रहार के आगे पस्त हो गए
18 साल पहले चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ युवराज सिंह और सचिन तेंदुलकर ने रचा था इतिहास
नई दिल्ली. दिसंबर 2008 भारत एक गहरे जख्म से जूझ रहा था. मुंबई पर हुए आतंकी हमलों के काले साये के बीच क्रिकेट का मैदान फिर से सज रहा था. चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम की वो दरकती हुई पिच, सामने इंग्लैंड के आग उगलते गेंदबाज और चौथी पारी में 387 रनों का पहाड़ जैसा लक्ष्य. इतिहास गवाह था कि भारत ने कभी इतना बड़ा स्कोर चेज नहीं किया था लेकिन उस दिन चेपॉक की मिट्टी पर कुछ ऐसा लिखा जाना था, जो क्रिकेट की किताबों में ‘अमर’ होने वाला था.
जब चौथे दिन का खेल खत्म होने वाला था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि भारत जीत की ओर देखेगा भी. लेकिन वीरेंद्र सहवाग ने सिर्फ 68 गेंदों पर 83 रनों की ऐसी आतिशी पारी खेली कि स्टीव हार्मिसन और एंड्रयू फ्लिंटॉफ जैसे दिग्गज गेंदबाज असहाय नजर आने लगे. सहवाग ने इंग्लैंड के मनोवैज्ञानिक दबाव को धुआं कर दिया था.
अंतिम दिन: जब सचिन ने थामा मोर्चा
अंतिम दिन भारत को जीत के लिए बड़ी मेहनत करनी थी पिच टूट रही थी, गेंद टर्न ले रही थी और ग्रीम स्वान व मोंटी पनेसर फिरकी का जाल बुन रहे थे वहीं जिमी एंडरसन, हार्मिसन गेंद को रिवर्स स्विंग कराकर बल्लेबाजों के लिए जाल बुन रहे थे लेकिन एक छोर पर क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर अडिग खड़े रहे. सचिन ने उस दिन सिर्फ रन नहीं बनाए, बल्कि उस जख्मी देश की उम्मीदों को सहलाया उन्होंने शानदार नाबाद 103 रन बनाए. कहानी सचिन पर खत्म नहीं हुई असली हीरों की इंट्री अभी बाकी थी.
महफ़िल लूट ले गए ‘युवी’
सचिन एक छोर संभाल रहे थे, लेकिन दूसरे छोर पर इंग्लैंड लगातार दबाव बना रहा था. ऐसे में क्रीज पर आए युवराज सिंह युवराज ने उस दिन जो तेवर दिखाए, उसने मैच का रुख पूरी तरह भारत की ओर मोड़ दिया. गले में भीगी रुमाल के साथ बल्लेबाजी करने आए युवराज ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से फ्लिंटॉफ और हार्मिसन की जमकर धुनाई की. युवराज सिंह ने नाबाद 85 रनों की वह यादगार पारी खेली, जिसने सचिन के शतक के साथ मिलकर 163 रनों की अटूट साझेदारी की जब सचिन ने विजयी रन बनाया, तो युवराज ने उन्हें गले लगा लिया वह नजारा आज भी हर भारतीय क्रिकेट प्रशंसक की आंखों में ताजा है.
क्यों खास थी यह जीत?
ये रिकॉर्ड रन चेज था जब भारत ने घरेलू मैदान पर पहली बार टेस्ट इतिहास में 387 रनों का विशाल लक्ष्य हासिल किया था. मुंबई हमलों के ठीक बाद मिली इस जीत ने पूरे देश को एक साथ जश्न मनाने का मौका दिया. हार्मिसन, फ्लिंटॉफ और स्वान जैसे विश्व स्तरीय गेंदबाज चेन्नई की तपती गर्मी और भारतीय बल्लेबाजों के प्रहार के आगे पस्त हो गए. चेन्नई का वह टेस्ट मैच आज भी याद दिलाता है कि जब इरादे नेक हों और बल्ला सचिन-युवराज जैसा हो, तो दुनिया का कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है.


