कानपुर: पहलगाम आतंकी हमले में पति शुभम द्विवेदी को खोने वाली कानपुर की ऐशान्या ने दर्द, हिम्मत और उम्मीद की ऐसी कहानी कही है, जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हो जाएं. एक साल पहले 22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में शुभम की हत्या कर दी गई थी. सबसे दर्दनाक बात यह रही कि ऐशान्या के सामने ही आतंकियों ने उनके पति को गोली मार दी थी. अब इस हादसे को एक साल पूरा होने जा रहा है, लेकिन वह दर्द आज भी ताजा है.
ऐशान्या ने कहा कि बीता हुआ एक साल उनके लिए किसी परीक्षा से कम नहीं था. हर सुबह शुभम की याद के साथ शुरू होती थी और हर रात उसी दर्द के साथ खत्म होती थी. शुरुआत के कुछ महीने तो ऐसे थे जब खुद को संभालना बेहद मुश्किल था. उन्होंने कहा कि अगर परिवार साथ न खड़ा होता, तो शायद मैं टूट जाती. मेरे माता-पिता और शुभम के माता-पिता ने मुझे संभाला, हिम्मत दी और जीने का सहारा दिया. उसी ताकत से आज मैं फिर खड़ी हूं.
आखिरी सांस तक रहेंगी शुभम की यादें
ऐशान्या ने भावुक होकर कहा कि शुभम अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन वह हमेशा मेरे दिल में जिंदा रहेंगे. उनकी यादें मेरी आखिरी सांस तक मेरे साथ रहेंगी. उन्होंने कहा कि अब मैंने फैसला किया है कि मैं रोकर नहीं, बल्कि उनके सपनों को पूरा करके जीऊंगी. अब जिंदगी को नया मोड़ देना है और खुद को मजबूत बनाना है.
ऐशान्या ने बताया कि शुभम को घूमने-फिरने का बहुत शौक था. नई जगहें देखना, सफर करना और जिंदगी को खुलकर जीना उन्हें पसंद था. उन्होंने कहा कि अब मैं उनके इस अधूरे सपने को पूरा करूंगी. जहां-जहां जाऊंगी, महसूस करूंगी कि शुभम मेरे साथ हैं. मेरी आंखों से वह दुनिया देख रहे हैं.
न्याय तब होगा जब आतंकवाद खत्म होगा
जब उनसे पूछा गया कि क्या शुभम को न्याय मिल गया, तो ऐशान्या ने बेहद साफ शब्दों में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव जैसे कदम जरूर हुए हैं, लेकिन असली न्याय तब मिलेगा जब देश से आतंकवाद पूरी तरह खत्म होगा. उन्होंने कहा कि जब कोई और पत्नी अपने पति को, कोई मां अपने बेटे को और कोई परिवार अपने अपने लोगों को इस तरह नहीं खोएगा, तभी सही मायने में इंसाफ होगा.
यह हमला सिर्फ लोगों पर नहीं, इंसानियत पर था
ऐशान्या ने कहा कि उस दिन वहां घूमने आए लोग खुश थे, बेफिक्र थे. किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पल में सब बदल जाएगा. अचानक आतंकी आए और गोलियां चलाने लगे. उन्होंने कहा कि लोगों से धर्म पूछकर हमला किया गया. यह सिर्फ लोगों पर नहीं, बल्कि इंसानियत और देश की एकता पर हमला था.
ऐशान्या ने कहा कि मैंने प्रधानमंत्री से भी मांग की थी कि इस हमले में जान गंवाने वालों को शहीद का दर्जा दिया जाए. यह उन परिवारों के सम्मान की बात है. उन्होंने कहा कि शुभम लौटकर नहीं आएंगे, लेकिन उनकी यादें, उनके सपने और उनका प्यार हमेशा मेरे साथ रहेगा. अब मैं आंसुओं के साथ नहीं, हौसले के साथ नई जिंदगी शुरू करूंगी.


