5.3 C
Munich

Justice Rajesh Bindal Retire । Supreme Court Judge । अदालत के कामकाज को बनाया हाईटेक, मुकदमों का तेजी से करते थे निपटारा, जस्टिस राजेश बिंदल रिटायर

Must read


होमताजा खबरदेश

अदालत के कामकाज को बनाया हाईटेक,सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल हुए रिटायर

Last Updated:

जस्टिस बिंदल ने साल 1985 में वकालत की शुरुआत की थी. उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में सबसे पहले अपनी प्रैक्टिस शुरू की. साल 2006 में उन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया था. अपने शानदार कार्यकाल में वह अहम मामलों का बहुत तेजी से निपटारा करते थे. जस्टिस बिंदल को इनडायरेक्ट टैक्स से जुड़े मामलों का बहुत गहरा अनुभव था.

ख़बरें फटाफट

Zoom

जस्टिस बिंदल को फरवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत किया गया.

नई दिल्ली/चंडीगढ़. सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस राजेश बिंदल बुधवार को रिटायर हो गए. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के अलावा कई हाईकोर्ट में करीब 20 साल तक लंबा और सफल न्यायिक करियर बिताया. अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस बिंदल ने अप्रत्यक्ष कर (इंडायरेक्ट टैक्स) मामलों में विशेष पहचान बनाई. साथ ही उन्होंने न्यायिक प्रणाली और मध्यस्थता में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में भी अहम योगदान दिया. उन्होंने पंजाब-हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, कलकत्ता और इलाहाबाद हाईकोर्ट में सेवाएं दीं.

हरियाणा के अंबाला में 16 अप्रैल 1961 को जन्मे जस्टिस बिंदल ने 1985 में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री हासिल की. उसी साल सितंबर में उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में वकालत शुरू की. वह एराडी ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट में सतलुज-यमुना जल विवाद के मामले में हरियाणा की ओर से पेश हुए थे. 22 मार्च 2006 को उन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया.

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एक वरिष्ठ वकील ने कहा, “अपने कार्यकाल के दौरान उनकी पहचान ऐसे जज के रूप में रही, जो मामलों का तेजी से निपटारा करते थे और जिन्हें अप्रत्यक्ष कर मामलों का गहरा अनुभव था.” जस्टिस बिंदल के मार्गदर्शन में हरियाणा ने हाईकोर्ट और जिला स्तर पर ‘मुकदमा प्रबंधन प्रणाली’ विकसित की, जिससे सरकारी मुकदमों को बेहतर तरीके से संभाला जा सके. बाद में इस प्रणाली को पंजाब, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी अपनाया गया.

वह राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की एक समिति के सदस्य भी थे. इस समिति का काम लोक अदालतों और मध्यस्थता व्यवस्था की समीक्षा करना और कमजोर वर्गों के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के सुझाव देना था. जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में ट्रांसफर होने से पहले जस्टिस बिंदल चंडीगढ़ ज्यूडिशियल एकेडमी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष रहे. इसके अलावा, वे कंप्यूटर कमेटी सहित कई समितियों के चेयरमैन भी थे.

उन्होंने कई सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इनमें (मेडिको-लीगल जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सिस्टम) भी शामिल है. यह एक वेब-आधारित और केंद्रीकृत सिस्टम है, जिसका इस्तेमाल मेडिको-लीगल और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार करने के लिए किया जाता है. इसमें डॉक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों को उनकी भूमिका के अनुसार सुरक्षित एक्सेस दिया जाता है. शुरुआत में यह सिस्टम पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में लागू किया गया था. बाद में इसे हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी अपनाया गया. दिसंबर 2023 में केंद्र सरकार ने इसे सभी राज्यों में लागू करने का फैसला किया.

जस्टिस बिंदल का बाद में ट्रांसफर कलकत्ता हाईकोर्ट में हुआ, जहां उन्होंने 5 जनवरी 2021 को शपथ ली. 27 अप्रैल 2021 से उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी सौंपी गई. इसके बाद उन्होंने 11 अक्टूबर 2021 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली. फरवरी 2023 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत किया गया.

About the Author

authorimg

Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



Source link

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article